भोपाल की चिलचिलाती दोपहर, गांधी मेडिकल कॉलेज की ऊंची दीवारें और हॉस्टल के एक कमरे में बिस्तर से जुड़ी एक रहस्यमयी कहानी। मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार बात एक ऐसे केस की, जिससे एक मेडिकल छात्र की जिंदगी अचानक पलट गई। उसका नाम था चंद्रेश मर्सकोले
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एक युवती की लाश पचमढ़ी के जंगलों में सड़ी-गली हालत में मिली, वह कोई अनजान चेहरा नहीं थी। वह थी श्रुति हिल, जो कथित रूप से चंद्रेश की प्रेमिका थी। बिस्तर में लिपटी लाश, कार की डिग्गी में रहस्यमयी गंध और ड्राइवर की हड़बड़ाहट ने जैसे चंद्रेश की जिंदगी को एक झटके में तहस-नहस कर दिया, लेकिन सवाल यही था। क्या प्रेमी कातिल था? या फिर वो खुद भी एक बड़ी साजिश का हिस्सा बना दिया गया।
कार मांगकर ले गया था चंद्रेश 18 सितंबर 2008 को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज से श्रुति हिल अचानक गायब हो गई। कोई नहीं जानता था कि वह कहां गई। श्रुति के बारे में दो दिन तक किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
उन्होंने पुलिस से कहा कि उनकी कार किसी अपराध में इस्तेमाल हुई है। साथ ही बताया कि कार को 19 सितंबर को मेडिकल स्टूडेंट चंद्रेश मर्सकोले लेकर गया था। पहले उन्होंने मना कर दिया था, लेकिन बाद में जब चंद्रेश ने जोर दिया तो उन्होंने उसे गाड़ी दे दी।
डॉ. वर्मा ने शिकायत में ये भी कहा कि चंद्रेश काफी समय से पचमढ़ी की लड़की श्रुति के साथ रिलेशनशिप में था, जो उससे मिलने बॉयज हॉस्टल में आती थी। वह अक्सर हॉस्टल में ही ठहर जाती थी।
मां की तबीयत का हवाला देकर मांगी गाड़ी डॉ. वर्मा ने कहा- चंद्रेश ने कार मां की तबीयत खराब होने का हवाला देकर ली थी। जब कार लौटाई तो उसमें कुछ अजीब गंध थी। उन्होंने यह भी बताया कि कार में गया उनका ड्राइवर राम प्रसाद कुछ परेशान था।
ड्राइवर राम प्रसाद ने डॉ. वर्मा को बताया कि 19 सितंबर की सुबह स्टूडेंट चंद्रेश ने फोन किया और हॉस्टल पहुंचने के लिए कहा था। इसके बाद सुबह लगभग 11.45 बजे उसकी चंद्रेश से मुलाकात हुई।

दोपहर करीब 12.10 बजे जब गाड़ी बुधनी घाट पहुंची तो चंद्रेश ने गाड़ी को पचमढ़ी की ओर ले जाने को कहा। पचमढ़ी के रास्ते में वे पिपरिया में रुके और चाय पी। जब गाड़ी ‘देनवा दर्शन मजहर’ के पास पहुंची तो चंद्रेश ने गाड़ी रोकने को कहा। उस समय करीब 4.45 बजे थे।
ड्राइवर ने बताया कि वह शौच के लिए गाड़ी से करीब ढाई सौ फीट दूर गया था, तभी उसने अचानक धमाके की आवाज सुनी और गाड़ी की ओर दौड़ा। देखा तो गाड़ी की डिग्गी खुली हुई थी और बिस्तर गायब था। ड्राइवर रामप्रसाद ने आगे बताया कि उसने चंद्रेश को खाई से ठीक पहले रेलिंग के पास खड़ा देखा था। उसके बाद चंद्रेश लौटा और पचमढ़ी की ओर बढ़ने को कहा।
चंद्रेश ने कहा- जिस काम के लिए आया, नहीं हो सका ड्राइवर ने बताया कि पचमढ़ी में नंदन ढाबा चौराहे पर चंद्रेश एक लड़के से बात करने के लिए गाड़ी से उतरा था। चंद्रेश और उस लड़के के बीच एक मिनट तक बातचीत हुई। उसके बाद चंद्रेश गाड़ी के पास आया और उससे कहा कि जिस काम के लिए वो पचमढ़ी आया था, वह काम नहीं हो सका। फिर वापस भोपाल चलने के लिए कहा। रात करीब 10 बजे तक वे भोपाल लौट आए।

डॉ. हेमंत वर्मा ने राम प्रसाद से कहा कि वह पिछले दिन की घटनाओं के बारे में किसी को न बताए। वे खुद इस बारे में पुलिस को सूचित करेंगे।
डॉ. वर्मा ने पुलिस से अंदेशा जताया कि चंद्रेश ने कथित गर्लफ्रेंड की हत्या की और बचने के लिए शव को बिस्तर में लपेटकर पचमढ़ी की खाई में फेंक दिया है।
युवती की लाश मिली और केस में आया मोड़ इसी बीच भोपाल से करीब 180 किलोमीटर दूर पचमढ़ी में 22 सितंबर को एक शव मिलने की खबर आई। युवती की लाश, बुरी तरह सड़ी-गली, एक बिस्तर में लिपटी हुई थी। शव की हालत ऐसी थी कि पहचान मुश्किल थी, लेकिन शव के पास एक मंगलसूत्र और पुराने कपड़े थे, जिससे अंदाज लगाया गया कि यह श्रुति हो सकती है। पूरी संभावना थी कि श्रुति की हत्या से पहले चंद्रेश ने उससे शादी कर ली थी।
पुलिस तुरंत सक्रिय हो गई। जांच अधिकारी आरआर साहू ने मामले में चंद्रेश मर्सकोले को मुख्य संदिग्ध मानकर पूछताछ शुरू की, लेकिन यहीं से यह केस एक सामान्य हत्या से कुछ और बन गया।

चंद्रेश को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उसे हिरासत में रखा गया और पूछताछ की गई। 25 सितंबर को औपचारिक तौर पर उसकी गिरफ्तारी दिखाई गई। उस पर श्रुति ही हत्या और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए। पुलिस ने दावा किया कि चंद्रेश मर्सकोले ने गर्लफ्रेंड की हत्या करना स्वीकार कर लिया है।
सजा पर हाई कोर्ट में अपील, तब खुले साजिश के धागे पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश कर दिया। इसके बाद 31 जुलाई 2009 को चंद्रेश को श्रुति की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई। चंद्रेश को सजा हो गई तो हर किसी को लगा कि हत्यारा यही है, जो पकड़ा गया।
सजा के खिलाफ आरोपी चंद्रेश ने हाई कोर्ट में अपील की। सुनवाई शुरू हुई। चंद्रेश के वकील की तरफ से कोर्ट के सामने तर्क रखे गए, जिससे मामले ने अलग ही मोड़ ले लिया। जैसे-जैसे ट्रायल चला, साजिश के धागे खुलने लगे।

हाई काेर्ट में गवाहों के बयान से उलझ गया मामला हाई कोर्ट को बताया गया कि घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। ड्राइवर राम प्रसाद और डॉ. वर्मा ही मुख्य गवाह थे, लेकिन दोनों की गवाही में कई विरोधाभास थे।
राम प्रसाद ने कहा कि उसने बिस्तर को छुआ तक नहीं, लेकिन फिर भी उसने बिस्तर को भारी बता दिया। कोर्ट ने गवाह राम प्रसाद से पूछा कि अगर बिस्तर छुआ नहीं, तो भारी होने की जानकारी कैसे मिली?
उधर डॉ. वर्मा का कहना था कि ड्राइवर ने बताया कि चंद्रेश ने बिस्तर को खींचते हुए कार में रखा। कोर्ट ने पूछा कि टोल बूथ की रसीद में चार लोगों के होने का जिक्र है जबकि राम प्रसाद ने सिर्फ खुद और चंद्रेश का ही उल्लेख किया था। बाकी दो लोग कौन थे?
डॉ. वर्मा ने 19 सितंबर को खुद इंदौर जाने की बात कही, लेकिन उन्होंने फिर भी कार चंद्रेश को दे दी। कोर्ट ने पूछा कि अगर वे यात्रा पर थे तो कार क्यों दी गई?

चंद्रेश को पुलिस ने श्रुति की हत्या में गिरफ्तार कर लिया था।
कोर्ट ने पुलिस के रवैये पर की कड़ी टिप्पणी शक की सुई अब कई दिशाओं में घूम रही थी। सबसे अहम सवाल था- क्या चंद्रेश मर्सकोले और श्रुति हिल के बीच कोई अंतरंग रिश्ता था? श्रुति के अंडर गारमेंट पर स्पर्म के निशान थे। ये इसी बात की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने डीएनए टेस्ट नहीं करवाया। न नमूना सुरक्षित किया गया, न रिपोर्ट की पुष्टि हुई।
हाई कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी की, ‘अगर डीएनए चंद्रेश मर्सकोले से मेल खाता तो रिश्ते की पुष्टि होती। और अगर नहीं, तो ये केस किसी और दिशा में जाता लेकिन पुलिस ने वो दरवाजा ही बंद कर दिया।’
अब कई सवाल थे और उनके जवाबों की तलाश भी, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं था।
क्राइम फाइल्स के पार्ट 2 में जानिए इन सवालों के जवाब
– श्रुति हिल कौन थी?
– क्या वाकई चंद्रेश मर्सकोले ने उसकी हत्या की थी?
– क्यों केस में पुलिस की साख भी फंस गई ?
– श्रुति को आखिर किसने मारा और क्यों?
-हाईकोर्ट का वह फैसला, जिसने 13 साल बाद सब कुछ बदल दिया।
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