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किसानों के द्वारा अदरक की खेती भी की जाती है, और किसान भाई सही तकनीक से इसकी बंपर पैदावार लेते हैं प्रति हेक्टेयर ढाई सौ क्विंटल तक की उपज निकाल लेते हैं, और इसे 10 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कभी-कभी काम लेते हैं,
हाइलाइट्स
- अदरक की खेती से प्रति हेक्टेयर 10 लाख का मुनाफा
- सही तकनीक से प्रति हेक्टेयर 250 क्विंटल उपज
- दोमट मिट्टी में अदरक की खेती सबसे उपयुक्त
Ginger Cultivation: बुंदेलखंड खरीफ सीजन में केवल सोयाबीन, मक्का और दाल की खेती के लिए ही नहीं जाना जाता, यहां पर बड़े पैमाने पर अदरक की खेती भी की जाती है. किसान भाई सही तकनीक से इसकी बंपर पैदावार लेते हैं. प्रति हेक्टेयर 250 क्विंटल तक की उपज होती है. इसे 10 लाख तक का शुद्ध मुनाफा कभी-कभी काम लेते हैं. यदि कोई किसान अदरक की खेती करता है या पहली बार अदरक की खेती करने जा रहा है तो उनके लिए एक्सपर्ट की ये सलाह बेहद काम की है.
एक्सपर्ट ने बताया कि आप कैसे अदरक की खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकेंगे. सागर में मल्टी लेयर फार्मिंग में अदरक की खेती करने वाले युवा किसान आकाश चौरसिया बताते हैं कि अदरक की खेती मुनाफा देने वाली है. अगर इसमें पारिस्थितिक तंत्र और सब कुछ अच्छा मिल जाए तो प्रति हेक्टेयर 250 क्विंटल तक का उत्पादन बड़े आराम से लिया जा सकता है. अदरक के भाव अच्छे मिल गए तो 10 लाख का मुनाफा हो सकता है.
सबसे पहले करें ये काम
अदरक की खेती करने के लिए सबसे पहले मिट्टी का चयन करना जरूरी है. यह दोमट मिट्टी में होती है. रेतेली और कई चिकनी मिट्टी वाले किसान इसे ना लगाएं. किसान दोमट मिट्टी का सबसे पहले अच्छे से उपचार करें. इसमें नेम और चूना पाउडर का अच्छा काम करें. फिर 15 दिन के लिए खेत को छोड़ दें. जुताई करने के बाद 10 ट्राली गोबर का कंपोस्ट डालें और अच्छे से राउटर बेटर करवाएं.
अदरक की बिजाई करने से पहले खेत में बेड बनवाएं, जिनकी चौड़ाई कम से कम 2 फीट हो. इन पर 2 इंच की गहराई और 6 इंच की दूरी पर बिजाई करें. 1 एकड़ में 700 से 800 किलोग्राम तक बीज लग जाता है. इससे नॉर्मल उत्पादन 70- 80 क्विंटल तक अच्छा उत्पादन 100 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो जाता है,
ऐसे करें बीज उपचार
बिजाई से पहले अदरक के बीज को किसी पेड़ की छांव में एक गड्ढा खोद कर उसमें रखकर आधा फीट की गोबर की परत चढ़ा दें. 2 महीने तक कैसा रखा रहने दें. फिर उसे निकालकर 15 लीटर पानी में 1 किलो चूना पत्थर का घोल बनाएं और इसे बीज का उपचार करें. फिर खेत में लगाएं.