जगलों से शहर तक! कैसे यह जंगली जानवर बना इंसानों का पालतू, DNA और दांतों से खुला राज; सूअर का इतिहास

जगलों से शहर तक! कैसे यह जंगली जानवर बना इंसानों का पालतू, DNA और दांतों से खुला राज; सूअर का इतिहास


सूअर एक ऐसा जानवर है, जिसे लेकर दुनियाभर में कई तरह की धारणाएं बनी हुई हैं. कुछ लोग इन्हें गंदा मानते हैं, तो कुछ इनकी बुद्धिमत्ता और कृषि में ऐतिहासिक भूमिका की सराहना करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस जानवर का जंगल से खेतों तक पहुंचना 8000 साल से ज्यादा पुराना है?

हाल ही में एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि दक्षिणी चीन में करीब 8000 साल पुराने सूअरों के दांत पाए गए हैं. इन दांतों की गहन जांच करने पर वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि उस समय इन जानवरों को इंसानों ने पालतू बनाना शुरू कर दिया था.

जंगल से पालतू बनने की शुरुआत
करीब 10,000 साल पहले नवपाषाण युग में इंसानों ने खेती करना शुरू किया था. तब जंगल में रहने वाले सूअर इंसानी बस्तियों के आस-पास मंडराने लगे. कुछ सूअरों को इंसानों के रहने से फायदा दिखाई देने लगा, क्योंकि उन्हें खाने-पीने के लिए खेतों में आसान स्रोत मिलने लगे.वैज्ञानिक बताते हैं कि उस समय के जंगली सूअर आकार में बड़े, स्वभाव से आक्रामक, और अकेले रहना पसंद करते थे, लेकिन धीरे-धीरे उन सूअरों में बदलाव आने लगे जो इंसानों के साथ ज्यादा समय बिताते थे. उनका स्वभाव शांत हुआ और उनका आकार छोटा होता गया.

क्या खाते थे उस समय के सूअर?
इस शोध में दक्षिणी चीन के कुछ पुरातात्विक स्थलों से 32 सूअरों के दांत इकट्ठा किए गए। जब इन दांतों की सतह पर जमी परत (डेंटल कैल्कुलस) की जांच की गई, तो पता चला कि उस समय के सूअर पकाए हुए चावल, याम, कंद, बलूत और अन्य वनस्पतियां खाते थे. इसका अर्थ है कि ये सूअर खेतों में पैदा हुई चीजें खाते थे, या फिर इंसान उन्हें खाने के लिए कुछ चीजें दे रहे थे. इस तरह सूअरों का पालतू बनने का सिलसिला शुरू हो गया.

इंसानों से रिश्ता कैसे गहराया?
सूअरों के पालतू बनने की इस प्रक्रिया को “कॉमेंसल पाथवे” कहा जाता है. यानी कुछ जानवर स्वेच्छा से इंसानी बस्तियों के करीब रहने लगे, ताकि आसानी से भोजन मिल सके। धीरे-धीरे वे जंगल छोड़कर खेतों में आने लगे.
इस प्रक्रिया में सूअरों की आदतें बदलने लगीं, उनका शरीर छोटा हुआ और स्वभाव में नरमी आई। इस बदलाव में मुख्य भूमिका खाने की रही, क्योंकि खेती करने से इंसानों के घर के पास खाने-पीने की चीजें हमेशा मिलती रहीं.

परजीवी से मिले नए सुराग
एक चौंकाने वाला तथ्य इस शोध में यह भी सामने आया कि सूअरों के दांतों में परजीवी के अंडे पाए गए, जो आमतौर पर इंसानों के पेट में मिलते हैं. इससे अनुमान लगाया गया कि सूअर इंसानों के अवशेष या गंदगी में भोजन तलाशते थे, जिससे वे इंसानों के करीब होते चले गए.

आज की स्थिति
आज दुनियाभर में सूअर खेतों, घरों और पशुपालन केंद्रों में पाले जाते हैं. इनका आकार जंगल में रहने वाले सूअरों से छोटा है, स्वभाव में नरमी है, और वे मुख्य रूप से खेत में उगने वाली चीजें खाते हैं. इस तरह 8000 साल से भी ज्यादा पुराना यह सफर दर्शाता है कि किस तरह इंसानों ने धीरे-धीरे इस जानवर को पालतू बनाया. आज हम जिस रूप में सूअरों को देखते हैं, वह इसी ऐतिहासिक बदलाव का परिणाम है.



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