मध्य प्रदेश का खंडवा शहर इन दिनों सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का अद्भुत संगम बन चुका है. गुरु पूर्णिमा के मौके पर यहां दादाजी धूनीवाले की समाधि पर दो दिन में करीब 6 से 7 लाख श्रद्धालु पहुंचे. खास बात ये रही कि इन लाखों भक्तों की सेवा के लिए पूरा शहर खुद ‘सेवाग्राम‘ बन गया.
गुरु पूर्णिमा से कुछ दिन पहले ही खंडवा पूरी तरह सज-धज कर तैयार हो गया था. हर चौराहे, हर गली, हर मंदिर के आसपास टेंट लगे हुए थे, जिनमें खाने-पीने से लेकर आराम करने तक की सुविधा थी. पूरा शहर तन-मन-धन से भक्तों की सेवा में जुटा रहा.
पाने वाले भी दादाजी, देने वाले भी दादाजी
भक्तों को न सिर्फ रोट और भस्म मिलती है, बल्कि पंचामृत से अभिषेक कर प्रसादी दी जाती है, जिसमें दूध, दही, शहद, गंगाजल और नर्मदा जल होता है.
गुरु पूर्णिमा से एक पूर्णिमा पहले से ही कई श्रद्धालु महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से निशान लेकर पैदल यात्रा पर निकल पड़ते हैं. रास्ते भर संकीर्तन करते हुए ये भक्त खंडवा पहुंचते हैं. ये कोई आम यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा की मिसाल होती है.
सेवा में आगे बढ़ते शहरवासी और संस्थाएं
नगर निगम, जिला प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं भी सफाई, ट्रैफिक, और पॉलीथिन रोकथाम जैसे कामों में दिन-रात लगे रहते हैं. टेंट और भोजन वितरण की तैयारी 1 महीने पहले ही शुरू हो जाती है.
गुरु पूर्णिमा पर जब बाकी जगहों पर सिर्फ पूजा-पाठ होता है, वहीं खंडवा में पूजा के साथ सेवा को भी धर्म माना जाता है. यहां हर व्यक्ति खुद को दादाजी का सेवक मानता है, और यही इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत है.