कटनी में कोरोना समिति सदस्य का छलका दर्द: पॉजिटिव होने पर कहा अपनी रिस्क पर काम करें, बीमार होने पर इलाज तो दूर, अफसर हालचाल तक नहीं पूछते

कटनी में कोरोना समिति सदस्य का छलका दर्द: पॉजिटिव होने पर कहा अपनी रिस्क पर काम करें, बीमार होने पर इलाज तो दूर, अफसर हालचाल तक नहीं पूछते


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  • When You Are Positive, You Should Work On Your Risk, If You Are Sick, Then The Treatment Is Far Away, The Officers Do Not Even Ask About The Situation.

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कटनी8 मिनट पहले

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मनोज गुप्ता, सदस्य कोरोना वार्ड समिति

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने और संक्रमित मरीजों का सहयोग करने के लिए बनाई गई कोरोना वार्ड समिति के एक सदस्य का कोरोना पॉजिटिव होने के बाद अफसरों के रवैए के कारण दर्द छलक गया है। कोरोना वार्ड समिति के सदस्य और पूर्व पार्षद मनोज गुप्ता कोरोना पॉजिटिव होने के बाद से ही अपना इलाज करा रहे हैं।

पॉजिटिव होने पर उन्होंने कहा कि कोरोना समिति के सभी प्रभारी सदस्यों से निवेदन है कि हम जो भी काम कर रहे हैं वह सब कुछ अपने रिस्क पर करें। बीमार हो जाने पर कोई भी अफसर किसी भी प्रकार की मदद करना तो दूर हालचाल तक नहीं पूछेगा। कलेक्टर की पिछली वर्चुअल मीटिंग में हमारे कुछ सदस्य भी शामिल थे। कलेक्टर ने कहा था कि जो भी सदस्य इस काम को करते हुए बीमार होंगे उन्हें प्राथमिकता से इलाज कराया जाएगा। मैं पिछले कई दिनों से बीमार हूं, आज तक किसी भी अफसर ने सहयोग तो दूर पूछने तक की जहमत उठाई नहीं। इसलिए जो भी करना है हमको अपने रिस्क पर ही करना है।

खानापूर्ति के लिए समिति बनाने का आरोप

इससे पहले भी निर्वतमान पार्षद और कोरोना वार्ड समिति सदस्य मनोज गुप्ता ने समिति के सदस्यों द्वारा दी जाने वाली सलाह को लेकर जिला प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उच्च अधिकारियों को दिखाने सिर्फ खानापूर्ति के लिए कोरोना वार्ड समिति का गठन किया गया है, जबकि समिति के प्रभारियों के सुझाव पर अमल ही नहीं किया जा रहा है। कुछ दिनों पहले वर्चुअल मीटिंग में सभी पार्षदों ने वार्डों में सघन सैनेटाइजर करवाने की बात कही थी, विधिवत कार्यक्रम बनाकर प्रत्येक वार्ड में सैनेटाइजर कराने का सुझाव दिया गया था और इनके लिए वाहन भी बढ़ाए जाने की मांग की गई थी लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

बाजार में भी लोगों को दैनिक उपयोग उपभोग की वस्तुओं की खरीदी के लिए कोई सिस्टम नहीं बनाया गया है जिससे सुबह-सुबह बाजार में भीड़ लग रही है। ऐसी महामारी में नालियों की साफ सफाई, छिड़काव व फॉगिंग मशीन नहीं चलाए जाने से मलेरिया और टायफाइड का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है जिससे जनता में आक्रोश है। जबकि इन सब कामों में ज्यादा राशि भी खर्च नहीं होनी है और ये काम जनता की नजरों में दिखने वाले है और इससे जनता में आत्मविश्वास भी पैदा होता है।

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