STF एडीजी करेंगे रेमडेसिविर मामले की जांच: प्रदेश में अब तक 450 नकली इंजेक्शन की खेप पकड़ी,19 केस दर्ज; 45 आरोपी ज्यूडिशियल कस्टडी में

STF एडीजी करेंगे रेमडेसिविर मामले की जांच: प्रदेश में अब तक 450 नकली इंजेक्शन की खेप पकड़ी,19 केस दर्ज; 45 आरोपी ज्यूडिशियल कस्टडी में



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इंदौर9 मिनट पहले

मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य हिस्सों में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन वाले अपराधियों पर कार्रवाई भी जारी है। मप्र पुलिस ने कहा कि इंदौर में COVID-19 की दूसरी लहर के बीच नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत 25 लोगों के खिलाफ रेमेडिसिविर की कालाबाजारी करने के आरोप में 19 मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, 45 आरोपी ज्यूशियल कस्टडी में हैं।

सरकार ने मामले की जांच एसटीएफ एडीजी विपिन माहेश्वरी को सौंपी है। मंगलवार दोपहर एडीजी को सरकार ने इंदौर भेज दिया। उन्होंने अफसरों से चर्चा की। गिरफ्तार आरोपियों के बयानों की मॉनिटरिंग की। एडीजी ने केस की समीक्षा की।

एएसपी राजेश रघुवंशी ने बताया, पांचों आरोपियों से पूछताछ जारी है। इन लोगों ने ज्यादातर इंजेक्शन दो-दो कर बेचे हैं। उनमें से कई लोगों को ये लोग पहचानते नहीं हैं। जिनको पहचानते हैं, उनके पास से इंजेक्शन जब्त करने का प्रयास कर रहे हैँ। प्रमुख आरोपी पुनीत शाह, कौशल वोरा और सुनील मिश्रा से पूछताछ करने के लिए इंदौर पुलिस की टीम सूरत भेजी जा रही है।

15 अप्रैल को पकड़ा था पहला आरोपी

रेमडेसिविर की किल्लत के बीच इंजेक्शन की कालाबाजारी का बड़ा मामला सामने आया था। इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऐसे डाॅक्टर को गिरफ्तार किया था, जो हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा की कंपनी में बिना लाइसेंस के रेमडेसिविर इंजेक्शन बना रहा था। आरोपी डॉ. विनय त्रिपाठी के पास से 16 बॉक्स में 400 नकली वाॅयल भी मिले थे। जांच में पता चला है, वह बीते एक साल से कांगड़ा में सूरजपुर स्थित फॉर्मुलेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी चला रहा था। आरोपी ने नकली इंजेक्शन हिमाचल प्रदेश की किसी फैक्टरी से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से बुलवाना बताया था।

5 मई को सूरत में पकड़ाई थी फैक्टरी

गुजरात के सूरत में नकली रेमडेसिविर बनाने का बड़ा कारखाना चल रहा था। इंदौर और सूरत पुलिस की कार्रवाई में खुलासा हुआ था। सूरत पुलिस ने फार्म हाउस पर छापा मारा, जहां नकली इंजेक्शन बनाया जा रहा था। गिरोह का मुख्य सरगना कोशल वोहरा को गिरफ्तार किया है। कौशल से ही आरोपी सुनील मिश्रा इंजेक्शन लेता था। उसने 1200 इंजेक्शन की सप्लाई मध्यप्रदेश में की है। एक हजार इंजेक्शन इंदौर और 200 जबलपुर में बेचे गए हैंं, जबकि गिरोह ने देश में 5 हजार नकली रेमडेसिविर बेचे हैं।

ऐसे जुड़ रहे थे तार

तीन दिन पहले विजयनगर थाना प्रभारी तहजीब काजी को पीड़ित महिला ने शिकायत की थी। उसने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन और दवाएं एक व्यक्ति उपलब्ध करा रहा है। वह सिर्फ महिलाओं को ही यह देने की बात कह रहा है। इसके बाद पुलिस ने SI प्रियंका को जरूरतमंद बनाकर इंजेक्शन के लिए भेजा। आरोपी सुरेश यादव निवासी बाणगंगा से मैसेंजर पर टोसिलिजुमैब इंजेक्शन को देने की बात कर रहा था। महिला पुलिस अधिकारी और एक थाने के आरक्षक ने इसे जाल बिछा कर उसे पकड़ लिया।

एसपी आशुतोष बागरी ने बताया कि पूछताछ के बाद धीरज और दिनेश को पकड़ा गया। इन दोनों ने बताया कि इंजेक्शन प्रवीण उर्फ सिद्धार्थ नाम युवक से लेते थे। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो असीम भाले का भी नाम सामने आया। इसके बाद सुनील मिश्रा नामक युवक का नाम सामने आया है। उसकी कॉल डिटेल निकाली तो लोकेशन गुजरात के सूरत में मिली।

विजय नगर पुलिस ने तुरंत सूरत पुलिस को सूचना दी। सूरत पुलिस तुरंत आरोपी सुनील मिश्रा को हिरासत में लेकर फैक्टरी पर छापा मारा, जहां पर नकली स्टिकर और हजारों की तादाद में नकली इंजेक्शन की शीशियां मिलीं। इसमें से कई ग्लूकोज और पानी से भरी हुई थीं। यहां से गिरोह के और सदस्यों को भी पकड़ा है। इसकी सूचना उन्होंने इंदौर पुलिस को भी दी।

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