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बीड़2 घंटे पहले
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- संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना के अधीक्षण यंत्री ने भेजा था प्रस्ताव, सरकार ने हरियाणा की कंपनी को जारी किए टेंडर
संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना से निकलने वाली वेस्टेज ऑक्सीजन को मशीनरी द्वारा एकत्रित करना शुरू कर दिया गया है। दोनों हाइड्रोजन प्लांट से रोजाना करीब 30 सिलेंडरों की आपूर्ति करने जितनी ऑक्सीजन बर्बाद होती है। इसे देखते हुए प्लांट के अधीक्षण यंत्री ने इसे एकत्रित करने के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा।
मंजूरी मिलते ही हरियाणा की ऐयरॉक्स कंपनी को टेंडर जारी किया जा चुका है। इसके जरिए हाइड्रोजन प्लांट में जरूरी मशीनरी लगाकर ऑक्सीजन एकत्रित कर सिलेंडरों में भरकर दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब तीन से चार माह का समय लगने का अनुमान है, जबकि कंपनी का कहना है इस संकट के समय ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए कार्य समय से पहले पूरा करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा सरकार ने मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी पावर प्लांटों की ऑक्सीजन उपयोग में लाई जाए।
उपयोग नहीं हाेने से बाहर उड़ा रहे
परियोजना में बिजली निर्माण के समय जनरेटर को ठंडा रखने के लिए एक स्थान पर हाइड्रोजन गैस का निर्माण किया जाता है। उसी समय ऑक्सीजन बनती, जिसका उपयोग नहीं होने के कारण बाहर उड़ा दिया जाता है। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी को कुछ हद तक पूरा किया जा सके इसलिए यहां मशीनरी लगाकर ऑक्सीजन का भंडारण सिलेंडरों मे किया जा सकेगा। जिसमें परियोजना के दोनों हाइड्रोजन प्लांट से रोजाना करीब 162 क्यूबिक लीटर यानी करीब 30 सिलेंडरों में ऑक्सीजन का भंडारण किया जा सकेगा। अभी सिंगाजी परियोजना सहित सारणी में कार्य शुरू हो चुका है।
सरकार से मिले निर्देश
सरकार से मिले निर्देश के बाद हाइड्रोजन प्लांट से बाहर छोड़ी जाने वाली ऑक्सीजन को एकत्रित कर सिलेंडर मे भरने पर काम किया जा रहा है। जरूरी मशीनरी लगते ही जल्द ही परियोजना से रोजाना 162 क्यूबिक लीटर ऑक्सीजन सिलेंडर में भरी जा सकेगी। -आरपी पांडे, पीआरओ, सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना दोंगालिया