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Home Remedies For Bee Sting: आज हम आपको ऐसे देशी घरेलू नुस्खे के बारे में बताने वाले हैं जिसका प्रयोग करने से मधुमक्खी काटने के बाद ना तो आपको सूजन आएगी और और ना ही किसी प्रकार का आपको कोई दर्द महसूस होगा. (रिपोर्टः पिंटू)
सामान्य रूप से मधुमक्खी काटे तो पीड़ा, सूजन से कष्ट बढ़ जाता है. कहीं चेहरे पर काट ले तो नक्शा ही बिगड़ जाता है. अगर आपको कभी मधुमक्खी काट लें, तो इसका इलाज घर पर भी कर सकते हैं. आइए जानें मधुमक्खी के डंक मारने पर किस तरह के घरेलू उपाय काम आ सकते हैं?

इस पर चर्चा करते हुए शासकीय कॉलेज लवकुश नगर के जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सुनील कुमार चौरसिया ने Local18 को बताया कि मधुमक्खियां कॉलोनी (मौनवंश) बनाकर रहती हैं. कॉलोनी में तीन प्रकार के सदस्य होते हैं: रानी मधुमक्खी (मादा), ड्रोन मधुमक्खी (नर) और श्रमिक मधुमक्खी.

प्रोफेसर चौरसिया ने Local18 से कहा कि जब अम्ल और क्षार की क्रिया होती है, तो इसे न्यूट्रलाइजेशन यानी उदासीनीकरण कहा जाता है. मधुमक्खी के डंक में फार्मिक एसिड होता है और चूना बेस (क्षार) होता है. जब इन दोनों के बीच प्रतिक्रिया होती है, तो यह न्यूट्रल हो जाता है, जिससे दर्द में राहत मिलती है. इसी वजह से चूना लगाने से मधुमक्खी के डंक से आराम मिलता है.

प्रोफेसर सुनील कुमार चौरसिया ने आगे बताया कि शहद का छत्ता केवल श्रमिक मधुमक्खी ही बनाती है. ड्रोन और रानी मधुमक्खी का मुख्य काम मधुमक्खियों की संख्या बढ़ाना होता है. इन दोनों का शहद छत्ता बनाने में कोई योगदान नहीं होता.

वहीं, प्रोफेसर ने कहा कि मधुमक्खियों को उनके साइज के अनुसार पहचाना जा सकता है. सबसे बड़ा साइज रानी मधुमक्खी का होता है, फिर ड्रोन मधुमक्खी का और सबसे छोटा साइज श्रमिक मधुमक्खी का होता है. एक छत्ते में केवल एक रानी मधुमक्खी होती है.

प्रोफेसर चौरसिया ने बताया कि ड्रोन या नर मधुमक्खी में जहर नहीं होता. इनका काम रानी मधुमक्खी के साथ संभोग करके मधुमक्खियों की संख्या बढ़ाना होता है. वहीं, रानी मधुमक्खी अंडे देने के साथ ही काटने का काम भी करती हैं, क्योंकि इसमें जहर होता है.

प्रोफेसर ने कहा कि श्रमिक मधुमक्खी में भी फार्मिक एसिड नामक जहर होता है. शहद तोड़ने वाले लोग यह जानते हैं कि किस मधुमक्खी में जहर होता है और किसमें नहीं, इसलिए वे आसानी से शहद तोड़ लेते हैं. उनका कहना है कि मधुमक्खियां कभी भी जानबूझकर किसी को नहीं काटतीं. ये सिर्फ अपने बचाव के लिए काटती हैं, जब उन्हें खतरा महसूस होता है.