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सर्प विशेषज्ञ महादेव पटेल ने बताया कि सांपों में रंग बदलने की क्षमता होती है, लेकिन यह गिरगिट जैसी तेज नहीं होती. सांप अपने पर्यावरण, तापमान और स्वास्थ्य के अनुसार रंग बदलते हैं.
खरगोन के प्रसिद्ध सर्प विशेषज्ञ एवं स्नेक कैचर महादेव पटेल ने Local18 को बताया कि कुछ सांपों में रंग बदलने की क्षमता होती है, लेकिन यह क्षमता गिरगिट जैसी साफ और तेज नहीं होती. वे बताते हैं कि रंग बदलने की क्षमता सांपों में उनके वातावरण, तापमान, स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति के अनुसार होती है.

कुछ सांप जैसे गार्टर स्नेक, ब्रॉन्ज बैक और वाइन स्नेक में हल्की रंग बदलने की क्षमता होती है. लेकिन, यह परिवर्तन अधिकतर धीमा और सूक्ष्म होता है. इसके अलावा इनलैंड ताइपन विषैला होने के साथ साथ गिरगिट की तरह रंग बदलने में भी काफी माहिर है.

उन्होंने बताया कि सांप अपने पर्यावरण के अनुसार हल्का या गहरा रंग बदल सकते हैं. यह उन्हें शिकारियों से छिपाने और शिकार करने में मदद करता है. वहीं, तापमान में बदलाव के साथ भी सांपों का रंग बदल सकता है.

सर्दियों के मौसम में सांपों का रंग गहरा हो सकता है. जिससे वे अधिक गर्मी अवशोषित कर सकें. जबकि, स्वास्थ्य और भावनात्मक रूप से बीमार या तनावग्रस्त सांपों का रंग भी बदल सकता है.

सर्दियों के मौसम में सांपों का रंग गहरा हो सकता है. जिससे वे अधिक गर्मी अवशोषित कर सकें. जबकि, स्वास्थ्य और भावनात्मक रूप से बीमार या तनावग्रस्त सांपों का रंग भी बदल सकता है.

बता दें कि, सांपों को लेकर सामाजिक मिथकों और कहानियों में उनकी रंग बदलने की शक्ति को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है. ग्रामीण इलाकों में सांपों को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां प्रचलित हैं.

लोगों का मानना है कि सांप बदला लेने के लिए या फिर दुश्मनों को धोखा देने के लिए भी रंग बदल सकते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट महादेव पटेल ने स्पष्ट किया है कि सांपों में ऐसी क्षमताएं नहीं होती.

उन्होंने बताया कि सांपों को लेकर फैलाए गए कई मिथकों का कोई वैज्ञानिक आधार या प्रमाण नहीं है. सांप अपनी रक्षा के लिए अधिकतर छिपने की कोशिश करते हैं.

वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सांपों में रंग बदलने की क्षमता सीमित और धीमी होती है, लेकिन समाज में इसको लेकर प्रचलित धारणाएं और कहानियां इसे रहस्यमय और अद्वितीय बनाती हैं. (रिपोर्टः दीपक पांडे/ खरगोन)