नर्मदा परिक्रमा पर कोरोना का साया: लॉकडाउन बना मुसीबत; 3 हजार KM की फेरी कर वापस लौट रहे लोग, कुछ मंदिरों में तो कुछ गांवों में फंसे

नर्मदा परिक्रमा पर कोरोना का साया: लॉकडाउन बना मुसीबत; 3 हजार KM की फेरी कर वापस लौट रहे लोग, कुछ मंदिरों में तो कुछ गांवों में फंसे


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गौरेलाएक घंटा पहले

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नर्मदा परिक्रमा करने वाले लोग शनिवार को अंजनी गांव में भी रुके थे। यहां कुछ देर रुकने के बाद लोग परिक्रमा पूरी करने अमरकंटक की ओर आगे बढ़ गए।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों का असर अब नर्मदा परिक्रमा पर भी पड़ने लगा है। जो लोग आज से 6 महीने पहले छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से लगे अमरकंटक से परिक्रमा के लिए रवाना हुए थे उनमें से कई लोगों की फेरी कोरोना और लॉकडाउन के कारण पूरी नहीं हो पा रही है। हालांकि कुछ लोग किसी तरह से परिक्रमा समाप्त करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। पर हालात इतने खराब हैं कि कुछ लोग परिक्रमा मार्ग के नर्मदा के तटों और तटों से सटे गांव में ही रुके हुए हैं। जो लोग वापस भी लौट रहे हैं उनको लेकर भी प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किए हैं।

नर्मदा तीर्थों के दर्शन बिना परिक्रमा अधूरी
दरअसल, मान्यता है कि जो लोग नर्मदा परिक्रमा के लिए निकलते हैं वो लोग नर्मदा तीर्थों के दर्शन करते हुए ही आगे बढ़ते हैं। इस तरह वे परिक्रमा मार्ग अमरकंटक से डिंडोरी, मंडला, जबलपुर होते हुए गुजरात के भरूच तक जाते हैं। लोगों का मानना है कि वे जब तक परिक्रमा मार्ग के नर्मदा के तीर्थ स्थलों के दर्शन नहीं कर लेंगे तब तक उनकी परिक्रमा पूरी नहीं होगी। लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के कारण कई लोग होशंगाबाद, जबलपुर और अन्य परिक्रमा मार्गों पर रुके हुए हैं।

अंजनी गांव से अमरकंटक की ओर आगे बढ़ रहे लोग। अमरकंटक जाकर इनकी परिक्रमा समाप्त हो जाएगी।

अंजनी गांव से अमरकंटक की ओर आगे बढ़ रहे लोग। अमरकंटक जाकर इनकी परिक्रमा समाप्त हो जाएगी।

कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा
एक तरफ कुछ लोग नर्मदा के अलग-अलग तीर्थ स्थानों पर रुके हुए हैं। वहीं कुछ लोग वापस भी लौट रहे हैं। शनिवार को भी बड़ी संख्या में लोग गौरेला-पेंड्रा-मरवाही होते हुए वापस लौटे हैं। लेकिन प्रशासन ने इनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की है। इन्हें बिना टेस्ट कराए ही जिले की सीमा से आगे बढ़ने दिया जा रहा है, जिसके चलते इनमें कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा है। वापस लौटने वालों में कुछ लोग ऐसे भी शामिल हैं जो 3 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं।

3500 किलोमीटर लंबी होती है परिक्रमा
परिक्रमा मार्ग अमरकंटक के माई की बगिया से शुरू होकर मंडला, जबलपुर, भेड़ाघाट, नेमावर, नर्मदासागर,ओंकारेश्‍वर, बालकेश्‍वर, इंदौर, महेश्‍वर, सरदार सरोवर और गुजरात के भरूच तक जाती है। इसके बाद लोग वापस पोंडी होते हुए बिमलेश्वर, कोटेश्वर, रामकुंड, बड़वानी, ओंकारेश्वर, खंडवा, होशंगाबाद, महाराजपुर, मंडला से लौटते हुए अमरंकटक में अपनी परिक्रमा समाप्त करते हैं। कुल मिलाकर फेरी लगाने वाले लोग 3500 किलोमीटर की लंब परिक्रमा करते हैं।

अनूपपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में हर रोज मरीज बढ़ रहे
परिक्रमा करने वालों में अमरकंटक के आदिवासी इलाकों के अलावा मध्यप्रदेश के डिंडोरी, मंडला और आस-पास के लोग भी शामिल हैं। जबकि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हर राज कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बात अगर अनूपपुर जिले की करें तो यहां शनिवार को ही 90 कोरोना के मरीज मिले थे। इससे पहले शुक्रवार को भी 100 से ज्यादा केस सामने आए थे। वहीं अगर बात गोरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की करें तो यहां शनिवार को ही 301 मरीज मिले ।

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