ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के नाम पर की गई बॉन्ड डॉक्टरों की पोस्टिंग योजना सवालों के घेरे में आ गई है। दावा था कि पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों को बॉन्ड के तहत गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में तैनात किया जाएगा। लेकिन अधिकांश डॉ
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स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2021 बैच के 2000 बॉन्डेड डॉक्टरों में से 634 को सीधे जिला अस्पतालों में तैनात कर दिया गया। पीएचसी जैसे प्राथमिक केंद्रों में महज 367 डॉक्टर ही भेजे गए। भोपाल के जेपी अस्पताल में ही 11 बॉन्डेड डॉक्टरों की नियुक्ति कर दी गई। इससे जिला अस्पताल ओवरलोड हो गए हैं।
नोटशीट की भी अनदेखी : डिप्टी सीएम डॉ. राजेंद्र शुक्ला ने 2 जून को 36 डॉक्टरों के ट्रांसफर के लिए प्रमुख सचिव और आयुक्त को नोटशीट भेजी थी। डॉ. रितेश तंवर, डॉ. रमेश चंद्र, मनीष सिंह, आनंद गुप्ता और संगीता गोयल जैसे डॉक्टरों के नाम इसमें शामिल थे। लेकिन सूची जारी हुई तो इनमें से किसी का नाम तक नहीं था।
₹59,000 मानदेय, सिर्फ दो छुट्टियों की सुविधा: बांडेड डॉक्टरों को ₹59,000 मासिक मानदेय मिलेगा। उन्हें एक माह की सामान्य छुट्टी और मातृत्व अवकाश दिया जाएगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार की छुट्टी स्वीकृत नहीं होगी। राजधानी में सेवा दे रहे ‘गांव के डॉक्टर’ : जिन डॉक्टरों को गांव में पोस्ट होना था, उनमें से कई की तैनाती राजधानी के अस्पतालों में कर दी गई।
इनमें से जिला अस्पताल, भोपाल में डॉ. अभिषेक पासेरकर, डॉ. नुंगशितो, डॉ. इमलीमेनबा वॉलिंग, डॉ. करनवीर सिंह, डॉ. एमी शैलेषकुमार व्यास तैनात हैं। वहीं, सीहोर में डॉ. दिव्या दीक्षित, बेटमा (इंदौर) में डॉ. मयंक मोहन मिश्रा: सीएचसी, सीएचसी पीथमपुर (धार) में डॉ. प्राक्रति भुटा:, सीएचसी, जतारा (टीकमगढ़) में डॉ. कीर्ति हारदासानी, सीएचसी, गोहद (भिंड) में डॉ. उत्कर्षा जैन, सीएचसी, सांवेर (इंदौर) में डॉ. थोराट कृतिका, सीएचसी, खातेगांव (देवास) में डॉ. सुमिता चतुर्वेदी जैसे कई डॉक्टरों की भी सीएचसी/जिला अस्पतालों में नियुक्ति की गई है।
बॉन्ड योजना बनी ‘शहरी सेवा योजना’
कागजों में योजना ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार की थी, लेकिन उपयोग शहरी जरूरतों के हिसाब से कर लिया गया। सबसे ज्यादा डॉक्टर उन्हीं जगहों पर बैठा दिए गए जहां पहले से संसाधन उपलब्ध हैं। जिन सिविल सर्जनों ने बार-बार डॉक्टरों की मांग की थी, उन्हें आज भी पोस्टिंग का इंतजार है।
आदेश के बावजूद ग्रामीण अस्पतालों में जॉइनिंग नहीं 27 जून को जारी आदेश में साफ कहा गया है कि सभी डॉक्टरों को 15 दिन में नियुक्ति स्थल पर जॉइन करना होगा, वरना यह बॉन्ड उल्लंघन माना जाएगा। फिर भी कई डॉक्टर जॉइनिंग नहीं कर रहे।
पीएचसी स्तर पर डॉक्टर कम हैं। नई मेडिकल शिक्षा नीति के बाद हालात सुधरेंगे। अभी 1500 डॉक्टरों को च्वाइस फिलिंग के आधार पर पोस्ट किया है। 400 का अपने स्तर से ट्रांसफर किया है। -नरेंद्र शिवाजी, राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग