Ground Report : एक सड़क नहीं, सिस्टम पर सीधा सवाल… विदिशा के ग्रामीण पेट काटकर बना रहे रास्ता

Ground Report : एक सड़क नहीं, सिस्टम पर सीधा सवाल… विदिशा के ग्रामीण पेट काटकर बना रहे रास्ता


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Ground Report : मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज विधानसभा के मोतीपुर पंचायत में 94 परिवारों ने राशन बेचकर सड़क निर्माण शुरू कर दिया है. आजादी के दशकों बाद भी यह गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित था. ब…और पढ़ें

विदिशा जिले का मोतीपुर बीते 75 सालों से एक सड़क के इंतजार में था.

हाइलाइट्स

  • विदिशा के ग्रामीणों ने राशन बेचकर सड़क निर्माण शुरू किया.
  • गांव में सड़क न होने से बच्चों की पढ़ाई और इलाज में दिक्कतें.
  • सरकारी सहायता के बिना ग्रामीण खुद बना रहे सड़क.

विदिशा. आजादी के 75 साल बीत चुके हैं. देश अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है, लेकिन मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की सिरोंज विधानसभा में ऐसा गांव है जो अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. यहां के लोगों ने सरकार से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो अपने हक के लिए खड़े होना पड़ा. जिले की सिरोंज विधानसभा की लटेरी जनपद की मोतीपुर पंचायत में जहां 94 परिवार बरसों से एक सड़क के इंतजार में थे. लेकिन जब यह इंतजार असहनीय हो गया, तो ग्रामीणों ने हर माह मिलने वाला राशन (अनाज) बेचकर सड़क निर्माण का काम खुद शुरू कर दिया. आज इस गांव में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी मिलकर रोज सड़क बना रहे हैं- वो भी बिना किसी सरकारी सहायता के. शर्मनाक है कि सरकारी अफसरों को सब पता है लेकिन ना जानें क्‍यों वह यहां सड़क नहीं बना सके.

गांव की कक्षा 7वीं में पढ़ने वाली जानकी अहिरवार कहती है, “मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं, लेकिन बारिश के दिनों में स्कूल जाना नामुमकिन हो जाता है. रास्ता इतना खराब है कि पांव रखना भी मुश्किल होता है. मेरा सपना अधूरा रह जाएगा अगर ये हालात नहीं बदले.” वहीं एक ग्रामीण महिला की आंखों में आंसू तब छलक आते हैं, जब वह बताती है कि, “पिछले साल मेरे बेटे को तेज बुखार हुआ. एंबुलेंस गांव तक नहीं आ पाई. उसे चारपाई पर लादकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा, लेकिन समय पर इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई.” यह एक मां का दर्द नहीं, पूरे सिस्टम पर एक गंभीर आरोप है. एक ऐसी व्यवस्था पर जो दावा करती है कि गांव-गांव तक सड़कें पहुंचा दी गई हैं, लेकिन मोतीपुर पंचायत की जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है.

राशन बेचकर जुटा रहे पैसे
गांव के लोगों ने आपस में बैठक की, चंदा इकट्ठा किया और हर माह मिलने वाले सरकारी राशन को बेचकर पैसे इकट्ठे किए. इससे जो रकम जुटी, उससे स्थानीय मजदूरों की मदद से मिट्टी, गिट्टी और रोलर आदि का इंतजाम किया गया. गांव की महिलाएं सुबह-सुबह फावड़ा, कुदाल लेकर खुद काम पर लग जाती हैं, ताकि उनके बच्चों को कम से कम भविष्य में सड़क के लिए नहीं लड़ना पड़े.

पूरा सिस्‍टम ही फेल हो गया है क्‍या ? 
क्या यह दृश्य देश के नेताओं को नहीं झकझोरता? क्या यह एक बस्ती की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता नहीं है? जब ग्रामीण अपने भोजन का हिस्सा काटकर सड़क बना रहे हैं, तो ये सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं- बल्कि विकास के खोखले दावों का पर्दाफाश है. सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं है, सवाल उस सिस्टम का है जो देखता है लेकिन सुनता नहीं, जो आंकड़े दिखाता है लेकिन ज़मीनी सच्चाई से मुंह मोड़ता है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

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एक सड़क नहीं, सिस्टम पर सीधा सवाल… विदिशा के ग्रामीण पेट काटकर बना रहे रास्ता



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