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Saavan 2025: सावन मास हरियाली का प्रतीक है. इस महीने शिव की कृपा बरसती है. इसके चलते महिलाएं सावन में हरे रंग की चूड़ियां और अन्य श्रृंगार करती है. इसके पीछे का क्या रहस्य है आइए जानते है.
हाइलाइट्स
- सावन में हरी चूड़ियां पहनना पुरानी परंपरा है.
- हरे रंग का महत्व बुध ग्रह से जुड़ा है.
- भगवान शिव को हरे रंग की चीजें प्रिय होती हैं.
शुभम मरमट / उज्जैन. हिन्दू धर्म में श्रावण माह भगवान भोलेनाथ को समर्पित है. श्रावण मास को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है. भगवान शिव को समर्पित यह महीना भक्ति, तपस्या और श्रद्धा का प्रतीक होता है, यह माह भगवान शिव शंकर की भक्तों पर कृपा बरसती है. इस दौरान प्रकृति चारों ओर हरियाली से सराबोर रहती है. सुहागिन महिलाओं द्वारा सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा बहुत पुरानी है और इसके पीछे कई धार्मिक, ज्योतिषीय महत्व है. आइए उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं इसका महत्व.
क्यों पहनते है कांच की चूड़ियां
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई प्रकार के जतन के साथ कई तरह के उपाय भी करता है. इस पवित्र महीने में हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. बता दें कि, कांच की चूड़ियां पहनने से उनसे आने वाली आवाज से आसपास की निगेटिविटी समाप्त होती है और नई ऊर्जा का संचार होने लगता है.
हरे रंग के पीछे कई रहस्य हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हरे रंग का महत्व बुध से जुड़ा हुआ है. यह हरियाली का प्रतिक है. हरे रंग के वस्त्र धारण करने से बुध प्रसन्न रहता है तथा वाणी को नियंत्रण में रखता है. यही कारण है कि सुहागिन स्त्रियां सावन मास में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हरे रंग की चुड़ियां व हरे कपड़े पहनती हैं.
प्रकृति और शिव का संबंध
भगवान शिव और प्रकृति के बीच गहरा संबंध होता है. क्योंकि भगवान शिव ऐसे देव हैं, जिन्हें प्रकृति से जुड़ी चीजें अधिक प्रिय होती हैं. महादेव का वास भी प्रकृति की गोद हिमालय में होता है और उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी चीजें अर्पित की जाती है, जो हरे रंग की होती है. इसलिए सावन में हरे रंग का विशेष महत्व होता है.