सटॉफ की लापरवाही से मौत: ऑक्सीजन हम लाकर दे रहे थे, अस्पताल वाले ठीक से लगा भी नहीं पाए, मोबाइल में व्यस्त था स्टाफ और चली गई मरीज की जान

सटॉफ की लापरवाही से मौत: ऑक्सीजन हम लाकर दे रहे थे, अस्पताल वाले ठीक से लगा भी नहीं पाए, मोबाइल में व्यस्त था स्टाफ और चली गई मरीज की जान


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  • We Were Bringing Oxygen, The Hospitalists Were Unable To Put It Properly, The Staff Was Busy In Mobile And Lost The Life Of The Patient.

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उज्जैन13 मिनट पहले

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बच्चों के साथ जयंत।

महज कुछ ही कदमों की दूरी पर था ऑक्सीजन सिलेंडर। बावजूद मेरे भाई की सांसें घुट गई। अस्पताल नहीं है यह…स्टाफ के लिए पिकनिक स्पाॅट है। पैरा मेडिकल स्टाफ घंटों मोबाइल पर व्यस्त रहता है। अगर मैं झूठ बोल रही हूं तो कलेक्टर इस अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज जब्त करें, पता लग जाएगा कि यहां मरीजों को जिंदगी नहीं….मौत दी जा रही है।

यह कहना है सांवेर रोड स्थित जेके अस्पताल में दम तोड़ने वाले जयंत चौहान की बेटी प्रियांशी का। मृतक के भाई का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही उनके भाई की मौत का कारण बनी। जांच में सच सामने आएगा। मेरे भाई के कातिलों पर हत्या की धाराओं में केस दर्ज हाेना चाहिए। मामले में अस्पताल संचालक जवाब देने से कन्नी काट रहे हैं। कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पापा के लिए नाश्ता लेकर गई….देखने तक नहीं दिया, दुत्कार कर भगा दिया
मृतक की 17 साल की बेटी प्रियांशी ने भास्कर को बताया कि 29 की सुबह बुधवार को वो बुआ की लड़की पूजा के साथ पापा के लिए नाश्ता लेकर गई थी। बड़े पापा इस समय नहाने के लिए घर आ गए थे। हम दोनों जब अस्पताल पहुंचे तो दूर से ही पापा के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। ड्यूटी स्टाफ से पूछा तो बताया कि सो रहे हैं और हमें दुत्कार कर भगा दिया। मिलने देना तो दूर, चेहरा तक नहीं देखने दिया। इस समय करीब 7:30 बज रहे थे। थोड़ी देर बाद एक डॉक्टर आकर बोला अपने घर वालों को बुला लो। मेरी तो समझ ही नहीं आया कि थोड़ी देर पहले पापा की नींद लगना बताया, फिर कहा पापा नहीं रहे।

स्टाफ के लिए मरीज के जीवन से महत्वपूर्ण थी मोबाइल पर बात करना

मृतक के बड़े भाई पंवासा निवासी हेमंतसिंह पिता अनोपसिंह चौहान ने कलेक्टर और एसपी को लिखित शिकायत में बताया है कि छोटे भाई जयंतसिंह चौहान (40) की तबीयत बिगड़ने पर 19 अप्रैल को जेके अस्पताल लेकर आए थे। तब से ऑक्सीजन लेवल 85-95 के बीच ही था। सिलेंडर की पूर्ति हम ही कर रहे थे। एक्स्ट्रा सिलेंडर भी अस्पताल को दे रखा था।

बावजूद उनके भाई ने गुरुवार सुबह दम तोड़ दिया। सुबह 5 बजे अगर स्टाफ सिलेंडर बदल देता तो, मेरा भाई आज जीवित होता। ड्यूटी डॉक्टर की लापरवाही से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के बाद भी खाली सिलेंडर बदला नहीं गया। अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर एवं प्रबंधक के विरुद्ध हत्या का प्रकरण पंजीबद्ध हाेना चाहिए। मामले की जांच के समय प्रबंधन की लापरवाही के सभी सबूत उपलब्ध कराऊंगा।

एक दिन पहले ऑक्सीजन सिलेंडर बदलना भूल गया था स्टाफ
बड़े भाई हेमंत के अनुसार 28 अप्रैल को भी यहां का स्टाफ सिलेंडर बदलना भूल गया था। शुक्र था कि अचानक मैं पहुंच गया। भाई की पल्स 10 तक नीचे आ गई थी। डॉक्टर पंपिंग कर रहे थे। जब मैंने कहा ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो चुका है और ये क्या कर रहे हो। तब उन्हें पता चला कि सिलेंडर खत्म हो चुका है। लापरवाही ऐसी कि सिलेंडर बदलने के लिए फ्लो मीटर खोलने के लिए 15 मिनट तक स्टाफ पाना ही ढूंढता रहा, तब जाकर सिलेंडर बदला गया। मैंने यह सोचकर शिकायत नहीं कि प्रेशर में गलती हो जाती है। काश उसी समय में लापरवाही पर सवाल उठाता तो मेरा भाई जिंदा होता।

इस बारे में कुछ नहीं कहना
^मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना। न ही यह बता सकता हूं कि गलती किसकी है या फिर किसकी नहीं है।
डॉ. कात्यायन मिश्र, प्रबंधक जेके अस्पताल
शिकायत मिली है

^इस मामले में शिकायत मिली है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
– आशीष सिंह, कलेक्टर उज्जैन

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