रविवार को मंडला, श्योपुर और ओरछा समेत प्रदेश के कई जिलों में बारिश हुई।
साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और टर्फ के एक्टिव होने से मध्यप्रदेश में अगले 4 दिन तक बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। रविवार को पूरे प्रदेश में बारिश हुई। वहीं, सोमवार को उज्जैन में रेड, इंदौर-देवास में ऑरेंज अलर्ट है। मौसम विभाग ने इस सीजन में
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मौसम विभाग के अनुसार, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा और राजगढ़ में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट है। यहां 24 घंटे में 8 इंच से ज्यादा पानी गिर सकता है। नीमच, मंदसौर, इंदौर और देवास में ऑरेंज अलर्ट है। ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, रतलाम, सीहोर, नर्मदापुरम, विदिशा और सागर में भी भारी बारिश की संभावना है। भोपाल समेत अन्य जिलों में भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहेगा।
22 से ज्यादा जिलों में बारिश का दौर इससे पहले रविवार को भी प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार, टीकमगढ़ में 2 इंच बारिश हुई। मंडला में डेढ़ इंच, नर्मदापुरम में 1.4, ग्वालियर में 1 इंच, भोपाल-रायसेन में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। बालाघाट के मलाजखंड में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं, रतलाम, पचमढ़ी में आधा इंच बारिश हुई। बैतूल, धार, इंदौर, शिवपुरी, उज्जैन, छिंदवाड़ा, दमोह, खजुराहो, निवाड़ी, सागर, सिवनी, उमरिया समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा।
रविवार को प्रदेश में हुई बारिश की तस्वीरें…




इन सिस्टम की वजह से ऐसा मौसम प्रदेश के ऊपर से एक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) गुजर रहा है। वहीं, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और टर्फ की एक्टिविटी भी है। ये सिस्टम काफी स्ट्रॉन्ग है। इस वजह से अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट है। अगले चार दिन तक भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, सागर, जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम और रीवा संभाग में तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।
मानसून एक्टिव होने के बाद तेज बारिश का दौर बता दें कि इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। वहीं, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया। ऐसे में अनुमान था कि मध्यप्रदेश में यह जून के पहले सप्ताह में ही आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। इस वजह से एमपी में इसकी एंट्री नहीं हो पाई। 13-14 जून को मानसून आगे बढ़ा। बावजूद यह प्रदेश में 1 दिन लेट हो गया।
हालांकि, 3 दिन में ही मानसून ने प्रदेश के 53 जिलों को कवर कर लिया। वहीं, एक के ठहराव के बाद बीते शुक्रवार को बाकी बचे 2 जिले- भिंड और मऊगंज में भी मानसून एंटर हो गया। इस तरह 5 दिन में ही मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। एमपी में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून ही है। पिछले साल यह 21 जून को एंटर हुआ था।
रविवार को प्रदेश में इतना रहा तापमान…


अब जानिए, 10 साल में कैसा रहा मौसम… भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर रहा। 4 साल तो टेम्प्रेचर 45 डिग्री के पार पहुंच गया। वहीं, रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी।
वहीं, पिछले साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी। वहीं, 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था।

इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश जून में इंदौर में दिन के टेम्प्रेचर में खासी गिरावट होती है। पिछले 5 साल यानी- 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.1 डिग्री के बीच रहा है। पिछले साल 40.6 डिग्री तक पारा पहुंचा था। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल करीब 4 इंच पानी गिरा था।
बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1980 में यहां जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था। 3 जून 1991 में इंदौर में दिन का पारा 45.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था।

ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका टेम्प्रेचर ग्वालियर में मई के बाद जून भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 2024 में पारा 45.7 डिग्री दर्ज किया गया था। इस महीने अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है।
मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2019 में पारा 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 1962 में पूरे महीने साढ़े 28 इंच बारिश हो गई थी। एक दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जून 1952 को बना था। साल 2024 में यहां पूरे महीने 5.7 इंच पानी गिरा था।

जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यही से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2014 से 2023 तक के आंकड़ों पर नजर डाले तो कोटे की 30% तक बारिश हो चुकी है। पिछले साल 10 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर के दक्षिण हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है।

उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2015 से 2023 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। 20 जून तक यहां मानसून एंटर हो सकता है।
