पापा ने दी ट्रेनिंग, बेटी जा रही बहरीन, देश का प्रतिनिधित्व करेगी विंध्य की ये खिलाड़ी, रचा इतिहास

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Asian Youth Games-2025: गोल्डन गर्ल अस्मि भारती ने बहरीन में होने वाले तीसरे एशियन यूथ गेम्स-2025 के लिए नेशनल ट्रायल में चयन पाकर सतना और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया.

हाइलाइट्स

  • अस्मि भारती का एशियन यूथ गेम्स-2025 के लिए चयन
  • अस्मि ने नासिक में राष्ट्रीय ट्रायल में बेहतरीन प्रदर्शन किया
  • अस्मि के पिता ने उन्हें ताइक्वांडो की ट्रेनिंग दी

Satna News: सतना की होनहार खिलाड़ी अस्मि भारती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विंध्य और मध्य प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है. महज चार साल की कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर अस्मि ने तीसरे एशियन यूथ गेम्स-2025 के लिए अपना स्थान पक्का कर लिया है. खेल इस वर्ष अक्टूबर में बहरीन में आयोजित होने जा रहा है.

9 से 11 जून के बीच महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित राष्ट्रीय ट्रायल में अस्मि ने मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया. इसी के साथ वह राज्य की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं, जिनका चयन इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है. फिलहाल, अस्मि का चयन नेशनल कैंप के लिए हुआ है, जहां अक्टूबर तक उन्हें अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बनाए रखना होगा.

पिता ही कोच, समर्पण ने दिलाया मुकाम
अस्मि को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग उनके पिता डॉ. संदीप भारती से मिली है, जो सतना ताइक्वांडो संघ के सचिव और नेशनल रेफरी भी हैं. लोकल 18 से खास बातचीत में उन्होंने बताया, मैं उसे ट्रेनिंग जरूर देता हूं, लेकिन उसका आत्म-अनुशासन और ताइक्वांडो के प्रति समर्पण ही उसे इस मुकाम तक ले आया. उन्होंने कहा, विंध्य क्षेत्र में यह अब तक का सबसे बड़ा अचीवमेंट है, क्योंकि अब तक कोई भी खिलाड़ी यहां तक नहीं पहुंच पाया था.

अस्मि अन्य खेलों में भी दिखा चुकीं दमखम
ताइक्वांडो के अलावा अस्मि को खेलों से गहरा लगाव है. वह दो बार लॉन्ग जंप में स्टेट गोल्ड जीत चुकी हैं. एसजीएफआई ताइक्वांडो में नेशनल लेवल तक पहुंच चुकी हैं. वुशू में भी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं. उन्होंने अपनी स्पोर्ट्स जर्नी कक्षा 5 से कराटे की प्रैक्टिस से शुरू की थी.

एशियन यूथ गेम्स में भाग लेना सपना
लोकल 18 से बात करते हुए अस्मि ने कहा की एशियन यूथ गेम्स चार साल में एक बार होते हैं, यह मेरा सपना था. ट्रायल में सिलेक्शन के बाद अब मैं नेशनल कैंप में तैयारी कर रही हूं. उन्होंने बताया कि अपने पिता के मार्गदर्शन में वह रोज़ सुबह 2 घंटे और शाम को 3-4 घंटे कड़ी मेहनत करती हैं.

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