जिस तरह मानव जाति संतान के जरिए अपना वंश बढ़ाती है वैसे ही पेड़- पौधों पर यदि मनुष्य द्वारा ध्यान दिया जाए तो एक पेड़ अपने बीजों से हजारों पौधे पैदा कर सकता है। कुछ इसी तरह का उदाहरण है कालापाठा में वन विद्यालय परिसर में लगा 150 साल पुराना बरगद का पेड़।
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कालापाठा में वन विभाग की नर्सरी के कैंपस से सटा हुआ बरगद का पेड़ है। इस पेड़ के तने की मोटाई 15 फीट है। इसकी शाखाएं 4 से 4.5 फीट चौड़ी हैं। नर्सरी इंचार्ज सुरेश चौकीकर ने बताया कि नर्सरी के बगल में बरगद का वृक्ष है। इसके बीजों में अंकुरण बहुत ज्यादा और जल्द होता है। इसीलिए इसके बीजों से 8 साल में 12 हजार से अधिक पौधे तैयार कर रोपे गए हैं।
ग्रीन हाउस का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस रखना पड़ता है, आर्द्रता 90 होना जरूरी: ग्रीन हाउस में ये बरगद के बीज मिस्ट चैंबर में रखकर अंकुरित कर तैयार किए जाते हैं। नर्सरी इंचार्ज सुरेश चौकीकर ने बताया कि दरअसल बरगद के बीजों के अंकुरण के लिए तापमान 40 डिग्री जरूरी है यानी सामान्य टेंपरेचर से अधिक तापमान जरूरी है। इसी तरह आर्द्रता भी 90 होना जरूरी है। मिस्ट चैंबर में आर्द्रता और तापमान दोनों ज्यादा रहती है। इससे अंकुरण होने में परेशानी नहीं आती है।