सौरव गांगुली; कप्तान जिसने भारतीय टीम को जिगरा दिया, फिक्सिंग के दाग से उबारा और ICC ट्रॉफी…

सौरव गांगुली; कप्तान जिसने भारतीय टीम को जिगरा दिया, फिक्सिंग के दाग से उबारा और ICC ट्रॉफी…


नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट इतिहास में कई कप्तान आए और गए लेकिन जिसने टीम की तस्वीर बदली उसका नाम सौरव गांगुली है. कप्तान जिसने अपनी टीम को विरोधी की आंख में आंख डालकर लड़ना सिखाया. कप्तान जिसने साथी खिलाड़ी से कहा- डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूं. कोई शक नहीं कि सौरव गांगुली को बंगाल टाइगर कहा गया. क्रिकेट का ‘दादा’ सौरव गांगुली आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं और फैंस उनको भर-भरकर दुआएं दे रहे हैं.

सौरव गांगुली को पहली बार 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी सौंपी गई थी. यह वह दौर था जब भारतीय टीम फिक्सिंग के आरोपों से जूझ रही थी. 83 की विश्व विजेता होने के बावजूद कमजोर टीमों में गिनी जाती थी. विदेशों में जीत तो भारतीय टीम के लिए सपना हुआ करती थी. तभी गांगुली कप्तानी संभालते हैं और अपनी नेतृत्व क्षमता से भारतीय क्रिकेट का चेहरा ही बदल देते हैं. सौरव गांगुली को बंगाल टाइगर, दादा, प्रिंस ऑफ कोलकाता जैसे निकनेम से भी जाना जाता है.

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सौरव गांगुली की सबसे बड़ी खूबी खिलाड़ियों की परख और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कराना थी. कप्तान बनने के बाद सौरव गांगुली ने उन खिलाड़ियों को मौका दिया जिन्होंने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट की तस्वीर ही बदल दी. इनमें युवराज सिंह, मोहम्मद कैफ, हरभजन सिंह, जहीर खान, आशीष नेहरा, गौतम गंभीर, एमएस. धोनी और वीरेंद्र सहवाग जैसे नाम प्रमुख हैं. ये सभी खिलाड़ी आज भारतीय क्रिकेट के श्रेष्ठतम खिलाड़ियों में शुमार होते हैं. इनके पीछे गांगुली की पारखी नजर थी.

सौरव की कप्तानी में बेखौफ क्रिकेट
सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने बेखौफ क्रिकेट खेलना शुरू किया. इस वजह से टीम को टेस्ट और वनडे दोनों ही फॉर्मेट में बड़ी सफलता मिली. भारतीय टीम गांगुली की कप्तानी में साल 2000 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल खेली. फिर 2002 में श्रीलंका के साथ संयुक्त विजेता रही. साल 2003 में वनडे विश्व कप का फाइनल खेली, जिसमें ऑस्ट्रेलिया से उसे हार का सामना करना पड़ा. यह 1983 के बाद पहला मौका था जब भारतीय टीम वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची थी.

भारत ने विदेश में जीतना सीखा
सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने विदेश में जीतना सीखा. नेटवेस्ट ट्रॉफी (2002) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें भारत ने फाइनल में इंग्लैंड को उसकी धरती पर हराया. भारत ने टेस्ट में विदेश में अपना प्रभाव जमाना और जीतना गांगुली के दौर में ही सीखा. गांगुली 2005 तक कप्तान रहे. पांच साल के अपने कार्यकाल में फिक्सिंग के आरोपों का सामना करने वाली टीम को उन्होंने दुनिया की मजबूत क्रिकेट टीम बनाया. गांगुली ने धोनी को दिनेश कार्तिक पर प्राथमिकता दी थी. धोनी न सिर्फ भारत के सर्वश्रेष्ठ और सफलतम कप्तान बने बल्कि दुनिया के सफलतम विकेटकीपर बल्लेबाज भी बने. लेकिन इस खिलाड़ी के करियर की उड़ान गांगुली की कप्तानी में शुरू हुई थी.

विराट की जगह रोहित को कप्तान बनाया
सौरव गांगुली जब बीसीसीआई अध्यक्ष थे, तब विराट की जगह रोहित शर्मा को कप्तान बनाने का उन्होंने निर्णय लिया. इसका परिणाम हमें टी20 विश्व कप 2024 और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के खिताब के रूप में मिला. साल 2000 से 2005 के बीच बतौर कप्तान गांगुली ने भारत को 49 टेस्ट में 21 में जीत दिलाई, 13 टेस्ट में हार मिली, जबकि 5 ड्रॉ रहे. वहीं 147 वनडे में 76 में भारत जीता था.

सचिन-गांगुली की खतरनाक जोड़ी
8 जुलाई 1972 को कोलकाता में जन्मे सौरव गांगुली को बाएं हाथ के दुनिया के बेहतरीन बैटर्स में भी शुमार किया जाता है. गांगुली ने 113 टेस्ट में 16 शतक लगाते हुए 7212 रन बनाए. उन्होंने 311 वनडे में 22 शतक की मदद से 11,363 रन बनाए. सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली की जोड़ी दुनिया में बेहद खतरनाक मानी गई. इन दोनों ने 136 पारियों में 6609 रन बनाए. इसमें 21 शतकीय साझेदारी शामिल हैं.



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