कई बार फिसलने से बच्चे घायल हो जाते हैं और कई बार स्कूल भी नहीं पहुंच पाते हैं।
जनपद पंचायत सिलवानी से सिर्फ 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत बटेर के अंतर्गत आदिवासी बहुल टोला बड़ा खेत आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। यहां के दर्जनों बच्चे और छात्राएं रोजाना दलदली, कीचड़ भरे रास्ते से फिसलते-पड़ते करीब तीन कि
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बड़ा खेत से खेरी स्कूल तक का करीब 3 किमी का कच्चा रास्ता बरसात में दलदल में बदल जाता है। बच्चों के कपड़े और किताबें कीचड़ से खराब हो जाती हैं। कई बार फिसलने से बच्चे घायल हो जाते हैं और कई बार स्कूल भी नहीं पहुंच पाते।
बच्चों ने वीडियो बनाकर लगाई मुख्यमंत्री से गुहार इन हालातों से परेशान होकर बच्चों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है। कीचड़ में फिसलते हुए बच्चों का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें छोटे बच्चे और छात्राएं सीएम मोहन यादव, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा और जनपद अधिकारियों से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं।
एक छात्रा वीडियो में कहती है, “हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन कीचड़ नहीं जाने देता। किताबें भीग जाती हैं, कपड़े गंदे हो जाते हैं। हमें स्कूल जाने के लिए पक्की सड़क चाहिए।”
बच्चे बारिश में रोजाना इसी तरह कीचड़ में सनकर स्कूल पहुंचते हैं।
आवेदन देने के बाद भी नहीं हुई सुनवाई ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत, जनपद और जिला स्तर पर कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सड़क की कमी बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर रही है।
बुनियादी सुविधाओं से वंचित बड़ा खेत शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी जरूरतें आज भी यहां अधूरी हैं। प्रशासनिक अनदेखी का नतीजा यह है कि बच्चों को शिक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। हर साल आदिवासियों के नाम पर योजनाएं और बजट बनते हैं, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं।