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Jabalpur News: मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह एक तांत्रिक मंदिर है. यहां प्रतिष्ठित मूर्ति प्रकट हुई थी. मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में राजा संग्राम शाह ने भैरव मंदिर नाम से कराया था. इस मंदिर में हर मनोकाम…और पढ़ें
मंदिर की हकीकत जानने लोकल 18 की टीम मंदिर परिसर पहुंची. जहां सीढ़ियों से चढ़कर मंदिर तक पहुंचा जाता है. हैरान करने वाली बात यह थी कि हर भक्त के हाथ में नारियल, अगरबत्ती, तेल और नींबू था. गर्भगृह के अंदर जाने का मात्र एक छोटा सा दरवाजा था. जैसे ही हमने गर्भगृह के अंदर प्रवेश किया, वैसे ही ओम की आवाज गर्भगृह में गूंजने लगी. गर्भगृह धुएं की धुंध से दिखाई नहीं दे रहा था. लोग गर्भगृह में माला लेकर जा रहे थे. कुछ श्रद्धालु सिर के ऊपर से नींबू घुमा रहे थे जबकि कुछ तेल चढ़ा रहे थे, तो वहीं कुछ भक्ति में डूबे हुए थे.
पुजारी बोले- मूर्ति प्रकट हुई…तंत्र-मंत्र होता है
जब हमने मंदिर के पुजारी से बात की, तो उन्होंने बताया कि यह तांत्रिक मंदिर है. यहां स्थापित मूर्ति प्रकट हुई थी. इस मंदिर का निर्माण 15वीं शताब्दी में राजा संग्राम शाह ने भैरव मंदिर के नाम से कराया था. इस मंदिर में हर मनोकामना पूरी होती है. पुजारी ने भी स्वीकार किया कि इस मंदिर में तंत्र-मंत्र और जादू-टोना होता है. उन्होंने बताया कि यह पहले बहुत होता था. रात-रातभर पूजा चलती थी, सुबह कब हो जाती थी, पता ही नहीं चलता था. बड़ी संख्या में लोग आते थे लेकिन अब तंत्र साधना वाले लोग कम ही आते हैं.
श्रद्धालु संजय सिंह ने लोकल 18 को बताया कि वह करीब तीन साल से तांत्रिक मंदिर में आ रहे हैं और हर शनिवार आते हैं. भैरव बाबा के तांत्रिक मंदिर आने से यह फायदा होता है कि पहले मानसिक पीड़ा ऑफिस के दौरान बहुत होती थी लेकिन जब से मंदिर आने लगे हैं, तब से कष्ट का निवारण होने लगा है, इसलिए वह हर शनिवार को आकर तेल, तिल और नींबू चढ़ाते हैं.
मंगलवार और शनिवार को भारी भीड़
एक श्रद्धालु ने बताया कि इस मंदिर में आकर तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत, विद्या सब अलग हो जाती हैं. जितने भी भूत-प्रेत और काली शक्तियां लगी हुई होती हैं, वो दूर हो जाती हैं. मंगलवार और शनिवार को मंदिर में काफी भीड़ होती है. मंदिर आने से शनि और राहु से राहत मिलती है. राजा संग्राम शाह ने भैरव बाबा की उपासना की थी और इसी मंदिर में आते थे. यही कारण था कि उन्होंने अपने शासन में कोई भी युद्ध नहीं हारा था.
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