दूसरी लहर ने तोड़ी केश शिल्पियों की कमर: कोई नहीं दे पा रहा दुकान और मकान का किराया , किसी के बच्चों को फीस न भरने पर स्कूल ने निकाला, संकट में 2200 परिवार

दूसरी लहर ने तोड़ी केश शिल्पियों की कमर: कोई नहीं दे पा रहा दुकान और मकान का किराया , किसी के बच्चों को फीस न भरने पर स्कूल ने निकाला, संकट में 2200 परिवार


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गुना9 मिनट पहले

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गुना स्थित एक सलून की बंद पड़ी द�

गुना। डेढ़ महीने से जारी कोरोना कर्फ्यू ने केश शिल्पियों की कमर तोड़ दी है। कोई अपनी दुकान का किराया नहीं दे पा रहा है तो किसी को मकान के किराए का संकट है। स्कूल की फीस न भरने के चक्कर में अपने बच्चों को स्कूल से निकालना पड़ा है।

शहर में सलून की 410 से अधिक छोटी -बड़ी दुकानें हैं। इनमे 2200 से अधिक सेन समाज के लोग कार्य करते हैं। 90 प्रतिशत से अधिक सलून किराये की दुकानों में ही संचालित होती हैं। सेन समाजके लोग बताते हैं की पिछले कोरोना लॉक डाउन से बड़ी मुश्किल से उबर पाए थे। अब इस दूसरी कोरोना की लहर ने हमारे व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। सलून का काम वैसे ही ऐसा है की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव नहीं हो सकता। ग्राहक को छूना ही पड़ता है। वहीँ शासन -प्रशासन से भी किसी प्रकार की कोई मदद नहीं मिली है।

कुशमौदा निवासी मोनू सेन बताते हैं की वे अपने पिता और तीन भाइयों के साथ सलून की दुकान चलाते हैं। दुकान के लिए लोन भी ले रखा है। उसकी 2500 रूपये की किश्त भरनी पड़ रही है। डेढ़ महीने से काम बंद है। लेकिन सभी खर्चे चालू हैं। अब तो घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। घर में कमाने वाले सभी सदस्य एक महीने से बेरोजगार बैठे हैं।

तलैया मोहल्ला में दुकान चलाने वाले रमेश ने बताया की वे भी अपने चारों भाइयों के साथ एक ही दुकान पर काम करते हैं। कर्फ्यू में दुकान बंद होने से अब खाने तक के लाले पड़ने लगे हैं। इतना बड़ा परिवार है। बिना आय के कैसे बच्चों को पालें और उन्हें क्या खिलाएं। यहाँ -वहां से उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है।

रमेश सेन की नई सड़क पर किराने की दुकान है। उन्होंने बताया की दुकान और मकान दोनों किराये का है। दोनों का किराया हर महीने 7 हजार रुपया बैठता है। इसके अलावा बिजली बिल अलग से। तीन भाई मिलकर 20 लोगों का परिवार है। इस दौर में बहुत संकट से गुजरना पड़ रहा है। कर्फ्यू हट भी जायेगा तो अभी हमारा काम शुरू होने की उम्मीद कम ही दिखाई पड़ रही है।

बजरंगढ़ रोड पर सलून चलाने वाले सोनू सेन बताते हैं की एक ही मकान में तीनो भाई रहते हैं। सरकार से केवल राशन मिलता है। तीनो भाइयों के मिलकर 5 बच्चे हैं। बच्चों की स्कूल की फीस नहीं भर पाए तो उन्हें स्कूल से निकालना पड़ा। बड़ी मुश्किल और मिन्नतों के बाद भी पेपर नहीं होने दिए । स्कूल वालों ने काफी दवाब बनाया।

सेन समाज के जिलाध्यक्ष बाबूलाल सेन का कहना है की प्रशासन को कई बार ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। इसके बाद भी किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिली है। नगरपालिका ने पहले केश शिल्पियों के फार्म भरवाए। 10 हजार रूपये देने की बात हुई थी। लेकिन फिर उसे भी लोन बता दिया। 15 दिन मेहनत कर के सभी सलून वालों के फार्म भरे। उनपर भी आगे कोई कार्यवाही नहीं हुई। फार्म कचरे के डब्बे में दाल दिए गए।

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