हाईकोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर बोले पूर्व चीफ जस्टिस: यह आंदोलन अब रुकेगा नहीं, हर हाईकोर्ट और जिला कोर्ट में लगेगी बाबा साहब की मूर्ति – Bhopal News

हाईकोर्ट में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर बोले पूर्व चीफ जस्टिस:  यह आंदोलन अब रुकेगा नहीं, हर हाईकोर्ट और जिला कोर्ट में लगेगी बाबा साहब की मूर्ति – Bhopal News


मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर पिछले 6 महीनों से लगातार विवाद चल रहा है। इस मुद्दे पर पहली बार भास्कर ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत से बात की। पूर्व मुख्य न्यायाध

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सवाल: हाईकोर्ट में बाबा साहब की प्रतिमा पर विवाद को कैसे देखते हैं? जवाब: यह विवाद कुछ फल लेकर आएगा। जो चंद लोग प्रतिमा का विरोध कर रहे हैं, मेजॉरिटी वहां चाहता है कि मूर्ति लगे। जो विरोध कर रहे हैं तो आप देखना कि यह केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर हाईकोर्ट और जिला कोर्ट में बाबा साहब की मूर्ति लगेगी। कोई रोक नहीं सकता, इसमें थोड़ा समय लगेगा।

क्योंकि जब कोई बवाल मचता है, तो उसके लिए थोड़ा सा आपको पुश करना पड़ेगा। वहां जो आंदोलन है, उसे तेज करना पड़ेगा। आंदोलन जारी रखना पड़ेगा, बीच में आपको छोड़ना नहीं है।

सवाल: आपको कहीं सरकार की चूक समझ में आती है? जवाब: नहीं, सरकार की चूक नहीं हैं। क्योंकि जब हमने सरकार के पास प्रस्ताव भेजा तो सरकार ने नो ऑब्जेक्शन दिया। एडवोकेट्स ने पैसा खर्च करके मूर्ति बनवाई। लगाने के लिए हमने परमिशन दी। क्योंकि, उसके लिए फाइनल ऑर्डर चीफ जस्टिस का होता है।

गवर्नर साहब ने 17 तारीख का समय दिया था, लेकिन बाद में व्यस्तता के कारण वे नहीं आ पाए। सरकार की तरफ से कोई वो नहीं है। अब यह मामला दोबारा कोर्ट में लगेगा, क्योंकि मुझे सूचना मिली है कि यह फुल कोर्ट में दोबारा चर्चा के लिए आएगा और उसके बाद मूर्ति स्थापित होगी।

भोपाल में रविवार को रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

सवाल: आप अपने कार्यकाल के दौरान सबसे महत्वपूर्ण फैसला कौन सा मानते हैं? जवाल: ​​​​​​सबसे महत्वपूर्ण फैसला मैं यह मानता हूं कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आज तक एससी, एसटी वर्ग का कोई जज नहीं बना। न सेवा से और न ही अधिवक्ता से। दो जज अधिवक्ताओं से बने। दो वकीलों के नाम जज के लिए कॉलेजियम ने अनुशंसित किए। चूंकि मैं हेड था और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी उन्हें मंजूरी दे दी। आने वाले समय में यहां पहली बार एससी, एसटी वर्ग के दो जज हाईकोर्ट में होंगे। दूसरा न्यायिक फैसला यह था कि भोपाल गैस त्रासदी के यूनियन कार्बाइड का 40 साल से दबा हुआ कचरा बंधा पड़ा था। मैंने वह खुलवाकर दबवा दिया और काम खत्म कर दिया।

सवाल: लोग कह रहे हैं आपको पॉलिटिक्स में आना चाहिए? जवाब: मैं पॉलिटिक्स में नहीं आ सकता। मैं पॉलिटिक्स के लिए फिट नहीं हूं। क्योंकि, पॉलिटिकल लोगों का जो बोलने का, वादा करने का, न निभाने का तरीका होता है। हम तो कहते हैं कि वादा वो करो जो निभा सको। हमारी वैसी ट्रेनिंग नहीं हैं, क्योंकि हम वकील रहे, जज रहे।

जब वकील थे और किसी का केस लिया, तो यह बोलते थे कि भाई, केस तेरा अच्छा है या ज्यादा खराब है, बाकी फैसला कोर्ट को करना है। अगर कोर्ट ठीक फैसला नहीं देती थी, तो अगली कोर्ट में चले जाते थे। मेरा एटीट्यूड राजनीति वाला नहीं है, जैसी आज की राजनीति है।

सवाल: चुनाव लड़ने के अलावा राज्यसभा, विधान परिषद जैसे उच्च सदन भी हैं?

जवाब: राष्ट्रपति महोदया की शक्ति है, अगर वे ज्यूरिस्ट के रूप में अनुशंसा करेंगी, क्योंकि हम ज्यूरिस्ट की कैटेगरी में आते हैं। उनका जो भी आदेश होगा, उसे सिर-माथे पर रखेंगे, उसके लिए मना नहीं करेंगे।

जानिए कौन हैं सुरेश कुमार कैत

  • न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के 28वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) रहे, जिन्होंने 25 सितंबर 2024 को शपथ ली और 23 मई 2025 को 62 वर्ष की आयु में रिटायर हुए।
  • जन्म: 24 मई 1963, को हरियाणा के कैथल जिले के काकौत गांव में जन्मे।
  • शिक्षा: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातक (Humanities) और स्नातकोत्तर (Political Science) दिल्ली विश्वविद्यालय, कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की।
  • 1989 में वकालत शुरू की केंद्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील (पैनल लॉयर/सीनियर काउंसिल) – UPSC, Indian Railways के लिए बने। केन्द्र सरकार के स्टेंडिंग कौंसिल 2004 में नियुक्त हुए।
  • 5 सितंबर 2008 को दिल्ली हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बने।
  • 12 अप्रैल 2013 को स्थायी न्यायाधीश बने और हैदराबाद हाईकोर्ट में 12 अप्रैल 2016 से 11 अक्टूबर 2018 तक रहे।
  • दिल्ली हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर 2018 को फिर ट्रांसफर होकर आए।

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पूर्व चीफ जस्टिस ने कॉलेजियम सिस्टम पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा- राज्य सरकार के डाटा के अनुसार प्रदेश में एसटी-एससी और बैकवर्ड क्लास 90 प्रतिशत से ऊपर हैं। लेकिन, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आज तक एसटी-एससी का एक भी जज न तो सर्विस से आया और न ही एडवोकेट जज बना। यह कॉलेजियम सिस्टम की बेईमानी है। पढ़िए पूरी खबर।



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