जबलपुर के दोनों औषधि निरीक्षक हटाए गए: इंजेक्शन कालाबाजारी मामले में गिरी गाज, इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाले मेट्रो अस्पताल कर्मी पर अब तक नहीं कार्रवाई

जबलपुर के दोनों औषधि निरीक्षक हटाए गए: इंजेक्शन कालाबाजारी मामले में गिरी गाज, इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाले मेट्रो अस्पताल कर्मी पर अब तक नहीं कार्रवाई


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जबलपुर27 मिनट पहले

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न्यू मुनीष मेडिकल स्टोर्स मामले में दोनों औषधि निरीक्षकों पर भी आखिरकार गाज गिर ही गई।

कोरोना संकट के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में आखिरकार जिले में पदस्थ दोनों औषधि निरीक्षक हटा दिए गए। रविवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने तबादला आदेश जारी किए। औषधि निरीक्षक मनीषा धुर्वे को बालाघाट और औषधि निरीक्षक रामलखन पटेल को छतरपुर भेजा गया है।

दोनों को तत्काल प्रभाव से नवीन पदस्थापना स्थल पर उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश है। वहीं इस मामले में फरार दोनाें आरोपियों की अब तक तलाश पूरी नहीं हो पाई। इस मामले में रेमडेसिविर इंजेक्शन का मुख्य सप्लायर राजेश के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जानकारी के अनुसार खाद्य एवं आषधि नियंत्रक पी नरहरि ने तबादला आदेश जारी किया। मढ़ाताल गुरुद्वारा के पास न्यू मुनीष मेडिकल स्टार्स पर पिछले दिनों 5400 का इंजेक्शन 18000 हजार रुपए में ब्लैक में बेच रहे थे। शिकायत पर पहुंचे एसडीएम आशीष पांडे और ओमती पुलिस ने आरोपी दुकान कर्मियों को दबोच लिया था।

इसके बाद खाद्य एवं औषधि विभाग को कार्रवाई के लिए बुलाया गया। यह क्षेत्र मनीषा धुर्वे का है, लेकिन कार्रवाई के दौरान उनके न आने पर औषधि निरीक्षक रामलखन पटेल काे बुलाया गया।
थाने में प्रतिवेदन भेजने में की देरी
औषधि विभाग को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देते हुए एसडीएम ने थाने में प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिया। उधर, प्रतिवेदन न मिलने की वजह से पुलिस ने आरोपियों को छोड़ दिया।

हंगामा मचा तो आनन-फानन में ओमती थाने में प्रतिवेदन भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने फिर से दोनों दुकान के कर्मियों को दबोचा और जेल भेज दिया। दो दिन पहले दोनों के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई भी हुई।
दोनों औषधि निरीक्षों की बातचीत सोशल मीडिया में हो गई थी वायरल
इस मामले में औषधि निरीक्षक मनीषा व रामलखन पटेल के बीच फोन पर विवाद हुआ। इसके बाद ये बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसी बात ने तूल पकड़ा था। कलेक्टर ने दोनों को हटाने के लिए खाद्य विभाग के अधिकारी काे अवगत करा दिया था।

बाजार में कोरोना संबंधी दवाओं के अवैध भंडारण और कालाबाजारी को लेकर ढीली जांच से भी दोनों निरीक्षकों की भूमिका पर लगातार सवाल उठ रहे थे। तबादले के पीछे इन कारणों को जोड़कर देखा जा रहा है।
बालाघाट व छतरपुर में हुआ तबादला
जिले से हटाए गए दोनों औषधि निरीक्षक के स्थान पर दो अन्य औषधि निरीक्षकों को तैनात किया गया है। मनीषा धुर्वे को बालाघाट भेजने के साथ ही वहां पदस्थ शरद कुमार जैन को जबलपुर और छतरपुर भेजे गए रामलखन पटेल के स्थान छतरपुर से देवेन्द्र कुमार जैन को जबलपुर पदस्थ किया गया है।
मेट्रो अस्पताल के राजेश पर नहीं हुई कार्रवाई
वहीं इस मामले में ओमती पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने अब तक इस मामले में दुकान संचालक और कांचघर निवासी एक आरोपी को अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जबकि सील करने से पहले दुकान की सर्चिंग नहीं की गई।

जबकि उसी में रेमडेसिविर इंजेक्शन छुपाए जाने की सूचना थी। दुकान में लगे सीसीटीवी की जांच नहीं कराई गई। दुकान मालिक के वायरल ऑडियो में खुद वह खुलासा कर रहा है कि ड्रग इंस्पेक्टर 160 वायल फ्रंटियर से लेकर गया। मेट्रो हॉस्पिटल के राजेश की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क का पूरा सच सामने आएगा।

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