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जबलपुर22 मिनट पहले
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- दोपहर 2 से शाम 5:30 तक कोई कंट्रोलिंग नहीं हो पाई, टेलीकॉम कंपनी के फॉल्ट की वजह से घंटों कटा रहा कनेक्शन
निजी तथा सरकारी अस्पतालों, संक्रमितों के साथ-साथ अन्य सभी विभागों के बीच तालमेल बैठाए रखने के लिए बनाया गया कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर पूरी तरह सभी से कटा रहा। तकरीबन साढ़े तीन घंटे तक न तो टेलीफोन की पाँचों लाइनों में डायल टोन आई और न ही इंटरनेट को कनेक्टिविटी मिल पाई। सबसे ज्यादा मुसीबत उन संक्रमितों और परिजनों की रही जो किसी न किसी जरूरत से कंट्रोल रुम से जुड़ना चाह रहे थे।
बहरहाल, शाम 5:30 बजे कनेक्टिविटी हासिल हो पाई, तब कहीं जाकर हालात सामान्य हो पाए। दमोहनाका स्थित कोविड कंट्रोल रूम में रोज की तरह कामकाज सामान्य तौर पर चल ही रहा था कि सोमवार को दोपहर तकरीबन 2:30 बजे अनाचक पूरे सिस्टम ठप पड़ गए।
कर्मचारियों ने इसकी खबर आला अफसरों को करनी चाही तो पता चला कि टेलीफोन लाइनें भी बंद हो चुकी हैं। कुल मिलाकर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म होने जैसे हालात बन गए, क्योकि सेंटर के लिए कनेक्टिविटी ही सब कुछ है। टेलीकॉम कंपनी को खबर की गई, लंबे सुधार के बाद कनेक्टिविटी हासिल हो पाई।
24 घंटे वर्किंग, हर रोज 2000 से ज्यादा कॉल्स| चौबीस घंटे की शिफ्ट और पूरे संभाग से आने वाले फोन कॉल्स को इसी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से गाइड किया जाता है। अस्पतालों में बेड की स्थिति, ऑक्सीजन के अलावा होम आइसोलेशन में रह रहे संक्रमितों की सेहत में आने वाले उतार-चढ़ाव को यहीं से मार्गदर्शन दिया जाता है।
इमरजेंसी में कोई बैकअप नहीं| पूरे जिले का कंट्रोल रूम होने के बावजूद बिल्डिंग तक कनेक्टिविटी न पहुँचने पर अधिकारियों के पास कोई बैकअप प्लान नहीं है। जानकारों का कहना है कि गनीमत रही कि सुधार कार्य दो-ढाई घंटे में पूरा कर लिया गया। लेकिन इमरजेंसी के हालातों में कोई सेकेंड ऑप्शन भी जरूरी होना चाहिए।
प्लांट की बिजली गुल – इमरजेंसी मोबाइल यूनिट से पहुँचाए अस्पताल में सिलेंडर
सोमवार की रात में कोरोना के मरीजों को एक बार फिर ऑक्सीजन की कमी होने की जैसे ही सूचना मिली तत्काल ही इमरजेंसी मोबाइल यूनिट के वाहनों को रवाना किया गया और ऑक्सीजन सिलेंडर पहुँचाये गये। अधिकारियों ने बताया कि मदन महल स्थित शुभम हॉस्पिटल में ऑक्सीजन आधा घंटे की ही उपलब्ध थी। सिलेंडर लेने अस्पताल का वाहन रिछाई स्थित जैनिम प्लांट में गया।
वाहन जब यहाँ पहुँचा उसी दौरान प्लांट की बिजली गुल हो गई, जिससे सिलेंडर भरने का काम रुक गया। प्लांट में तैनात अधिकारी ललित ग्वालवंशी ने बताया कि सूचना के आधार पर आनन-फानन में मालवीय चौक स्थित यातायात थाने में खड़े मोबाइल यूनिट वाहन को अस्पताल के लिये रवाना किया गया।
वाहन से 5 सिलेंडर पहुँचाये गये ताकि ऑक्सीजन की कमी से मरीजों को परेशानी न हो। दूसरी तरफ 10 मिनट बाद जब प्लांट की बिजली चालू हुई तो यहाँ से भी वाहन को सिलेंडरों के साथ रवाना किया गया। हमारी टीम पूरे समय ड्यूटी कर रही है और जैसे ही सूचना मिलती है, उसी आधार पर तत्काल निर्णय लिया जाता है और सहायता पहुँचाई जाती है।
ऐसे सवालों का नहीं मिला जवाब
- परिजन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है, रिपोर्ट नहीं आई ऐसे में उनका संस्कार कैसे किया जाए?
- 5 दिनों पहले कोविड टेस्ट कराया गया था, लेकिन रिपोर्ट अभी तक हासिल नहीं हो पाई है।
- हॉस्पिटल में ऑक्सीजन खत्म हो गई है, डॉक्टरों से शिकायत पर भी सुनवाई नहीं हुई, जल्दी मदद भेजिए।
- बाजू में पडोसी परिवार कोविड संक्रमित हो गया है लेकिन निगम से कोई सेनिटाइज करने नहीं पहुँचा।
- हमारे परिजन को रेमडेसिविर इंजेक्शन की सख्त जरूरत है, मार्केट में मिल नहीं रहे, कैसे हासिल होंगे?
- अस्पताल वाले कह रहे हैं कि मरीज ठीक हो गया घर ले जाइए, जबकि हम अभी खतरा नहीं उठाना चाहते, क्या करें?
- आपने तो 15 बेड खाली बताए, अस्पताल वाले फुल कह रहे हैं, मरीज को अब कहाँ भर्ती कराने लेकर जाएँ?