इंदौर के दवा बाजार से जुड़े नकली रेमडेसिविर के तार: दो दुकानदारों पर मारा छापा, देवास से तीन आरोपी धराए; आरोपी कुलदीप ने ड्रग्स इंस्पेक्टर को भी दिखाए थे इंजेक्शन

इंदौर के दवा बाजार से जुड़े नकली रेमडेसिविर के तार: दो दुकानदारों पर मारा छापा, देवास से तीन आरोपी धराए; आरोपी कुलदीप ने ड्रग्स इंस्पेक्टर को भी दिखाए थे इंजेक्शन


Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

इंदौर9 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

पुलिस ने रेमडेसिविर मामले में मंगलवार को दवा बाजार में छापा मारा।

सूरत में बने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की बड़ी खेप इंदौर में दवा बाजार के व्यापारी को बेची गई है। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मंगलवार को यहां दो दुकानों पर छापा मारा। हालांकि यहां एक दुकान से कुछ नहीं मिला। वहीं, दूसरी दुकान से एक अन्य आरोपी को हिरासत में लिया है। अब पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल खंगाल रही है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों की निशानदेही पर देवास से चीकू शर्मा, आशीष ठाकुर और सुनील लोधी को पकड़ा।

विजय नगर टीआई तहजीब काजी के मुताबिक आरोपियों ने कबूला है कि वे दवा बाजार के कुलदीप से जुड़े थे। चीकू भी दवा बाजार में काम कर चुका है। उन्होंने इंदौर और आसपास के इलाके में करीब 200 इंजेक्शन बेचना बताए हैं। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है, लेकिन अभी तक एक भी इंजेक्शन प्राप्त नहीं हुआ।

पुलिस पूछताछ में बताया गया है, इन लोगों ने दवा बाजार में दुकानों के बाहर सैनिटाइजर और अन्य उपकरण बेचने वालों को लालच दिया। इसमें 10 हजार का इंजेक्शन बताकर उसे 30 से 35 हजार रुपए में बेचा। जब ब्लैकमेलिंग की बारी आई, तो दवा बाजार में खड़ी लोगों की भीड़ में से इन्होंने शिकार ढूंढे थे। यहां इंजेक्शन सप्लाई किए।

सूत्रों के मुताबिक कुलदीप की मां भी बीमार है। उसे नहीं पता था कि उक्त इंजेक्शन नकली है। उसने कुछ दिन पहले नकली रेमडेसिविर अपनी मां को लगवाने को बात भी कबूली है। जब इंदौर पुलिस और गुजरात क्राइम ब्रांच ने कुलदीप को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के पास से पकड़ा, तो उसकी मां का इलाज चल रहा था। कुलदीप ने यह नकली इंजेक्शन किसी ड्रग इंस्पेक्टर को दिखाकर यह भी तस्दीक किया था कि यह इंजेक्शन असली है या नकली। पुलिस अभी पूछताछ में यह खुलासा नहीं कर पाई है कि ड्रग इंस्पेक्टर कौन है।

ऐसे जुड़ रहे तार

तीन दिन पहले विजयनगर थाना प्रभारी तहजीब काजी को पीड़ित महिला ने शिकायत की थी। उसने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन और दवाएं एक व्यक्ति उपलब्ध करा रहा है। वह सिर्फ महिलाओं को ही यह देने की बात कह रहा है। इसके बाद पुलिस ने SI प्रियंका को जरूरतमंद बनाकर इंजेक्शन के लिए भेजा। आरोपी सुरेश यादव निवासी बाणगंगा से मैसेंजर पर टोसिलिजुमैब इंजेक्शन को देने की बात कर रहा था। महिला पुलिस अधिकारी और एक थाने के आरक्षक ने इसे जाल बिछा कर उसे पकड़ लिया।

एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि पूछताछ के बाद धीरज और दिनेश को पकड़ा गया। इन दोनों ने बताया कि इंजेक्शन प्रवीण उर्फ सिद्धार्थ नाम युवक से लेते थे। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो असीम भाले का भी नाम सामने आया। इसके बाद सुनील मिश्रा नामक युवक का नाम सामने आया है। उसकी कॉल डिटेल निकाली तो लोकेशन गुजरात के सूरत में मिली।

विजय नगर पुलिस ने तुरंत सूरत पुलिस को सूचना दी। सूरत पुलिस तुरंत आरोपी सुनील मिश्रा को हिरासत में लेकर फैक्टरी पर छापा मारा, जहां पर नकली स्टिकर और हजारों की तादाद में नकली इंजेक्शन की शीशियां मिलीं। इसमें से कई ग्लूकोज और पानी से भरी हुई थीं। यहां से गिरोह के और सदस्यों को भी पकड़ा है। इसकी सूचना उन्होंने इंदौर पुलिस को भी दी।

खबरें और भी हैं…



Source link