उज्जैन को वैश्विक टाइम सेंटर बनाने की पहल, विपक्ष ने बताया चुनावी स्टंट, सियासी हंगामा

उज्जैन को वैश्विक टाइम सेंटर बनाने की पहल, विपक्ष ने बताया चुनावी स्टंट, सियासी हंगामा


मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उज्जैन को अंतरराष्ट्रीय समय केंद्र (Universal Meridian Time, UMT) घोषित करने की मांग ने राज्य राजनीति में हलचल मचा दी है. उज्जैन, आचार्य वराहमिहिर के समय से ‘कालगणना का केंद्र’ रहा है, इसलिए भाजपा इसे विज्ञान और संस्कृति के मेल का प्रतीक मानती है. लेकिन इस कदम के पीछे क्या है वास्तविक रणनीति? उज्जैन UMT प्रस्ताव एक द्विध्रुवीय राजनीतिक हथियार बन चुका है-एक तरफ यह वैज्ञानिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है, तो दूसरी तरफ इसे विपक्ष ‘विकास-मंडित-चुनावी स्टंट’ मान रहा है. दबाव में, भाजपा इसे एक बड़ी जीत बता सकती है-लेकिन विफलता स्थिति में इसे आलोचनाओं का नया टारगेट बनने से नहीं रोक पाएगी.

यह मामला एमपी की सीमाओं से आगे निकल कर अब राष्‍ट्रीय चर्चा में आ चुका है. भाजपा और एमपी सरकार इस पर अपना पक्ष रख रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष ने सियासी संग्राम शुरू कर दिया है. कांग्रेस के नेता और प्रवक्‍ताओं ने इसे प्रचार का हथकंडा और चुनावी स्‍टंट जैसा बताया है. कांग्रेस का कहना है कि बारिश शुरू हो गई है और सरकार के पास जन सुरक्षा के माकूल इंतजाम तक नहीं हैं. लोगों के घरों में बरसाती पानी घुसा चला जा रहा है, शहरों में बाढ़ जैसे हालात जून में बन रहे हैं. पूरा सिस्‍टम फेल है, उसी राज्‍य में गणना और काल और समय को लेकर बाते करना ठीक नहीं, जनता के साथ मजाक है.

केवल वैज्ञानिक प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं
उज्जैन को UMT की स्थिति दिलाने की मांग में छिपा है एक लालित्य—यह कदम वैज्ञानिक राष्ट्रवाद की परिकल्पना को मजबूत करता है. भाजपा ने इसे “क्लॉक और संस्कृति” का संयोजन बताया है, जो भारत की वैज्ञानिक महानता को वैश्विक मंच पर पेश करता है. इसके साथ ही, MP और सम्पूर्ण मध्य भारत के गौरवबोध को हवा मिलती है. यह कोशिश केवल वैज्ञानिक प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं है-इसका दूसरा उद्देश्य है हिन्दू सांस्कृतिक वोटबैंक को जागृत करना. उज्जैन, जहां श्रावण और कुंभ जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं, वहां समय-संस्कृति का नैरेटिव दिया जा रहा है. यह भाजपा के ‘संस्कृति’ और ‘धर्म’ आधारित राजनीतिक मंच का विस्तार है.

राजनीतिक विरोध और विपक्षी आलोचना
कांग्रेस ने इस आग्रह को ‘वास्तविक मुद्दों से भटकाव’ करार दिया है. पार्टी के नेता कह रहे हैं कि उज्जैन, चाहे कितना भी प्रसिद्ध हो, GMT की जगह UMT बनना महज भाषायी मोटा-चौका ( headline stunt ) है—जबकि सड़क, बिजली, स्वास्थ्य जैसे वास्तविक मुद्दे आज भी नाजुक हैं. उन्होंने इसे ‘चुनावी ड्रामा’ और असली विकास सवालों से ध्यान हटाने की साज़िश बताया.

 मीडिया में उछला मामला, मुद्दे पर हो रही चर्चा 
स्थानीय मीडिया इस प्रस्ताव को उत्साह या तिरस्कार, दोनों दृष्टिकोणों से दिखा रही है. सामाजिक मीडिया पर #UjjainUMT ट्रेंड कर रहा है—कुछ युवा इसे वैज्ञानिक स्वाभिमान की मिसाल मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं. उज्जैनवासी अवसरवाद और वास्तविक क्षेत्रीय लाभ पर बहस कर रहे हैं.

सियासी अनुमान और चुनावी संदर्भ
भोपाल, इंदौर जैसे शहरी इलाकों में भी यह विधानसभा हल्का हिट-बिंदु बन गया है. आखिर लोकसभा चुनाव 2026 के पहले यह एक सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के रूप में BJP की स्थानीय पकड़ को मजबूत करेगा. वहीं कांग्रेस इसे पलटवार के एक मौके के रूप में इस्तेमाल करना चाहेगी—”हमारे मुद्दे वोट बैंक से नहीं, आम जनता की बेहतरी से संबंधित हैं”.



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