जवान की मौत की खबर से शोक में डूबा परिवार: छुट्टी पर आने के बाद BSF जवान ने बेटे को दिलाई थी कार, जमीन बंटवारे को लेकर रहते थे तनाव में, परिवार वाले पहुंचे गृह गांव कोषण

जवान की मौत की खबर से शोक में डूबा परिवार: छुट्टी पर आने के बाद BSF जवान ने बेटे को दिलाई थी कार, जमीन बंटवारे को लेकर रहते थे तनाव में, परिवार वाले पहुंचे गृह गांव कोषण


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भिंड38 मिनट पहले

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BSF जवान की मौत की खबर के बाद परिजन गए गांव। भिंड के आवास पर लगा ताला।

  • भिंड के अशोक कॉलोनी में रहता था जवान का परिवार

राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ जवान ने बुधवार की सुबह स्वयं की राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वे 15 दिन पहले ही छुट्टियां बिताकर ड्यूटी पर पहुंचे थे। उनके निधन की सूचना मिलने पर उनका परिवार शोक में डूब गया है। छुट्टी पर आने के बाद जवान ने अपने बेटे मनीष को कार दिलाई थी। वो जमीन बंटवारे को लेकर तनाव में रहते थे।

बीएसएफ जवान प्रेम सिंह यादव (51) पुत्र सियाराम बीएसएफ में हेड कांस्टेबल थे वे मूल रूप से अटेर के कोषण गांव के निवासी है। उनका परिवार भिंड शहर के वार्ड क्रमांक 28, अशोक नगर निवासरत है । वर्तमान में उनकी ड्यूटी राजस्थान के जैसलमेर में पाकिस्तान बॉडर्र पर चल रही थी। अपनी छुट्टी पूरी करके जवान 30 अप्रैल को ही भिंड से वापस जैसलमेर पहुंचे थे। छुट्टी पर से वापस जाने के बाद उन्हें आइसोलेशन में रखा गया था। 2 दिन पहले ही 10 मई को हेड कांस्टेबल यादव को शाहगढ़ क्षेत्र की चिंकारा सीमा चौकी पर भेजा गया था।

नाइट ड्यूटी करने के बाद 12 मई, बुधवार की सुबह चौकी पर पहुंचते ही उन्होंने अपनी एसएलआर राइफल से स्वयं के सिर में दो गोली मार ली, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।इस घटना के बाद बीएसएफ के अधिकारियों ने शाहगढ़ पुलिस को इसकी सूचना दी। जेसलमेर पुलिस के अनुसार उनका कोई जमीनी विवाद चल रहा है, जिसके चलते वे परेशान चल रहे थे। वहीं यह सूचना बुधवार की दोपहर एक बजे जैसे ही उनके परिवार वालों को लगी वे स्तब्ध रह गए।

कोषण गांव गए शोकाकुल परिजन

हेड कांस्टेबल यादव के पड़ोसियों ने बताया कि उनके एक बेटा और दो बेटियां है। दोनों बेटी रविता और कविता की शादी हो चुकी है। करीब 25 दिन पहले ही उन्होंने अपने बेटे मनीष यादव को नई कार भी दिलाई थी। वहीं इस हादसे की सूचना मिलने के बाद पूरा मौहल्ला शोकजदा है। साथही उनका पूरा परिवार गृहगांव कोषण चला गया।

सबसे विषम परिस्थिति वाले बॉर्डर पर थी ड्यूटी

बता दें कि भारत-पाकिस्तान की सीमा पर थार के रेगिस्तान में शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र सबसे अधिक विषम परिस्थितियों वाला क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में विशाल रेतीले टीले है और पेड़-पौधे कहीं नजर नहीं आते हैं। यहां चलने वाली आंधियों में रेतीले टीले रोजाना अपना स्थान बदलते रहते है। इस कारण सीमा पर की गई तारबंदी भी ठहर नहीं पाती और हवा में झूल जाती है। ऐसे में बीएसएफ को हमेशा यहां बहुत अधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है।

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