65 साल के बुजुर्ग का कमाल, कैसे भी फेंक देते रंग तो बन जाती रंगोली, एक महीने पहले करनी पड़ती बुकिंग

65 साल के बुजुर्ग का कमाल, कैसे भी फेंक देते रंग तो बन जाती रंगोली, एक महीने पहले करनी पड़ती बुकिंग


मोहन ढाकले/बुरहानपुर: मध्यप्रदेश का बुरहानपुर जिला कला, संस्कृति और रचनात्मकता का अद्भुत केंद्र बन चुका है. लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र हैं 65 वर्षीय रूप सिंह चोपड़ा, जिनकी उंगलियों से रंगोली नहीं, बल्कि जादू झरता है.

शनि मंदिर क्षेत्र में रहने वाले रूप सिंह कोई आम कलाकार नहीं हैं. वे हाथों से रंग फेंकते हैं और पलक झपकते ही रंगोली की जटिल डिजाइनें बन जाती हैं. न उन्हें स्केच चाहिए, न कोई खास टूल बस रंग और उनके अनुभवी हाथ.

50 वर्षों का रंगीन सफर
रूप सिंह बताते हैं कि मैंने रंगोली बनाना कॉपी-किताब से शुरू किया था. जब त्योहार आते थे, मैं आंगन में रंगोली सजाता था. धीरे-धीरे लोग मेरी कला को पहचानने लगे और आज देश के 5 राज्यों में मुझे बुलाया जाता है.”

उनका यह सफर सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रहा समाज, आयोजन और उत्सवों का हिस्सा बन चुका है. वे कलश यात्रा, शोभायात्रा, धार्मिक जुलूसों में ट्रैक्टर-ट्रॉली के आगे चलते हैं और रंग बिखेरते जाते हैं. पीछे रंगोलियों की खूबसूरत पंक्तियाँ उभरती जाती हैं.

पांच राज्यों के लोग हैं फैन
रूप सिंह की कलाकारी की ख्याति सिर्फ बुरहानपुर तक सीमित नहीं है.

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और जम्मू-कश्मीर तक उनके चाहने वाले हैं.

वे धार्मिक आयोजनों से लेकर शादियों तक, जहां भी कला की जरूरत होती है, वहां इनका निमंत्रण रहता है.

एक महीने पहले से ही लोग इन्हें बुक कर लेते हैं.

सोशल मीडिया से मिली नई उड़ान
सोशल मीडिया पर अपने वीडियो शेयर कर रूप सिंह ने और लोगों तक अपनी कला पहुँचाई है. आज उनकी “हाथ से उड़ती रंगोली” हर आयु वर्ग को हैरान कर देती है.

कला, आस्था और अपनापन
उनकी कला सिर्फ देखने लायक नहीं, बल्कि महसूस करने वाली है. यह आस्था से जुड़ी है, समर्पण से जुड़ी है और हर उस आयोजन से जुड़ी है जहां रंगों की जरुरत हो.



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