बिना केमिकल छतरपुर के इस बगीचे में खिलते हैं शुद्ध खास आम, वैरायटी की भरमार

बिना केमिकल छतरपुर के इस बगीचे में खिलते हैं शुद्ध खास आम, वैरायटी की भरमार


छतरपुर: जिले में आम का एक ऐसा बगीचा भी है जहां आम की फेमस वैरायटी के वृक्ष देखने को मिल जाते हैं. विक्रेता राजेश बताते हैं कि सालों से हमनें आम की बगिया लगा रखी है. यहां हमनें आम की 15 से ज्यादा वैरायटी के पेड़ लगा रखे हैं. जिसमें चौंसा, बादाम, हापुस, मालदा, सफेदा, दशहरी, लंगडा, नीलम और तोतापरि जैसे आम के पेड़ लगा रखे हैं.  छतरपुर जिले की मंडी में भी हमारे ये सभी आम बिकने के लिए जाते हैं. हमारे यहां बिना कार्बाइड का पका हुआ आम बिकता है. व्यापारी के अलावा लोग भी यहां से थोक में ले जाते हैं. इस बगीचे से आम फल आप सीधे भी खरीद सकते हैं, साथ ही छतरपुर के बाजारों में भी ये बिकने जाता है.

चौंसा की ये है पहचान 
राजेश बताते हैं कि चौंसा आम में भी छोटा चौंसा और बड़ा चौंसा की 2 वैरायटी आती हैं. इसका वजन आधा किलो तक जाता है. इस वैरायटी के फल और पत्तियों में खुशबू ज्यादा होती है.

बादाम: बादाम आम की पहचान उसकी बनावट है.इसकी बनावट बादाम की तरह होती है. यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है. ये आम भी साइज में बड़ा होता है.

हापुस: हापुस आम की डिजाइन पीछे से गोल पत्थर की तरह होती है. साथ ही गोल पत्थर की तरह कड़ा भी होता है.

मालदा: मालदा आम की पहचान उसके वज़न से करते हैं. इस आम का वजन आधा किलो से भी ज्यादा का होता है. फल के कोने से इसको पहचान सकते हैं.

सफेदा: सफेदा आम आंध्रप्रदेश की किस्म है. ये फल जब बढ़ता है तो शुरुआत में फल के कोने से सफेद रंग छोड़ता है.

दशहरी: दशहरी आम छोटे आकार से लेकर मध्यम आकार के होते हैं. इनकी गुठली पतली होती है. यही इस आम की पहचान है. ज्यादातर लोगों क दशहरी की वैरायटी के बारे में नहीं जानते हैं. दशहरी आम की भी 3 वैरायटी होती हैं.

राजेश बताते हैं कि अभी आंधी-तूफान की वज़ह से आम फल झड़ गए हैं नहीं तो आम पेड़ फलों के गुच्छों से भर जाते हैं. अभी इनको पकने में 10 दिन और बाकी हैं. हमारे बगीचे के आम वृक्षों में फल देर से आते हैं. जैसे ही पकते हैं तोड़ना शुरू कर देंगे. छतरपुर जिले में ही आम की सप्लाई करते हैं.
राजेश आगे बताते हैं कि दक्षिण भारत में हर साल जून से अगस्त के बीच इन किस्म के आमों की कटाई की जाती है.



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