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Ujjain National Astronomy Workshop: मध्यप्रदेश के उज्जैन के पास डोंगला गांव में वराह मिहिर वेधशाला देश का नया खगोलिक केंद्र बन रही है. यहां 21 जून को 300 वैज्ञानिकों की मौजूदगी में राष्ट्रीय कार्यशाला और योग कार्यक्रम होगा.
बाबा महाकाल की नगरी में एक जीवजीगंज वेधशाला के बाद एक और नई वैधशाला खोली गईं है, जहा खोगोलिक गणना का देखने को मिलेगी. अधिकांश लोग जिस स्थान को ‘यंत्र-महल’ के नाम से भी जानेंगे. क्युंकि यहां पर कई ऐसे यन्त्र है, जो खगोलीय घटना को दर्शाते है.

दरअसल, यह दूसरी वैधशाला धर्म नगरी उज्जैन से 35 किलोमीटर दूर महिदपुर तहसील के गांव डोंगला में वेधशाला स्थित है, जिसे वराह मिहिर वेधशाला के नाम से जाना जाता है. जिसे महान पुरातत्वविद पद्मश्री डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा खोजा गया था. 21 जून को डोंगला वेधशाला में योग के कार्यक्रम के साथ साथ “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी.

21 जून को यहा पर देश भर के करीब 300 वैज्ञानिक भाग लेंगे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे. देशभर से आए लोग यहा कल खगोलशास्त्री और अन्य जानकार लोग अपनी ही छाया गायब होते हुए भी देख सकेंगे.

अवंतिका नगरी को पृथ्वी का नाभि केंद्र भी माना जाता है. उज्जैन के गांव डोंगला में स्थित वेधशाला से कर्क रेखा गुजरती है. यह स्थान प्राचीन समय से ही खगोल विज्ञान एवं ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है. धार्मिक दृष्टि से देखे, तो यहां दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है. बाबा महाकाल खुद काल को नियंत्रित करते है.

खगोलीय घटना के लिए डोंगला ही क्यों चुना गया अगर इसकी हम बात करे तो भारत के एक महान खगोलशास्त्री वराह मिहिर हुए, जिनका जन्म उज्जैनी में हुआ था. वे सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक हुआ करते थे. उनके द्वारा अनेक खगोल शास्त्रीय सिद्धांतों की खोज की गई. इन्हीं के नाम पर डोंगला स्थित वेधशाला का नामकरण किया गया है.

यह वैधशाला इतनी खास है. क्युकि यहा 55 सीट का एक ऑडिटोरियम बनकर भी तैयार हुआ है. इसके माध्यम से जहां आकाश में होंने वाली घटनाओं को पर्यटक और स्कूली बच्चे तारामंडल के माध्यम से बड़ी स्क्रीन पर देख सकेंगे. इस प्रोजेक्ट से सरकार ग्रामीणों इलाकों के बच्चों को भी ब्रह्मांड की सैर करवाने के लिए प्रयासरत है. इससे बच्चों के मन में खगोल विज्ञान से संबंधित उठने वाले प्रश्नों को समझने में आसानी होगी.

इस तारामण्डल में 8 मीटर व्यास के एफ.आर.पी. डोम में ई-विजन 4 के डिजीटल प्रोजेक्टर एवं डिजीटल साउण्ड सिस्टम लगाया गया हैं. इस वातानुकूलित गोलाकार तारामण्डल में 55 लोग एक साथ बैठकर आकाशीय रंगमंच की हैरतअंगेज और जिज्ञाशावर्धक ब्रह्मांड में होने वाली घटनाओं का रोमांचक अनुभव एवं आनन्द ले सकेंगे. इस तारामण्डल की लागत लगभग 1.6 करोड़ रूपयें हैं.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला भी जाएंगे. वहां वे शंकु यंत्र से शून्य छाया का अवलोकन करेंगे. इसके अलावा, वे आचार्य वराहमिहिर न्यास और अवादा फाउंडेशन द्वारा बनाए गए एक नए तारामंडल का उद्घाटन भी करेंगे. इस तारामंडल में एक विशेष शो भी दिखाया जाएगा.