संक्रमित सिस्टम के आगे दम तोड़ती मानवता: आदिवासी युवक ने इलाज के अभाव में तोड़ा दम, मौत के बाद शव वाहन भी नसीब नहीं हुआ, बाइक पर जिंदा व्यक्ति की तरह बैठा कर ले गए घर

संक्रमित सिस्टम के आगे दम तोड़ती मानवता: आदिवासी युवक ने इलाज के अभाव में तोड़ा दम, मौत के बाद शव वाहन भी नसीब नहीं हुआ, बाइक पर जिंदा व्यक्ति की तरह बैठा कर ले गए घर


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उमरिया3 घंटे पहले

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मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में संक्रमित सिस्टम और दम तोड़ती मानवता की तस्वीरें सामने आई। इलाज के दौरान अस्पताल युवक की मौत हो गई। उसे ले जाने के लिए शव वाहन तक उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बाद परिजन उसे बाइक से ले गए। 20 किलोमीटर तक परिजन बाइक पर बीच में शव रखकर गांव पहुंचे। इसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।

पतौर ग्राम निवासी 35 वर्षीय युवक सहजन कोल को पेट में दर्द के बाद मंगलवार को मानपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया। तकलीफ बढ़ता देख वहां से जिला अस्पताल उमरिया रेफर किया गया। इसी बीच सहजन की मौत हो गई। युवक की मौत के बाद परिजनों को घर तक शव ले जाने के लिए शव वाहन नहीं मिली और परेशान परिजनों को बाइक पर ही शव को जिंदा व्यक्ति की तरह बैठाकर ले जाना पड़ा।

सहजन के शव को गांव तक ले जाने के लिए शव वाहन नहीं मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ आरके मेहरा ने बताया कि मानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन नहीं है। सहजन कोल को पांच दिन से बुखार आ रहा था।

रेफर सेंटर बने अस्पताल, डॉक्टर न दवा, वैक्सीन भी नहीं उमरिया जिले में बड़ी परेशानी है। कोविड के चक्कर में सामान्य मरीजों को डॉक्टर हाथ लगाने से डरते हैं। मरीजों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर कर दिया जाता है। अस्पतालों ने न डॉक्टर हैं और न ही दवाएं।

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