अंबेडकर स्मारक पर सियासी शतरंज, दलित वोटबैंक को लेकर BJP-Congress आमने-सामने

अंबेडकर स्मारक पर सियासी शतरंज, दलित वोटबैंक को लेकर BJP-Congress आमने-सामने


Last Updated:

MP Politics : ग्वालियर के जौरासी में बन रहे डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक के दूसरे चरण के भूमिपूजन ने सियासी ताप बढ़ा दिया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा और सिंधिया-तोमर की संभावित भागीदारी को कांग्रेस ने दलित …और पढ़ें

बाबा साहब अंबेडकर को लेकर भाजपा ओर कांग्रेस में ठन गई है.

हाइलाइट्स

  • अंबेडकर स्‍मारक ने सियासी हलचल बढ़ा दी
  • सीएम मोहन यादव की घोषणाओं पर घमासान
  • वोट बैंक पर कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्‍कर

ग्वालियर के जौरासी इलाके में बन रहे “डॉ. भीमराव अंबेडकर धाम” को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में इस धाम के दूसरे चरण के भूमिपूजन की घोषणा की है. यह कार्यक्रम तब और खास हो गया जब इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर की संभावित भागीदारी की चर्चा सामने आई. भाजपा इसे “सामाजिक समरसता” का प्रतीक बता रही है, लेकिन कांग्रेस इसे भाजपा की ‘चुनावी आइडेंटिटी पॉलिटिक्स’ करार दे रही है.राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो स्मारकों की राजनीति केवल प्रतीकात्मक नहीं रह गई, यह अब जनता के मानस को प्रभावित करने और पहचान की राजनीति का अहम हथियार बन गई है.

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि भाजपा चुनावों के वक्त दलित प्रतीकों और बाबासाहब के नाम का राजनीतिक दोहन करती है, लेकिन सामाजिक न्याय और हक की जमीन पर वह चुप रहती है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया है कि ग्वालियर में बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति लगाने में भाजपा सरकार को आखिर क्या दिक्कत है? उन्होंने स्मारक स्थल की राजनीति को ‘आस्था नहीं, अवसरवाद’ बताया है. गौरतलब है कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा और बाबासाहब के विचारों के प्रचार के लिए ‘संविधान यात्रा’ चलाई थी, जो राज्यभर में निकाली गई. कांग्रेस का कहना है कि यह यात्रा उनके मूल्यों और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास था, जबकि भाजपा अब स्मारकों के जरिए चुनावी लाभ लेने में जुटी है.

स्मारक नहीं, चेतना केंद्र बना रहे
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने भाषण में कहा कि “बाबा साहब का जीवन केवल एक वर्ग या समाज के लिए नहीं, पूरे भारत के लिए प्रेरणा है. हम उनके विचारों को जीवन में उतारने के लिए स्मारक नहीं, चेतना केंद्र बना रहे हैं.” भाजपा नेताओं का तर्क है कि कांग्रेस ने दशकों तक दलित समाज को केवल वोटबैंक समझा, जबकि भाजपा सामाजिक समरसता की बात कर रही है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को दलित वोटों की राजनीति के चश्मे से भी देखा जा रहा है. मध्यप्रदेश में 2023 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को दलित बहुल सीटों पर चुनौती मिली थी, वहीं कांग्रेस भी इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है. ऐसे में अंबेडकर स्मारक की सियासत चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बनती दिख रही है.

Sumit verma

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें

सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्‍थानों में सजग जिम्‍मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प… और पढ़ें

homemadhya-pradesh

अंबेडकर स्मारक पर सियासी शतरंज, दलित वोटबैंक को लेकर BJP-Congress आमने-सामने



Source link