गोह, गोहटा, विषखोपड़ा…ये तीनों अलग हैं? किसके काटने के बाद पलटकर पेशाब करने से होती है मौत? खुल गया राज

गोह, गोहटा, विषखोपड़ा…ये तीनों अलग हैं? किसके काटने के बाद पलटकर पेशाब करने से होती है मौत? खुल गया राज


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Monitor Lizard: विंध्य ही नहीं, देश के कई राज्यों में गोह, गोहटा या विषखोपड़ा नाम से पहचाने जाने वाले इस जीव को लेकर कई भ्रम हैं. कई कहावते भी हैं.

हाइलाइट्स

  • गोहटा के काटने से मौत का भ्रम मिथक
  • गोहटा विषैला नहीं होता, पर संक्रमण का खतरा
  • मानसून में कीड़े-मकोड़े की तलाश में घरों में आते हैं

Satna News: विंध्य क्षेत्र में गोह, गोहटा या विषखोपड़ा जैसे नामों से जाने जाने वाला ये जीव, ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से दहशत का कारण बना हुआ है. वर्षों से कहा जाता रहा है कि यदि यह जीव किसी इंसान को काटे और पलटकर पेशाब कर दे तो उस इंसान की मौत निश्चित है. यह बात सुनने में जितनी डरावनी लगती है, हकीकत में उससे उलट है. दरअसल, इस बड़ी छिपकली को मॉनिटर लिजर्ड कहा जाता है, जो मानसून सीजन में खासकर दिखाई देती है.

विशेषज्ञों ने बताया सच्चाई
सतना के सर्पमित्र विवेक तिवारी ने बताया, गोहटा यानी मॉनिटर लिजार्ड वास्तव में जहरीला जीव नहीं होता. हां, इसके काटने से संक्रमण हो सकता है. क्योंकि, यह कीड़े-मकोड़े और छोटे जीवों का शिकार करता है. जिनके कारण इसके मुंह में बैक्टीरिया पनप सकते हैं. इसलिए यदि किसी को ये काट ले तो घबराने की जगह टिटनस टॉक्सॉइड और एमिटासिलिन का इंजेक्शन जरूर लेना चाहिए. इससे संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा.

कहां से फैला भ्रम?
यह भी कहा जाता है कि गोहटा काट कर उल्टा पलट कर पेशाब करता है तो उस इंसान की मौत हो जाती है. जबकि, विज्ञान और तथ्य इसके पूरी तरह खिलाफ हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि गोहटा के काटने से मौत की यह भ्रांति वर्षों पुराने सपेरों और लोक कथाओं का फैलाया गया भ्रम है. सपेरे इस तरह की कहानियां बनाकर लोगों में डर पैदा करते थे, ताकि उनका व्यापार चलता रहे और लोग उनसे डरकर दूर रहें.

नाम से जुड़ी दिलचस्प जानकारी
गोह की पहचान भी अक्सर भ्रमित करती है. जब यह छोटा होता है तो इसे लोग विषखोपड़ा कहते हैं. थोड़ा बड़ा होने पर इसे गोहटा और फिर पूरी तरह बड़ा होने पर गोह कहा जाता है. आज भी कई लोग इन तीनों को अलग-अलग जीव मानते हैं, जबकि यह एक ही प्रजाति के विभिन्न विकास चरण हैं.

क्यों आते हैं घरों में?
जुलाई से सितंबर के बीच अक्सर इनकी गतिविधि अधिक देखी जाती है. बरसात के कारण जब जमीन पर पानी भर जाता है तब यह जीव कीड़े, मकोड़े और चूहों की तलाश में घरों की ओर चले आते हैं. विंध्य क्षेत्र में गोह का आकार 4 इंच से लेकर 4 फीट तक देखा गया है जबकि विदेशों में यह और भी बड़ा होता है जिसे मॉन्स्टर लिजार्ड भी कहा जाता है.

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