महामारी में मुनाफाखोरी: इंदौर, भोपाल, उज्जैन में पीपीई किट से लेकर वेंटिलेटर तक के रेट तय, सागर में भी निजी अस्पतालों पर करें ऐसी सख्ती

महामारी में मुनाफाखोरी: इंदौर, भोपाल, उज्जैन में पीपीई किट से लेकर वेंटिलेटर तक के रेट तय, सागर में भी निजी अस्पतालों पर करें ऐसी सख्ती


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सागर2 मिनट पहलेलेखक: अतुल तिवारी

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मुकेश शुक्ला, कमिश्नर; रेट तय करने के लिए जल्द आदेश जारी करूंगा।

  • संभागायुक्त, कलेक्टर, सीएमएचओ से भास्कर अपील- मरीजों का दर्द समझिए
  • उज्जैन में सर्विस से लेकर अन्य चार्ज नहीं ले सकते, भोपाल में तो 18 लाख मरीजों को वापस कराए

कोविड महामारी में अफसरों ने शहर के निजी अस्पतालों को मरीजों से अवैध वसूली व अनाप-शनाप बिल थमाने के लिए खुला छोड़ दिया है। इन पर किसी भी तरह की लगाम लगाने या कोविड में इलाज के अधिकतम रेट तय करने की कोशिश प्रशासन की ओर से अब तक नहीं की गई। जबकि इंदौर, उज्जैन और भोपाल जैसे शहरों में पीपीई किट से लेकर वेंटिलेटर तक के रेट तय हैं।

वहां कोविड में होने वाली जांचों, बेड व डॉक्टरों की विजिट के रेट भी तय कर दिए गए हैं। सागर में सिर्फ जिम्मेदारों ने अस्पतालों से इलाज के रेट डिस्पले पर शो करने के लिए कहा है। जिम्मेदारों के ढुलमुल रवैए के चलते निजी अस्पताल मनमानी करने में लगे हैं और जिम्मेदार इन पर सख्त कार्रवाई करने से बच रहे हैं। अधिक बिल वसूली से लेकर सिलेंडर छीनने तक की शिकायतें मिलने के बाद भी जिम्मेदार इन्हें सिर्फ नोटिस ही थमा पाए हैं।

भास्कर सवाल; निजी अस्पताल पेशेंट से मनमाने रेट वसूल रहे हैं, कोविड में इलाज की अधिकतम दरें तय क्यों नहीं की जा रहीं?

मुकेश शुक्ला, कमिश्नर; रेट तय करने के लिए जल्द आदेश जारी करूंगा
मैं अभी पूरे संभाग में जिला प्रशासन को निर्देश देता हूं कि वे निजी अस्पताल में इलाज के अधिकतम रेट तय कर दें। वैसे आयुष्मान भारत के तहत कोविड इलाज का एक पैकेज तो तय कर लिया है। इसे भी लागू किया जा सकता है। संभाग के सभी जिलों में प्रशासन निजी अस्पताल संचालकों के साथ बैठक करेगा और कोविड में इलाज के लिए उनके रेट लेकर ओवर ऑल एक रेट लिस्ट तय कर देगा। जो सभी निजी अस्पतालों पर लागू होगा। निजी अस्पताल संचालक उन रेट को हॉस्पिटल के गेट पर डिस्पले करेंगे। ताकि कोरोना से पीड़ित लोगों को निजी अस्पताल के खर्च की जानकारी लग सके। इससे ज्यादा यदि बिल लिया गया तो फिर जांच के बाद कार्रवाई करेंगे।

दीपक सिंह, कलेक्टर; निजी अस्पतालों में फीस नियंत्रण का कोई कानून नहीं
निजी अस्पतालों के फीस नियंत्रण का कोई कानून नहीं है। जो अस्पताल कोविड का इलाज कर रहे हैं। उन्हें आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया है। एक दिन पहले ही जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में 9 अस्पतालों को तीन माह के लिए आयुष्मान में शामिल करने का प्रस्ताव पारित किया है। आयुष्मान कार्ड वालों को इन 9 निजी अस्पतालों में कोविड का निशुल्क इलाज मिलेगा। उनके इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इसके बाद भी यदि किसी निजी अस्पताल में ज्यादा बिल वसूले जा रहे हैं। तो वे इसकी शिकायत सीएमएचओ से कर सकते हैं। इसके लिए एक चार सदस्यीय टीम बना दी है। जिसमें एडीएम, सीएमएचओ और क्षेत्र के एसडीएम व एक अन्य डॉक्टर होंगे।

डॉ. सुरेश बौद्ध, सीएमएचओ; दरें तय करने से इलाज की गुणवत्ता में कमी आएगी

अधिकतम रेट तय करने में यह समस्या आएगी कि सभी निजी अस्पतालों में सारी सुविधाएं एक जैसी नहीं है। इलाज की दरें तय करने से जो अस्पताल अभी अच्छी सुविधाएं दे रहे हैं। उनकी गुणवत्ता में भी कमी अाएगी। वैसे जिला आपदा प्रबंधन समिति में इलाज की दरें तय करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। कमिश्नर व कलेक्टर इसे कर सकते हैं। क्योंकि कोविड में सबसे जरूरी ऑक्सीजन व रेमडेसिविर है। यह दोनों चीजें सरकार उपलब्ध करा रही है। अब सिर्फ बेड व डॉक्टर के ट्रीटमेंट का चार्ज बचा है। नर्सिंग होम चला रहे हैं तो सर्विस देना उनकी प्राथमिकता है। आयुष्मान में शामिल होने के लिए जो निजी अस्पताल सहमति नहीं देते उनके लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए थे।

इंदौर, उज्जैन और भोपाल ने अनाप-शनाप बिल पर लगाम लगाने कलेक्टर्स ने उठाए ये कदम

उज्जैन; सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकते निजी अस्पताल : उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह ने रेट तय कर निर्देश जारी किए निजी अस्पताल मरीजों से किसी भी तरह का सर्विस चार्ज, आइसोलेशन या म्युनिसिपल चार्ज नहीं वसूल सकते। अस्पताल के बाहर डिस्पले करनी है। निर्धारित की गई अधिकतम दरों से अधिक शुल्क लिया जाने पर पूरी तरह रोक लगाई है। उल्लंघन करने वालों को कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इंदौर; प्री-कोविड के बेड चार्ज में 40% जोड़ सकते हैं : इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह निजी अस्पतालों पर दो बार प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर चुके हैं। जइसके साथ ही अस्पतालों को तीन कैटेगिरी में बांटा है। 50 से कम बेड वाले, 50 से 100 बेड वाले और इससे अधिक बेड वाले। एक कमेटी गठित की है। जो रेंडम आधार पर अस्पतालों में जाती है और बिलों की जांच करती है। उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की।

भोपाल; 8 अस्पतालों ने मरीजों से लिए 18 लाख ज्यादा, सब लौटाने पड़े : भोपाल में 8 अस्पतालों में भर्ती मरीजों ने एसडीएम से अधिक बिल वसूलने की शिकायत की, तो प्रशासन की चार टीम ने बिलों की जांच कर 10 मरीजों के परिजनों को अस्पतालों से 18 लाख रुपए वापस दिलाए। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने उल्लंघन करने पर रजिस्ट्रेशन रद्द करने की चेतावनी दी है

डॉ. मिश्रा ने कहा-मैंने सीएमएचओ से नहीं की शिकायत

सागरश्री अस्पताल को लेकर प्रशासन व सीएमएचओ ने जांच के लिए झूठी शिकायत को आधार बनाया। डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा ने बताया कि उन्होंने पिता के एडमिट होने व अधिक बिल वसूले जाने की शिकायत सीएमएचओ से नहीं की है। डॉ. मिश्रा का कहना है कि मेेरे एक रिलेटिव एडमिट थे। उनकी डेथ हो गई। तो आयुष्मान योजना का लाभ उन्हें तब नहीं मिला था। इस संबंध में मैंने सीएमएचओ से बात की थी। तो वहीं प्रशासन ने जनसंपर्क के मेल में डॉ. मिश्रा के हवाले से सागरश्री द्वारा अधिक चार्ज वसूले जाने की बात कही है।

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