राजा रघुवंशी मर्डर केस का आखिरी वीडियो, सोनम भी दिखी और 3 बेखौफ हत्‍यारे भी

राजा रघुवंशी मर्डर केस का आखिरी वीडियो, सोनम भी दिखी और 3 बेखौफ हत्‍यारे भी


मिथिलेश गुप्‍ता
इंदौर.
राजा रघुवंशी की हत्या की खौफनाक साजिश सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी. 23 मई को रिकॉर्ड हुए वीडियो में आरोपी विशाल, आनंद और आकाश की हर हरकत, रेकी, पीछा और हमला साफ दिखती है. आरोपी दिनभर राजा और उसकी दोस्त सोनम का पीछा करते रहे और फिर सुनसान जगह पर हमला कर हत्या कर दी. युवाओं के बीच यह वारदात दहशत का कारण बनी है. पुलिस के पास पुख़्ता सबूत हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये वीडियो सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित रहेंगे या समाज में बदलाव भी लाएंगे?

23 मई की वो दोपहर के लिए आम नहीं थी. शहर की सड़कों पर तीन युवक बेपरवाही से घूम रहे थे, चेहरे शांत थे लेकिन इरादे तूफानी. कुछ ही घंटों बाद, राजा रघुवंशी की नृशंस हत्या हो चुकी थी. इसके बाद ये हत्‍यारे अलग-अलग होकर अपने अपने ठिकानों पर ऐसे पहुंच गए; मानो कुछ हुआ ही ना हो. इस मर्डर का मास्‍टरमाइंड राज कुशवाह भी शांत था, लेकिन जैसे ही यह मामला मीडिया में आया. इसकी परत दर परत खुलासा होना शुरू हो गया. मेघालय पुलिस ने पहले राजा का शव बरामद किया और फिर पूरे मामले का खुलासा करते हुए सभी आरोपियों को अरेस्‍ट कर लिया है.

न कोई डर, न कोई हिचक- सिर्फ़ एक तयशुदा हत्या
एक फुटेज में साफ दिखता है कि विशाल, आनंद और आकाश नाम के ये तीनों युवक कैसे हर मूवमेंट को बेहद सधे हुए अंदाज़ में अंजाम दे रहे हैं. विशाल की आंखों की हरकतें, उसका बार-बार पीछे देखना और हमले से पहले की तैयारियां बताती हैं कि यह कोई झगड़े के बाद उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि ठंडी प्लानिंग का नतीजा था.

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बाइक पर पीछा, हर मोड़ पर ट्रैकिंग
राजा अपनी दोस्त सोनम के साथ बाइक पर हैं. वो बेखबर हैं, लेकिन कुछ ही दूरी पर दूसरी बाइक पर उनके पीछे चल रहे हैं वो लोग जिनके मन में पहले से खून का इरादा था. एक कैमरा दिखाता है कि कैसे इन लोगों ने सुबह से लेकर दोपहर तक हर पल की रेकी की-कौन कब कहां गया, कौन साथ था, और कब रास्ता सुना मिलेगा. हत्या के ठीक पहले की फुटेज में हमले की तैयारी साफ दिखती है.

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इंदौर की युवा पीढ़ी के लिए एक खतरे की घंटी
इस केस ने सिर्फ राजा की जान नहीं ली, बल्कि पूरे शहर की जवानी को हिला दिया है. हर दूसरा युवा इस सवाल से घिरा है: “क्या मेरे साथ भी कभी ऐसा हो सकता है?” अब अपराधी कैमरों से नहीं डरते, सोशल मीडिया पर खुलेआम घूमेंगे, और हत्या के बाद वीडियो वायरल होंगे. इंसाफ मिल भी जाए, तब भी वो डर नहीं मिटता जो समाज के भीतर उतर चुका है.

पुलिस के पास वीडियो हैं, लेकिन बदलाव की ज़िम्मेदारी किसकी है?
पुलिस अब तक कई सीसीटीवी फुटेज जुटा चुकी है. गिरफ्तारी की प्रक्रिया तेज़ है, सबूत पुख़्ता हैं. लेकिन सवाल है- क्या ये वीडियो सिर्फ अदालत में पेश करने के लिए रह जाएंगे? या फिर इंदौर की सड़कों, कॉलेजों और कॉफी हाउस में बैठे युवाओं की सोच को भी बदल पाएंगे?



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