नई दिल्ली. भारतीय ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए एक बुरी खबर आई है. अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ से भारतीय निर्यातकों के मुनाफे पर 4,500 करोड़ रुपये तक की मार पड़ सकती है. यह चिंता सिर्फ कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर रोजगार, निवेश और भारत के ‘मेक इन इंडिया’ के सपने पर भी पड़ सकता है.
हालांकि मनीकंट्रोल ने एक रिपोर्ट में लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑटो टैरिफ के असर को कम करने के लिए कुछ राहत संबंधी आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं. ऐसा करने से अमेरिकी कार निर्माताओं को अस्थायी छूट मिलेगी. ट्रंप ने अपने मिशिगन दौरे के दौरान यह कदम उठाया गया, जहां 25% नए टैरिफ लागू होने वाले हैं. हालांकि इससे कुछ राहत मिली, लेकिन इंडस्ट्री और विदेशी साझेदारों ने ट्रेड पॉलिसी को लेकर जारी अनिश्चितता पर चिंता जताई है. एक संभावित फॉरेन ट्रेड एग्रीमेंट और 90 दिनों की टैरिफ रोक ने शेयर बाजार में कुछ सुधार किया, लेकिन कंपनियां अब भी चिंतित हैं.
कौन उठाएगा अतिरिक्त खर्च?
नए शुल्क से पूरी सप्लाई चेन पर 9,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. ICRA के अनुसार, निर्यातक यह लगात ग्राहकों पर डालने की कोशिश करेंगे, लेकिन उनकी सौदेबाजी की ताकत, प्रोडक्ट की जरूरत और बाजार प्रतिस्पर्धा इसका फैसला करेगी. अगर भारतीय कंपनियों को 30-50 फीसदी खर्च स्वयं वहन करना पड़ा, तो उनका मुनाफा 1.5-2.5 फीसदी तक सिकुड़ सकता है.
अब आगे क्या?
3 मई 2025 से लागू हो रहे इन शुल्कों का असर भारत के 65 फीसदी ऑटो कंपोनेंट निर्यात पर पड़ेगा. इससे पहले मार्च 2025 में अमेरिका ने स्टील और एल्युमिनियम पार्ट्स पर भी 25 फीसदी शुल्क लगाया था. भारत ने जवाब में अमेरिकी कारों पर 26 फीसदी शुल्क की घोषणा की है, हालांकि इसे 90 दिन के लिए रोक दिया गया है.