टीम के ‘कर्नल’ ने गाड़ दिया था झंडा, ‘छावा’ बनकर 1986 में लड़े अकेले लड़ाई

टीम के ‘कर्नल’ ने गाड़ दिया था झंडा, ‘छावा’ बनकर 1986 में लड़े अकेले लड़ाई


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इंग्लैंड की सरजमीं पर भारतीय टीम को दूसरी जीत 1986 में मिली ये ऐतिहासिक जीत टीम को इसलिए मिल पाई क्योंकि उस सीरीज में दिलीप वेंगसरकर ने चैंपियन की तरह की बल्लेबाजी की. 3 मैचों की टेस्ट सीरीज में वेंगसरकर ने 2 …और पढ़ें

1986 के इंग्लैंड दौरे पर दिलीप वेंगसरकर ने लगाया था दो शतक

हाइलाइट्स

  • 1986 में दिलीप वेंगसरकर ने इंग्लैंड में शानदार प्रदर्शन किया.
  • वेंगसरकर ने लॉर्ड्स और लीड्स में शतक लगाए.
  • भारत ने 1986 में इंग्लैंड में पहली बार टेस्ट सीरीज जीती.

नई दिल्ली. 2025 के दौरे का आगाज लीड्स के मैदान से होगा जहां पर 1986 में भारत ने आखिरी बार इंग्लैंड को हराकर सीरीज अपने नाम की थी. इस मैच में टीम इंडिया में ‘कर्नल’ के नाम से मशहूर एक बल्लेबाज ने ऐसा पारी खेली जो इस मैदान पर खेली गई सबसे बेहतरीन पारियों में एक शुमार की जाती है. ये पारी इस लिए भी खास थी क्योंकि ये शतक मैच की तीसरी पारी में बना. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या कोई ऐसा ‘कर्नल’ शुभमन गिल के पास है जो टीम को अकेले मैच जिता सके.

हेडिंग्ले के मैदान पर भारतीय टीम ने 1986 में ना सिर्फ मैच जीता साथ ही एक बल्लेबाज ने उस मिथक को तोड़ने का काम किया कि तेज गेंदबाजों के अनुकूल पिच पर भारतीय बल्लेबाज बल्लेबाजी नहीं कर सकते. इस बल्लेबाज का नाम था दिलीप वेंगसरकर जिन्होंने इंग्लैंड की सरजमीं पर वो किया जो आज तक कोई भी बल्लेबाज नहीं कर पाया.

दिलीप वेंगसरकर की दादागिरी 

1986 की सीरीज में मुंबई के स्टाइलिश बल्लेबाज दिलीप वेंगसरकर सीरीज के पहले दोनों टेस्ट लॉर्ड्स और लीड्स में लॉर्ड की तरह बल्लेबाजी करते नजर आए. इस दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड में ऐतिहासिक सफलता प्राप्त की, और इस सफलता के नायक रहे दिलीप वेंगसरकर.  कप्तान कपिल देव की अगुवाई में भारत ने इंग्लैंड में पहली बार टेस्ट सीरीज 2-0 से जीती.  इस सीरीज में वेंगसरकर की बल्लेबाजी ने उन्हें ‘सीरीज के हीरो’ का दर्जा दिलाया वह सीरीज में भारत के लिए सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे, कुल 360 रन बनाए और औसत 90.00 रहा. लीड्स में खेल गए दूसरे टेस्ट में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 272 रन बनाए जिसमें सबसे ज्यादा 61 रन बनाए . इंग्लैंड की टीम 102 रन पर सिमट गई. भारत ने दूसरी पारी में 237 रन बनाए, जिसमें वेंगसरकर ने 102* रन की नाबाद पारी खेली. यह पारी एक कठिन पिच पर खेली गई, और वेंगसरकर की तकनीकी महारत को दर्शाती है. इस पारी की वजह से वेंगसरकर को मैन आफ दि मैच चुना गया.

लॉर्ड्स में भी चमके थे वेंगसरकर 

क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर  इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 294 रन बनाए. भारत ने जवाब में 341 रन बनाकर 47 रन की बढ़त हासिल की. दिलीप वेंगसरकर ने 126* रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 16 चौके शामिल थे. यह लॉर्ड्स में उनका तीसरा टेस्ट शतक था, और वह लगातार तीन टेस्ट मैचों में शतक बनाने वाले पहले विदेशी बल्लेबाज बने. 1986 का इंग्लैंड दौरा भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक मील का पत्थर है. दिलीप वेंगसरकर की शानदार बल्लेबाजी ने उन्हें ‘सीरीज के हीरो’ का दर्जा दिलाया.  उनकी तकनीकी महारत और संयमित खेल ने भारत को इंग्लैंड में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने में मदद की.  यह सीरीज भारतीय क्रिकेट के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनी और आज जब 19 साल बाद हम फिर सीरीज जीतने का सपना देख रहे है तो इसको पूरा करने के लिए हमें एक ‘कर्नल’ जैसा बल्लेबाज टीम में चाहिए.

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टीम के ‘कर्नल’ ने गाड़ दिया था झंडा, ‘छावा’ बनकर 1986 में लड़े अकेले लड़ाई



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