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Khargone Itai Baidi: बताते हैं कि इस जगह पर कभी एक समृद्ध बस्ती हुआ करती थी, जो अब ‘इटाई बैड़ी’ के नाम से प्रसिद्ध है. यहां की कहानियां आज भी लोगों को हैरान कर रही है.
हाइलाइट्स
- खरगोन की ‘इटाई बैड़ी’ में खजाना होने की मान्यता है
- सरकार ने ‘इटाई बैड़ी’ को संरक्षित स्मारक घोषित किया
- खजाने की खोज पर कानूनी रोक लगा दी गई है
यह पहाड़ी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रदेश सरकार द्वारा इसे संरक्षित स्मारक घोषित करने का कारण यहां मौजूद प्राचीन मकानों के अवशेष हैं, जो मुगल काल के समय के माने जाते हैं. इन मकानों की ईंटें सामान्य की तुलना में कहीं अधिक बड़ी हैं. दुर्लभ वास्तुकला का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं. यही कारण है कि इसे संरक्षित करने के उद्देश्य से इसके चारों ओर 300 मीटर की सीमा में खुदाई या निर्माण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है.
स्थानीय निवासी मनोज, विपिन बताते हैं कि इस जगह पर कभी एक समृद्ध बस्ती हुआ करती थी, जो अब ‘इटाई बैड़ी’ के नाम से प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि यहां के लोग दूध और घी लेकर मांडवगढ़ (मांडू) तक जाते थे. एक समय बाद किसी अज्ञात बीमारी के चलते यह क्षेत्र वीरान हो गया. तब से लोगों का मानना है कि इस जगह पर भारी मात्रा में धन गढ़ा हुआ है. धनतेरस और चौदस के दिन अपने आप दीए जलने की भी बातें कही जाती हैं, जिन्हें सिर्फ भाग्यशाली लोग ही देख पाते हैं.
जो गया, कभी लौटकर नहीं आया
कई लोगों ने खजाने की खोज में तांत्रिकों से संपर्क किया और रात के अंधेरे में तंत्र क्रियाएं करवाईं, लेकिन कोई सफल नहीं हो सका. कुछ साल पहले पाटीदार समाज के कुछ लोग खजाना ढूंढने गए थे, उनके साथ भी रहस्यमयी घटनाएं घटीं. बताया गया कि इस दौरान किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें रोक दिया. कई ऐसे भी हैं जो वहां से जिंदा लौटकर नहीं आए, जिससे इस स्थान के प्रति लोगों का डर और भी गहरा गया. बरहाल, खजाने का रहस्य आज भी एक रहस्य बना हुआ है.