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IAS Success Story: सतना के कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस 2013 बैच के आईएएस अफसर हैं. उनका बचपन से ही आईएएस बनने का सपना था. लेकिन, बीच में वो MBBS पास कर डॉक्टर बन गए. फिर कैसे बने IAS..पढ़ें रोचक कहानी.
मूल रूप से तमिलनाडु के वेल्लोर से आने वाले डॉ. सतीश कुमार एस को बचपन में ही कलेक्टर बनने की प्रेरणा मिल गई थी. बचपन में वो अपने पिता के साथ कभी-कभी कलेक्ट्रेट जाया करते थे. वहीं उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली को देखा और उसी दौरान तय कर लिया कि वह भी एक दिन कलेक्टर बनेंगे.

सतीश कुमार ने मद्रास मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की, लेकिन उनका सपना डॉक्टर नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक अधिकारी बनना था. उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के साथ ही सिविल सेवा की तैयारी की और 2013 में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुए.

शिक्षिका मां और पटवारी पिता के घर में पले-बढ़े सतीश का पालन-पोषण एक अनुशासित और सेवा भावी वातावरण में हुआ. पढ़ाई में उन्हें बचपन से ही रुचि थी, जिसके चलते उन्होंने एक दिन आईएएस का मुकाम हासिल किया.

अपने प्रशासनिक करियर में सतीश कुमार ने सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन बनाए रखा है. 31 जुलाई 2023 तक भिंड जिले में कलेक्टर रहते हुए उन्होंने अनुशासनप्रिय प्रशासन की छवि बनाई, जिसके चलते वे आम जनता और अधिकारियों दोनों के बीच चर्चा में आए.

28 जनवरी 2025 में मध्य प्रदेश सरकार के प्रशासनिक फेरबदल के तहत उन्हें सतना का कलेक्टर नियुक्त किया गया. इससे पहले वे मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड, भोपाल के प्रबंध संचालक और पशुपालन एवं डेयरी विभाग में पदेन उप सचिव के रूप में कार्यरत थे.

सतना में पदभार ग्रहण करते ही उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त कार्रवाई की. किताबों और वर्दी के नाम पर अभिभावकों से लूट के मामलों में उन्होंने जुर्माना लगाया, जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली और शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन की उम्मीद जगी.

जनसुनवाई के दौरान एक स्कूल हेडमास्टर की गैरहाजिरी पर उन्होंने तत्काल सस्पेंड करने का आदेश दिया. यह कदम दिखाता है कि वे ड्यूटी में लापरवाही को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करते और जनता से जुड़ी प्राथमिकताओं को सर्वोपरि मानते हैं.

डॉ. सतीश कुमार एस की कहानी सिर्फ एक आईएएस अफसर की नहीं, बल्कि एक सपना देखने वाले और उसे पूरा करने वाले व्यक्ति की है. अनुशासन त्वरित निर्णय क्षमता और जनसेवा की भावना उन्हें खासकर उन युवाओं के लिए प्रेरणाश्रोत बनाती है जो यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं.