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- Usha Thakur Said Put All 2 2 Sacrifices In The Yagna At 10 Am, The Third Wave Will Not Even Touch India.
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इंदौरएक मिनट पहले
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मंत्री ठाकुर ने कोविड केयर सेंटर के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही।
हम सबको मिलकर अपने अपने हिस्से का पर्यावरण शुद्ध करना होगा और यज्ञ करना कोई कर्मकांड नहीं, बल्कि यज्ञ चिकित्सा है, इसलिए सभी आगे आएं और साथ में अपने हिस्से की दो-दो आहुतियां यज्ञ में डालें। यह कहना है कैबिनेट मंत्री उषा ठाकुर का। यह बात उन्होंने कोविड सेंटर से शुभारंभ अवसर पर मीडिया से चर्चा में कही। हुए मंत्री उषा ठाकुर ने कहा तीसरी लहर के लिए हम जागृत हैं और तीसरी लहर से भी निपट लिया जाएगा। बस आप सब अपने खाते का पर्यावरण शुद्ध करें। तीसरी लहर हिंदुस्तान को छू नहीं पाएगी। उन्होंने कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए सभी को सुबह 10 बजे यज्ञ में आहुतियां डालनी है।
मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि तीसरी जो लहर है, उसके लिए भी हम जागृत हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि तीसरी लहर का ज्यादा अटैक बच्चों पर होगा। मुझे पूरी आशा है कि हम तीसरी लहर से भी निपटेंगे, क्याेंकि जब सबके संयुक्त प्रयास प्रवित्र भाव से होते हैं तो कोई मुसीबत टिक नहीं पाती है। प्रभु से यही प्रार्थना है कि तीसरी लहर यहां पर कष्ट नहीं दे।
आप सबसे प्रार्थना है कि पर्यावरण की शुद्धि के लिए 10, 11, 12 और 13 मई को सुबह 10 बजे सब लोग एक साथ यज्ञ में आहुति डालें। पर्यावरण को शुद्ध करें, क्योंकि महामारियों के नाश में अनादिकाल से इस यज्ञ की पावन परंपरा है। यज्ञ चिकित्सा है, यह धर्मांधता नहीं है, यह कर्मकांड नहीं है। बल्कि यज्ञ पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए चिकित्सा है। इसलिए हम सब दो-दो आहुति डालें, पर्यावरण को शुद्ध करें। तीसरी लहर हिंदुस्तान को छू नहीं पाएगी।
मास्क को लेकर कहा था रोज योग करती हैं
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री उषा ठाकुर मास्क् नहीं पहनने को लेकर भी अजीब तर्क दे चुकी हैं। भोपाल में विधानसभा में मास्क नहीं पहनकर आने पर कहा था कि ‘मैं तो हनुमान चालीसा का पाठ करती हूं। प्रतिदिन शंख बजाती हूं। काढ़ा पीती हूं। गोबर के कंडे पर हवन करती हूं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह मेरा कोरोना से बचाव है। गमछा गले में रखती हूं, अगर कोई पास आए तो मुंह पर रख लेती हूं।’ उन्होंने यह भी कहा- वेदों को 10 हजार साल पूरे हो रहे हैं। दुनिया में जिसे श्रेष्ठतम तरीके से जीना है, वह वैदिक जीवन पद्धति अपनाए। उसे कोई तकलीफ छू भी नहीं पाएगी। रोजाना योग और प्राणायाम करती हैं। इसके अलावा वे सप्तशती का पाठ भी करती हैं, इसलिए कोरोना उन्हें नहीं हो सकता।