जिला अस्पताल की लापरवाही: पोस्टर लगाया – ऑक्सीजन बेड न होने के कारण कोरोना के नए मरीजों की भर्ती बंद

जिला अस्पताल की लापरवाही: पोस्टर लगाया – ऑक्सीजन बेड न होने के कारण कोरोना के नए मरीजों की भर्ती बंद


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गुना7 मिनट पहले

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गुना। भारत का संविधान देश के प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य का अधिकार देता है। साथ ही राज्यों को यह जिम्मेवारी भी देता है की प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। राज्य का यह कर्तव्य है कि किसी भी नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। लेकिन गुना जिले में इसका पालन नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में एक पोस्टर लगाकर नए मरीजों की भर्ती बंद कर दी है। इससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल अप्रैल माह में कोरोना मरीजों की रफ़्तार बहुत तेजी से बढ़ी है। अकेले अप्रैल माह में ही जिले में लगभग 1700 मरीज पॉजिटिव आये हैं। जिला अस्पताल में 97 ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड हैं। वहीँ 80 प्रतिशत अस्पताल को कोरोना के इलाज के लिए रिज़र्व कर लिया है। ओपीडी को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। केवल गंभीर मरीजों का इलाज किया जा सकता है। लेकिन नागरिकों की जान उस समय सांसत में फंस गयी जब विगत दिनों अस्पताल की मुख्य दीवारों पर एक पोस्टर लगा दिया गया। पोस्टर में यह लिखा गया है की नए मरीजों के लिए ऑक्सीजन एवं ऑक्सीजन बेड उपलब्ध नहीं हैं। पलब्ध होने पर मरीज को भर्ती कर लिया जायेगा। एक तरफ तो स्वास्थ्य विभाग हेल्थ बुलेटिन के माध्यम से यह दावा कर रहा है की स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। रोज सैकड़ों मरीज स्वस्थ होकर अपने घर जा रहे हैं , वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन इस तरह का पोस्टर लगाकर नागरिकों को गुमराह ही कर रहा है।

कोरोना वार्ड के दोनों रास्ते बंद अस्पताल प्रबंधन की असंवेदनशीलता की हद इस स्तर तक बढ़ गयी है की कोरोना वार्ड को जाने वाले दोनों रास्तों को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया है। एक तरफ के रस्ते को तो जाली लगाकर स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके पीछे अस्पताल का तर्क यह है की अनावश्यक भीड़ उधर न जाए , इस कारण ये व्यवस्था की गयी है।

अस्पताल में आइसोलेशन में माईजों की संख्या घटी एक अच्छी बात यह है की बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ होकर घर पहुँच रहे हैं। अस्पतालों के आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की संख्या भी घाट रही है। 26 अप्रैल को जहाँ अस्पतालों में 304 मरीज आइसोलेट थे , 27 अप्रैल को यह संख्या 260 हो गयी। 28 अप्रैल को 242 मरीज एवं 29 अप्रैल को 237 मरीज अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे। इन आंकड़ों को देखा जाए तो अस्पताल से मरीज डिस्चार्ज हुए हैं , लेकिन नए मरीजों को भर्ती नहीं किया गया है। जब मरीज ठीक होकर घर पहुँच रहे हैं तो ऐसी स्थिति में जो बेड खाली हो रहे हैं , वह तो नए मरीजों को दिए ही जा सकते हैं।

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