खुलासा: नवी मुंबई के व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर नवंबर 2024 में ट्रांसफर कराई गई थी रकम – Bhopal News

खुलासा:  नवी मुंबई के व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट कर नवंबर 2024 में ट्रांसफर कराई गई थी रकम – Bhopal News



ट्रेडिंग फ्रॉड…खाते में मिले डिजिटल अरेस्ट के 1.88 करोड़

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जनवरी में ठगी की रकम रैनेट कंपनी के खाते में ट्रांसफर हुई

ट्रेडिंग के नाम पर देशभर में हजारों लोगों से ठगी करने वाले गैंग के एक बैंक खाते में डिजिटल अरेस्ट के 1.88 करोड़ रुपए भी ट्रांसफर हुए हैं। ये खाता ठगों की कंपनी रैनेट के नाम से दर्ज है। आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की तकनीकी जांच में हुए इस बड़े खुलासे ने मप्र स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के भी होश उड़ा दिए हैं।

हैरानी इसलिए भी है, क्योंकि अब तक एसटीएफ इस मामले में केवल निवेश के नाम पर की गई ठगी की ही जांच कर रही थी। तकनीकी पड़ताल में ये खुलास भी हुआ है कि रैनेट के खाते में 52 ऐसे ट्रांजेक्शन भी हुए हैं, जिन्हें मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स (एमएचए) ने ब्लॉक करवाया है। एमएचए ऐसा तभी करता है, जब कोई अपने साथ हुई ठगी की शिकायत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करता है। अब एसटीएफ ने इस मामले में साइबर क्राइम के एंगल से भी तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

नवी मुंबई पुलिस से संपर्क

स्पेशल डीजी एसटीएफ पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपियों के बैंक खाते में आई डिजिटल अरेस्ट की रकम नवी मुंबई में रहने वाले एक व्यक्ति से ट्रांसफर करवाई गई थी। साइबर अपराधियों ने उन्हें नवंबर 2024 में डिजिटल अरेस्ट किया था। हालांकि, रैनेट कंपनी के बैंक खाते में ये रकम कई दूसरे बैंक खातों से होती हुई जनवरी 2025 में लैंड हुई है।

एसटीएफ अब इन सभी बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। एसटीएफ ने नवी मुंबई की साइबर पुलिस से भी संपर्क कर डिजिटल अरेस्ट से जुड़े केस की जानकारी मांगी है। ताकि एसटीएफ आगे की विवेचना में इस बिंदु को भी पूरी तरह शामिल कर सके।

दुबई में छिपा है मास्टरमाइंड

बता दें कि एसटीएफ ने बीती 20 जून को ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले दो आरोपियों दीपक शर्मा और मदन मोहन कुमार को गिरफ्तार किया था। इस गिरोह के मास्टर माइंड के दुबई में छिपे होने के इनपुट एसटीएफ को मिले हैं। टीम जल्द ही उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कराने की तैयारी में है।

यह गिरोह निवेशकों को निवेश की गई रकम पर सालभर में 72% तक ब्याज देने का दावा करता था। कंपनी के एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर पर निवेशकों को अपनी प्रोफाइल देखने पर फायदे के तौर पर बढ़ी हुई रकम ही नजर आती थी, जबकि असल में ऐसा नहीं होता था।

देश में और भी जगह है ठगी का इंटरनेशनल नेटवर्क, यहीं पर लैंड होते हैं फर्जी कॉल

देश के कई हिस्सों में ठगी के इंटरनेशनल नेटवर्क संचालित किए जा रहे हैं। इन ठिकानों पर भी सिम बॉक्स का ठीक वैसा ही सेटअप लगाया गया है, जैसा महाराष्ट्र से पकड़े गए इंजीनियर ऋषिकेश उर्फ ऋषभ हसूरकर ने अपने फ्लैट में लगाया था। ठगी के इन नए इंटरनेशनल नेटवर्क की तलाश में पन्ना पुलिस के अलावा राज्य साइबर पुलिस और इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) भी जुट गई है।

पूरा नेटवर्क टेलिकम्युनिकेशन से जुड़ा है, इसलिए जांच में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डीओटी) भी इन तीनों एजेंसी का पूरा साथ दे रहा है। अब तक की तकनीकी पड़ताल में पुलिस को हजारों ऐसे मोबाइल नंबर मिले हैं, जिन्हें ऋषिकेश के पास मिले सिम बॉक्स पर विदेशी नेटवर्क की मदद से लैंड करवाया गया है।

फिर इन्हीं सिम बॉक्स की मदद से उन्हें भारतीय साधारण कॉल में तब्दील कर दिया गया। पुलिस का मानना है कि पकड़े गए इंजीनियर की तरह भारत में दूसरे सेटअप को संचालित करने वाले जालसाज भी थाईलैंड-कंबोडिया के ‘बॉस’ जैसे लोगों से जुड़े हैं।

इस बीच पन्ना पुलिस ने आरोपी इंजीनियर के बैंक खातों की स्क्रूटनी शुरू कर दी है। इसमें लाखों के ट्रांजेक्शन नजर आ रहे हैं। इसके अलावा पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जिनकी मदद से इंजीनियर ने हजारों की संख्या में सिमकार्ड खरीदे थे।

संपत्ति होगी राजसात पन्ना एसपी साईं कृष्णा थोटा का कहना है कि आरोपी इंजीनियर ऋषिकेश के घर पर बीएमडब्ल्यू समेत तीन लग्जरी गाड़ियां मिली हैं। संपत्ति का ब्यौरा जुटाने के बाद आरोपी की संपत्ति को राजसात करने की कार्रवाई भी की जाएगी।



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