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Agriculture News: उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ एसके त्यागी ने लोकल 18 से कहा कि मिर्च के पौधे अगर अचानक मुरझाने लगें, पत्तियां पीली पड़ जाएं और हल्के से खींचने पर पूरा पौधा जड़ सहित निकल आए, तो समझिए कि जड़ सड़न रोग …और पढ़ें
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार खेतों में पानी भराव, नमी वाली मिट्टी और जल निकासी की कमी मिर्च की जड़ों को कमजोर बना देती है. इससे फफूंद तेजी से पनपता है और पौधों की जड़ें गलने लगती हैं. इसके बाद पौधा धीरे-धीरे सूख जाता है और मर जाता है.
उन्होंने कहा कि उनकी सलाह है कि किसान भाई फसल को जड़ सड़न रोग से बचाने के लिए खेत में जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त रखें. ड्रिंकिंग के साथ ही 15 लीटर के पंप में एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा को 50 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर प्रति एकड़ खेत में मिट्टी में डालें. इससे जमीन पर फफूंद नियंत्रण में रहती है और फसल सुरक्षित रहती है.
दवा का भी करें उपयोग
जहां पौधों में बीमारी की शुरुआत दिखाई दे रही हो, वहां 30 ग्राम कार्बेन्डाजिम या मेन्कोजेब फफूंदनाशी का छिड़काव पौधों की जड़ों में ड्रिंकिंग से करें. यह सप्ताह में एक बार करें और लगातार दो से तीन बार दोहराएं. बीमारी बढ़ने पर प्रभावित पौधे को जड़ से उखाड़कर खेत से बाहर करें ताकि अन्य पौधों में संक्रमण न फैले.