नई दिल्ली. एप्पल को कई प्रमुख ऑटोमोबाइल निर्माताओं से कारप्ले अल्ट्रा सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल को लेकर विरोध का सामना करना पड़ा है. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, ऑटोमोबाइल निर्माता एप्पल को इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर या ऑल-डिजिटल डैशबोर्ड फंक्शंस का पूरा एक्सेस नहीं देना चाहते. शुरुआत में, कार निर्माता कारप्ले अल्ट्रा को अपग्रेड करने के लिए एक्साइडेट थे, लेकिन मर्सिडीज-बेंज, ऑडी, वोल्वो कार्स, पोलस्टार और रेनो ने इसे ठुकरा दिया है. दूसरी ओर, एप्पल ने अपने एनुअल डेवलपर कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि नया कारप्ले अल्ट्रा सिस्टम सभी ड्राइवर डिस्प्ले पर एक ईजी इंटरफेस ऑफर करता है. एस्टन मार्टिन पहला ब्रांड था जिसे कारप्ले अल्ट्रा से लैस किया गया था.
2022 के वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस में पेश किया गया, एप्पल कारप्ले अल्ट्रा को ‘नेक्स्ट-जनरेशन’ इन-कार फीचर के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो वाहन डैशबोर्ड इंटीग्रेशन में क्रांति ला रहा है. कारप्ले अल्ट्रा कार के डिस्प्ले को नियंत्रित और एकीकृत करता है, जिसमें इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी शामिल है, जो स्पीड, फ्यूल, तापमान और अन्य के लिए कस्टमाइज़ेबल डिस्प्ले प्रदान करता है. ड्राइवर अपने आईफोन से जानकारी जैसे मैप्स और म्यूजिक को कार डेटा जैसे ड्राइवर असिस्टेंस अलर्ट और टायर प्रेशर के साथ ड्राइवर के कंसोल में देख सकते हैं.
वोल्वो और ऑडी का इनकार
वोल्वो कार्स और ऑडी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि उनके पास कारप्ले अल्ट्रा का उपयोग करने की कोई योजना नहीं है. वोल्वो कार्स के मुख्य कार्यकारी हाकन सैमुअलसन ने कहा कि कार निर्माताओं को सॉफ्टवेयर के मामले में टेक्नोलॉजी कंपनियों से कॉम्पटिशन नहीं करनी चाहिए. “ऐसे अन्य लोग हैं जो इसे बेहतर कर सकते हैं, और फिर हमें इसे अपनी कारों में पेश करना चाहिए,” उन्होंने कहा.
कस्टमाइज़्ड और ईजी डिजिटल एक्सपीरिएंस
दूसरी ओर, ऑडी ने कहा कि वह ड्राइवरों को “एक कस्टमाइज़्ड और ईजी डिजिटल एक्सपीरिएंस” ऑफर करने पर ध्यान दे रही रही है. रिपोर्ट के अनुसार, पोर्श, हुंडई, किया और जेनेसिस एप्पल कारप्ले अल्ट्रा को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि जगुआर लैंड रोवर ने कहा कि वह सिस्टम का मूल्यांकन जारी रखेगा. विरोध के बावजूद, एप्पल अप्रभावित लगता है, फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार. कंपनी का मानना है कि एक बार जब उपभोक्ता कारप्ले अल्ट्रा का अनुभव करेंगे, तो मांग बढ़ेगी, जिससे ऑटो निर्माताओं पर इसे अपनाने का दबाव पड़ेगा. आने वाले वर्षों में यह कैसे सामने आता है, यह देखना बाकी है.