21 जून को कॉमेडियन कपिल शर्मा का नेटफ्लिक्स पर द ग्रेट इंडियन कपिल शो सीजन 3 के पहले एपिसोड का प्रसारण हुआ। इस एपिसोड में सलमान खान गेस्ट थे। वहीं इस एपिसोड में आए एक और शख्स ने सबका ध्यान खींचा। वो थे बालाघाट के सूर्यभान। उन्होंने अपनी जीभ से सलमान
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अपनी नई पेंटिंग में रंग भरते सूर्यभान।
जीभ से पेंटिंग करने वाले सूर्यभान ने कब से पेंटिंग शुरू की, उन्हें जीभ से पेंटिंग करना किसने सिखाया और कपिल के शो तक पहुंचने का उनका सफर कैसा रहा…
पढ़िए इस रिपोर्ट में-
इंदौर के बंगाली चौराहे के पास गोयल नगर में एक होटल के ग्राउंड फ्लोर पर सूर्या आर्ट स्टूडियो है। स्टूडियो के गेट पर एक सुंदर सी पेंटिंग बनी हुई है। ऊपर लिखे नाम के नीचे सोशल मीडिया आईडी लिखी हुई है। अंदर जाने पर दीवारों पर अलग-अलग तरह की पेंटिंग्स लगी हुई हैं। एक लोहे का रैक है जिस पर रंगों की कई डिब्बियां रखी हैं। सैकड़ों पेंटिंग ब्रश भी पास ही रखे हुए हैं। दीवार की दूसरी तरफ के रैक पर ढेर सारे सर्टिफिकेट्स के साथ कई ट्राफियां चमचमाती दिखती हैं।
कमरे के भीतर रखे एक स्टैंड पर बड़े से कैनवास पर सलमान खान की एक पेंटिंग रखी हुई है। पेंटिंग पर सलमान खान के ऑटोग्राफ हैं। यह आर्ट स्टूडियो सूर्यभान मरावी का है। सूर्यभान मरावी बताते हैं यह वही पेंटिंग है जो आपने कपिल शर्मा शो में देखी है। 21 जून को जो नेटफ्लिक्स पर कपिल शर्मा का शो आया है। उसकी शूटिंग 3 जून को हुई थी और सोनी टीवी की तरफ से मुझे एपिसोड के लिए परफॉर्म करने का न्योता मिला था।
सलमान का रिएक्शन उनकी आंखों में देख सकता था
सूर्यभान ने कहा कि मैं कपिल के शो को लेकर बहुत उत्साहित था और जैसे ही मुझे न्योता मिला, मैंने उन्हें हां कह दिया। जब मैं स्टेज पर था, मैंने कैनवास रखा तब तक सलमान खान के रिएक्शन सामान्य थे लेकिन जैसे ही मैंने अपनी जीभ से उनकी पेंटिंग बनाई। मैं उनका रिएक्शन उनकी आंखों में देख सकता था। उनकी आंखों में पानी था।
सलमान खान खुद भी एक आर्टिस्ट हैं, इसीलिए वह एक आर्टिस्ट को शायद ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। उन्होंने मुझसे कहा कि हाथ से पेंटिंग सब बनाते हैं, लेकिन तुमने तो आज कमाल ही कर दिया। उन्होंने मुझसे हाथ मिलाया और मेरे लिए पेंटिंग पर अपना ऑटोग्राफ दिया।

पेंटिंग पर ऑटोग्राफ देते सलमान खान।
अब बात सूर्यभान के यहां तक पहुंचने के सफर की
मिट्टी के खिलौने बनाने से हुई आर्ट की शुरुआत
सूर्यभान मरावी बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक के सुंदरवाही गांव के रहने वाले हैं। पांचवीं तक की पढ़ाई गांव में करने के बाद सूर्यभान ने बालाघाट जिले के मलाजखंड ब्लॉक में शासकीय आदर्श आवासीय स्कूल में छठवीं से 12वीं तक की पढ़ाई की।
सूर्यभान बताते हैं कि 4 साल की उम्र तक मेरी आवाज नहीं आई थी। मैं बिल्कुल बोल नहीं पाता था। शायद तब दिमाग में बहुत कुछ चलता रहा होगा। गांव की जिंदगी ऐसी होती है, जहां बहुत पैसा नहीं होता। हमारे घर में भी हम पांच भाई-बहन थे। वहां दैनिक जरूरत की चीज ही परिवार मुश्किल से हासिल कर पाता था। मुझे खिलौने बहुत पसंद थे। जब खिलौने नहीं मिले तो मैंने मिट्टी से खिलौने बनाने शुरू कर दिए और उन्हीं खिलौनों से खेलने लगा। शायद यहीं से मेरे आर्ट की शुरुआत हुई।
स्कूल के दिनों से शुरू हुआ पेंटिंग से लगाव
सूर्यभान ने आगे बताया, जब मैं स्कूल पहुंचा तो वहां मुझे स्लेट और पेंसिल मिल गई। स्कूल और घर में मैं दिन भर अपनी स्लेट पर कोई ना कोई चित्र बनाता रहता। जब थोड़ी और बड़ी क्लास में पहुंचा तो कागज, पेंसिल-पेन मिल गया। उससे कागज पर चित्र बनाता। जो मेरे क्लास के दोस्तों को बहुत पसंद आते और वो मुझसे चित्र मांगते तो मैं उन्हें कागज पर बनी पेंटिंग देता और बदले में उनसे खाली कागज और पेन ले लेता।
जब मैं अपनी 12वीं की पढ़ाई के लिए मलाजखंड के स्कूल में पहुंचा तो वहां हमारे स्कूल में महेंद्र समृद्ध नाम के टीचर आए। वो अच्छे काम के लिए बच्चों की बहुत सराहना करते थे। उन्होंने जब मेरी पेंटिंग देखी तो उन्होंने मेरी खूब तारीफ की। मुझे प्रिंसिपल तक ले गए। स्कूल के हर प्रोग्राम में मुझे स्टेज पर पेंटिंग बनाने का काम देते। प्रिंसिपल सर ने भी मुझे कलर और ब्रश मंगा कर दिया। उस स्कूल की सारी दीवारों पर मैंने बहुत सारी पेंटिंग्स बनाई।

सूर्यभान के घर पर रंगों का एक अलग ही संसार नजर आता है।
इंदौर में मिला आर्ट को प्लेटफॉर्म
12वीं पास करने के बाद मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए इंदौर आ गया। इंदौर में एसजीएसआईटीएस कॉलेज में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में मुझे एडमिशन मिल गया। बस यहीं से मेरे आर्ट को प्लेटफॉर्म मिलना शुरू हो गया।
कॉलेज के फर्स्ट सेमेस्टर में ही लाइव फास्ट पेंटिंग कॉम्पिटिशन हुआ। उस कॉम्पिटिशन का मैं विनर रहा। मुझे करीब पांच हजार रुपए मिले। जिससे मैं और कैनवास, कलर और ब्रश खरीद कर ले आया।
प्राथमिक शिक्षा में तो मैं थोड़ा कमजोर था। पहली कक्षा में फेल भी हो गया था, लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ी कक्षाओं में पहुंचता गया, पढ़ाई के लिए सीरियस होता गया।
दसवीं में मुझे 89 प्रतिशत अंक मिले थे।12वीं में भी मेरे 80 पर्सेंट आए। इसीलिए घर वालों ने इंजीनियरिंग करने भेजा। सबको लगता था कि मैं बहुत होशियार लड़का हूं, लेकिन इंजीनियरिंग के दौरान मेरे मन में उधेड़बुन चलने लगे और मैंने तभी तय कर लिया कि मैं अपने आर्ट को ही पूरा समय दूंगा। मैं आर्टिस्ट की तरह ही दुनिया में अपनी पहचान बनाना चाहता हूं। मुझे यही काम सबसे अच्छा लगता है।
अब सूर्यभान की चार पेंटिंग देखिए…

मनुष्य का जीव से निस्वार्थ प्रेम। ये पेंटिंग उनके निस्वार्थ प्रेम सीरीज का हिस्सा है।

जीव का मनुष्य से निस्वार्थ प्रेम। ये पेंटिंग भी निस्वार्थ प्रेम सीरीज का हिस्सा है।

ये पेंटिंग रियलिस्टिक फॉर्मेट पर आधारित है। जैसे-जैसे विजन दूर होगा पेंटिंग उतनी रियल दिखेगी।

सूर्यभान कहते हैं कि ये पेंटिंग उन्होंने 2017 में बनाई थी। तब दिमाग में कई चीजें चल रही थीं। एक तरफ इंजीनियरिंग, दूसरी तरफ आर्ट कॅरियर…कई सारी चीजें। पांच घोड़े इंद्रियों को दिखा रहे हैं, जिनका सिर्फ एक ही चेहरा है।
कलर्स ऑफ यूथ से पहली बार टीवी पर आए
सूर्यभान ने बताया एक कॉम्पिटिशन के लिए मैं 2017 में आईआईटी मुंबई गया था। वहीं एमटीवी के प्रोग्राम के रजिस्ट्रेशन हो रहे थे। मैंने भी अपना रजिस्ट्रेशन कर दिया था।
जब मैं वापस इंदौर आ गया तब मुझे एम टीवी से कॉल आया कि मेरा सिलेक्शन कलर्स ऑफ यूथ सीजन 6 के ऑडिशन के लिए हो गया है। ऑडिशन में 90 सेकेंड में 5 फीट की पेंटिंग बनाई। मुझे 5 मिनट देने के बात हुई थी, लेकिन ऑडिशन में भीड़ होने की वजह से मुझे 90 सेकेंड ही मिला।
मुझे लगा मेरा सिलेक्शन नहीं होगा मैं वापस आ गया, लेकिन मुझे कॉल आया और मेरा सिलेक्शन हो गया। इस प्रोग्राम में मैं सेमीफाइनल तक गया। इस दौरान कई सेलिब्रिटी से मेरा मिलना हुआ। इसके बाद मैंने इसके सातवें सीजन के लिए भी ऑडिशन दिया, पर मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ।
मैं ऑडिशन देता रहा, लेकिन मुझे फीडबैक मिला की शो के लिए कुछ अलग चाहिए। फिर मैंने डिसाइड किया कि मैं अपनी जीभ से पेंटिंग बनाऊंगा।

मिथुन, हुमा कुरैशी और भाग्यश्री से मिल चुके हैं
सूर्यभान ने बताया, 2021 में कलर्स टीवी के हुनर बाज और इंडियाज गॉट टैलेंट में मेरा सिलेक्शन हुआ, लेकिन कलर्स से पहले कॉन्ट्रैक्ट होने की वजह से मुझे इंडियाज गॉट टैलेंट छोड़ना पड़ा। वहां भी मेरा अनुभव अच्छा रहा। मैं मिथुन चक्रवर्ती के साथ कई सेलिब्रिटी से मिला, लेकिन सोनी टीवी में काम करने का मेरा सपना पूरा नहीं हो पाया।
2023 में सोनी टीवी पर मैडनेस मचाएंगे शो आया, मुझे बुलाया गया। इस शो को भाग्यश्री और हुमा कुरैशी मैम ने जज किया।
अब कपिल शर्मा के शो में मौका मिला। अब मैं अमेरिका गॉट टैलेंट में जाना चाहता हूं।

मकान मालिक और साथी पेंटर भी हुनर से प्रभावित
इंदौर के रहने वाले सिद्धांत तिवारी बताते हैं कि सूर्यभान को मैं पिछले 6 सालों से जानता हूं। वो मेरे ही घर में किराए से रहते थे। आर्ट के लिए बहुत मेहनत करते हैं। सेल्फ मेड आदमी हैं।

पेंटर चंदन किशोर गुप्ता कहते हैं कि 5-6 साल पहले सूर्यभान मुझसे मिलने आया था। मेरे आर्ट वर्क को देखकर उसने मुझसे आर्ट सीखने की इच्छा जताई। इसके बाद मैं और वो आपस में जुड़े रहे। वो समय समय पर मेरे पास आता रहता है। बहुत मेहनती और टैलेंटेड लड़का है। अब जब मैं उसके हुनर को टीवी पर देख रहा हूं तो मुझे बहुत ही अच्छा महसूस हो रहा है। अपने साथ वो मेरा भी नाम रोशन कर रहा है। उसने सलमान खान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के जो पोट्रेट बनाए उसे देखकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा।
सूर्यभान के स्कूल टीचर शिव प्रसाद पारदी कहते हैं कि मैने जब कपिल शर्मा के शो में सूर्यभान को जीभ से पेंटिंग करते देखा तो मेरा सीना गर्व से भर गया। मुझे याद है कैसे बालाघाट के आदिवासी गांव से निकल कर कितनी मुश्किलों से इस मुकाम तक पहुंचा है। वो पढ़ाई में भी बहुत तेज था। अपनी क्लास का सबसे होनहार विद्यार्थी था। पढ़ाई, खेलकूद से लेकर आर्ट सब में वो हिस्सा लेता था।
सूर्यभान के पिता संतराम मरावी, माता प्रेमवती मरावी बालाघाट में रहते हैं। इसलिए सूर्या उन्हें मिस करते हैं।