बड़ागांव में काेराेना का भयावह रूप: बुखार आने पर सांस फूलने लगी और एक-एक कर 14 लोगों ने गंवाई जान, 100 घराें में बुखार-खांसी के मरीज, 20 परिवार कर गए पलायन

बड़ागांव में काेराेना का भयावह रूप: बुखार आने पर सांस फूलने लगी और एक-एक कर 14 लोगों ने गंवाई जान, 100 घराें में बुखार-खांसी के मरीज, 20 परिवार कर गए पलायन


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मुरैना5 मिनट पहलेलेखक: रजनीश दुबे

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बड़ागांव में काेराेना से माैताें के बाद सरपंच के घर में ताले पड़े थे और खटिया रखी थी।

  • कुंभ से आए युवक की मौत, परिवार में भी दो सदस्यों की कोरोना से गई जान
  • कोरोना संक्रमण के डर से सरपंच, मृत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के परिजन भी अब गांव में नहीं रहते

जिला मुख्यालय से 15 किमी स्थित दूर 300 घरों की आबादी वाला बड़ागांव। गांव की गलियों में चारों तरफ सन्नाटा पसरा था। इक्का-दुक्का घरों के बाहर बैठे लोग और उनके चेहरे पर छाई खामोशी बता रही थी कि गांव के हालात ठीक नहीं हैं। थोड़ा और आगे चलने पर नजर आया गांव की सरपंच ऊषा पत्नी लक्ष्मण सिंह तोमर का 2 मंजला पक्का मकान। लेकिन यहां भी दरवाजे के बाहर खटिया रखी थी और सभी दरवाजे बंद थे। दरवाजा खटखटाने पर अंदर से एक व्यक्ति निकला और बताया कि जबसे गांव में कोरोना से मौतों का सिलसिला शुरू हुआ है सरपंच अपने परिवार सहित मुरैना स्थित अपने घर पर रहने चली गई हैं।

अकेले सरपंच ही नहीं बल्कि गांव में पदस्थ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नीरू (45) पत्नी दिलीप तोमर के परिजन सहित 20 से 30 परिवार कोरोना संक्रमण के डर से गांव से पलायन कर मुरैना पहुंच गए हैं। गांव में पदस्थ दूसरी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता राधा शर्मा ने बताया कि कोरोना से तीन से चार लोगों के मरने की पुष्टि हुई है। शेष 10 लोगों में से कुछ वृद्ध थे, हां इतना जरूर है कि यह लोग चेकअप कराने अस्पताल नहीं गए। इसलिए मौत कोरोना से हुई है, कह नहीं सकते लेकिन मौत तो हुई हैं।

14 अप्रैल को कुंभ से लौटे नृपाल सिंह की पहली मौत, परिवार की ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, इंजीनियर युवा ने भी दम तोड़ा
बड़ागांव में मौतों का सिलसिला 26 अप्रैल से शुरू हुआ। गांव में रहने वाले नृपाल सिंह (58) पुत्र नारायण तोमर 14 अप्रेल को कुंभ से लौटे थे। 18 अप्रैल को उनकी तबियत खराब हुई तो फौजी बेटे इलाज कराने मिलिट्री हॉस्पिटल ग्वालियर ले गए, जहां वे कोरोना संक्रमित निकले। इलाज के दौरान 26 को नृपाल सिहं की मौत हो गई। इसके बाद गांव में एक-एक कर 14 लोगों ने अपनी जान गवाई। इनमें नृपाल सिंह के परिवार की ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नीरू तोमर व इंजीनियर युवा शरद तोमर भी शामिल है।
नृपाल सिंह के संक्रमित भाई का जिला अस्पताल में चल रहा इलाज: नृपाल सिंह की 26 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से मौत हुई। इसके बाद संक्रमण ने उनके बड़े भाई रामवीर तोमर (75) को चपेट में ले लिया। नृपाल सिंह के बेटे संदीप तोमर ने बताया कि ताऊ रामवीर अभी भी जिला अस्पताल में ही भर्ती हैं। बकौल संदीप तोमर गांव में शायद ही ऐसा कोई घर हो, जहां सर्दी-बुखार से पीड़ित लोग न हों लेकिन अस्पताल में जांच कराने से लोग डर रहे हैं। कोई झोलाछाप डॉक्टर से दवा ले रहा है तो कोई नाते-रिश्तेदार से दवाई मंगा रहा है।

एक ही बाड़े में 3 महिलाओं ने दम तोड़ा, 2 बुखार से पीड़ित उन्हें अस्पताल ले गए

बड़ागांव में लोधी समाज की बस्ती में भी 3 महिलाओं की मौत हो चुकी है। बादामी (80) पत्नी रामदीन लोधी को शनिवार को बुखार आया और दो दिन बाद उनकी सांस उखड़ने लगी। मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। इससे पहले 15 अप्रैल को इस मोहल्ले में रहने वाली रामवती (70) पत्नी रामचरन लोधी की 15 अप्रैल तथा 28 मार्च को संतो (60) पत्नी रामअवतार लोधी की मौत हो चुकी है।

संतो को ब्रेस्ट कैंसर था लेकिन मौत से 2 दिन पहले उन्हें बुखार आया और सांस उखड़ने लगी। इससे पहले कि परिजन अस्पताल ले जाते, उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी मोहल्ले में रहने वालीं शीलादेवी (50) को 4 दिन से बुखार आ रहा है। वहीं उनके ही परिवार की चंदरिया देवी (70) भी सदी-जुकाम व बुखार से पीड़ित मिलीं। उन्हें परिजन बोलेरो कार से अस्पताल दिखवाने के लिए ले जा रहे थे।

बुधवार को दोपहर में पहुंची स्वास्थ्य टीम, आंगनबाड़ी पर 30 ग्रामीणों के सैंपल लिए
बड़ागांव में 14 लोगों की मौत की खबर दैनिक भास्कर ने बुधवार को प्रकाशित की। इसके बाद गांव में दोपहर बाद नूराबाद स्वास्थ्य केंद्र से 2 टीम गांव में पहुंची। गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर टीम ने 30 से अधिक ग्रामीणों के सैंपल जांच किए। वहीं कुछ ग्रामीणों को सर्दी-जुकाम व बुखार की दवाइयां भी बांटीं।

सर्वे के दौरान ग्रामीण सही सूचना नहीं देते हैं
बड़ागांव में पदस्थ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नीरू तोमर की मौत 22 अप्रैल को हुई थी। इसकी सूचना दूसरी कार्यकर्ता राधा शर्मा ने हमें दी थी। हमारा अमला गांव में सर्वे के लिए भी पहुंचा, लेकिन हर घर के बाहर वृद्ध बैठे मिलते हैं, वे सही जानकारी नहीं देते। उनका कहना होता है कि हमारे यहां कोई बीमार नहीं है। -ऋतु शर्मा, सुपरवाइजर
हमने हेल्थ चेकअप के लिए नूराबाद से भेजी हैं 2 टीमें

बड़ागांव में लोगों के बीमार होने की सूचना मंगलवार की शाम मिली थी। हमने बुधवार को नूराबाद से 2 टीमें गांव में हेल्थ चेकअप के लिए भेजी हैं। अगर गांव में टीम नहीं पहुंची तो मैं बीएमओ से दोबारा अपडेट लेता हूं।
डॉ. एडी शर्मा, प्रभारी सीएमएचओ मुरैना

बाबूजी! हकीकत तो यह है कि गांव में 100 से अधिक लोग बीमार हैं, लेकिन डर की वजह से अस्पताल कोई नहीं जा रहा

नीतेश शर्मा।

नीतेश शर्मा।

बड़ागांव में सन्नाटे को चीरते हुए एक युवक नीतेश शर्मा जब दैनिक भास्कर टीम के पास आया तो पहले तो थोड़ा संकोच में दिखा। लेकिन पूछने पर उसने कहा कि बाबूजी हकीकत तो यह है कि गांव में 100 से अधिक लोग बीमार हैं। किसी को सर्दी-जुकाम है तो किसी को बुखार, लेकिन डर के मारे कोई भी कोरोना की जांच कराने के लिए अस्पताल नहीं जा रहा। लोग घरों के अंदर ही खटिया पर पड़े हैं। अब यह हैजा जैसी बीमारी तो है नहीं, कि हम लोग जाकर उन्हें समझाएं। जो लोग मरे हैं, उन्हें भी दो से तीन दिन बुखार आया, कुछ लोगों को सांस फूलने की दिक्कत थी। एक-एक कर 14 लोग मर चुके हैं, उनमें से चार से पांच लोगों की कोरोना से मरने की पुष्टि हुई है क्योंकि वे इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंच गए।

कोरोना संक्रमण से 5 मौतों की पुष्टि, 4 से 5 लोग संक्रमित, चेकअप तो छोड़िए, गांव को सेनिटाइज करने के लिए भी कोई नहीं आया

रामलखन तोमर।

रामलखन तोमर।

गांव में अभी तक 14 लोग मर चुके हैं, उनमें से 4 से 5 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है। यह लोग अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे थे। अभी भी 3 से 4 लोग संक्रमित हैं और बुखार के मरीज तो हर घर में हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम हेल्थ चेकअप के लिए छोड़िए गांव को सेनिटाइज करने के लिए भी नहीं आई। मेरे परिवार में ही विमला (58) पत्नी नारायण तोमर की 13 दिन पहले मौत हुई थी। भले ही वह बीमार थीं लेकिन उन्हें भी दो से तीन तक बुखार आया और हम समझ पाते, इससे पहले उन्होंने दम तोड़ दिया।
-जैसा कि रामलखन सिंह तोमर ने दैनिक भास्कर को बताया।

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