स्कूल-मदरसों ने फर्जी स्टूडेंट्स के नाम पर ली स्कॉलरशिप: एक ही बिल्डिंग में कागजों पर दो स्कूल; कहीं क्लिनिक, कहीं दुकानें चल रहीं – Madhya Pradesh News

स्कूल-मदरसों ने फर्जी स्टूडेंट्स के नाम पर ली स्कॉलरशिप:  एक ही बिल्डिंग में कागजों पर दो स्कूल; कहीं क्लिनिक, कहीं दुकानें चल रहीं – Madhya Pradesh News


भोपाल की आम वाली गली में ‘सिटी मॉन्टेसरी स्कूल’ का बोर्ड टंगा हुआ है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां कोई स्कूल संचालित ही नहीं हो रहा। बोर्ड सिर्फ दिखावा है। वहीं दूसरी ओर, बैरसिया रोड पर स्थित एक बहुमंजिला इमारत में दो स्कूल कागजों में एमजे कॉन्वेंट और स

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इस तरह की गड़बड़ी सिर्फ इन तीन स्कूलों तक सीमित नहीं है। क्राइम ब्रांच भोपाल ऐसे 40 से अधिक और प्रदेश भर में 104 स्कूल और मदरसों की जांच कर रही है जो स्कॉलरशिप के नाम पर फर्जी तरीके से पैसे ले रहे हैं।

सबसे पहले चार स्कूलों के हाल…

लोगों ने ना स्कूल देखें और न यहां बच्चे

सबसे पहले हम जहांगीराबाद की आम वाली गली के पास स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल की तलाश में गए, लेकिन वहां कोई स्कूल नहीं मिला। फिर कुछ ही दूरी पर अचानक हमें एक बोर्ड दिखाई दिया जिस पर ‘सिटी मॉन्टेसरी स्कूल’ लिखा था। यह बोर्ड एक गली के बाहर लगा हुआ था। हम उस गली के अंदर गए, लेकिन वहां भी कोई स्कूल नजर नहीं आया। हमने कुछ स्थानीय लोगों से पूछा, लेकिन ज्यादातर ने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया। हालांकि गली के बाहर एक पान की दुकान दिखी जो वर्षों से वहीं गली के बाहर लग रही है। दुकान के मालिक मुरशिद अहमद ने बताया कि उन्होंने कभी वहां ना कोई स्कूल देखे ना बच्चे। यह बोर्ड यहां पिछले दो सालों से लगा हुआ है। बाद में हमने बोर्ड पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।

11वीं-12वीं के बारे में पूछते ही स्कूल बंद

सेंट डिसूजा कॉन्वेंट स्कूल की बिल्डिंग दिखी। दसवीं कक्षा तक के टॉपर विद्यार्थियों के पोस्टर लगे नजर आए। स्कूल का पंजीयन नंबर और अन्य जानकारी भी उपलब्ध थी। जब हम स्कूल के अंदर गए तो एक महिला बैठी थी। हमने स्कूल के बारे में पूछा तो उसने कहा, ‘मुझे कुछ नहीं पता, प्रिंसिपल ही जानकारी देंगे। जब हमने पूछा कि प्रिंसिपल कहां हैं, तो उसने कहा कि वो यहां नहीं हैं। हमने उनका नंबर मांगा तो उसने एक नंबर दे दिया। जब हमने उस नंबर पर कॉल किया तो एक व्यक्ति आया और बोला, ‘मैं प्रिंसिपल नहीं हूं, वो लड़की डर गई थी इसलिए मेरा नंबर दे दिया। मैं तो बस यहां काम करता हूं।’

जब हमने उनसे पूछा कि स्कूल में कौन-कौन सी कक्षाएं संचालित होती हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, उस लड़की ने कहा कि यहां हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई होती है। जब हमने पूछा कि फिर 11वीं-12वीं के टॉपर्स के पोस्टर क्यों नहीं लगे हैं, तो उसने कहा, मुझे इस बारे में पता नहीं है। इसके बाद वह तुरंत उठकर स्कूल बंद करने लगी और वहां से चली गई।

एक ही इमारत में दो स्कूल, दोनों सिर्फ 10वीं तक

एमजे कॉन्वेंट स्कूल बैरसिया रोड पर डीआईजी बंगले के पास है। जब हम यहां पहुंचे तो देखा कि स्कूल एक तीन मंजिला इमारत में संचालित हो रहा है, लेकिन जो बात चौंकाने वाली थी, वो यह कि एक ही इमारत में दो स्कूल चल रहे हैं, एक एमजे कॉन्वेंट और दूसरा सेंट डिसूजा स्कूल। जब हम पहुंचे तब दोनों स्कूल बंद थे। हमने आसपास रहने वाले लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि इस स्कूल में रोजाना 200 से ज्यादा बच्चे आते हैं। जब हमने उनसे पूछा कि क्या हाई स्कूल के बच्चे भी यहां आते हैं, तो उन्होंने कहा कि यहां सिर्फ आसपास के छोटे बच्चे ही आते हैं और यह स्कूल यहां सिर्फ एक साल से ही है।

स्कूल की जगह क्लिनिक और दुकानें मिलीं

हम जहांगीराबाद स्थित लिली टॉकीज के पास एम्बरली हाउस स्कूल की तलाश में निकले। हमने यहां स्कूल को ढूंढ़ने की काफी कोशिश की और आसपास के इलाके में इसके बारे में कई लोगों से पूछा, लेकिन किसी को भी इस स्कूल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। फिर एक व्यक्ति ने बताया कि पहले यहां एम्बरली स्कूल हुआ करता था, लेकिन अब यहां कोई स्कूल नहीं है।जब हमने उससे स्कूल की सही लोकेशन दिखाने को कहा तो वह हमें वहां ले गया। वहां पहुंचने पर हमने देखा कि अब उस जगह पर बहुमंजिला इमारतें बनी हुई हैं, जिनमें एक छोटा क्लिनिक और अन्य दुकानें चल रही हैं, लेकिन एम्बरली स्कूल अब वहां मौजूद नहीं है।

छात्रवृत्ति हासिल करने की प्रक्रिया में कैसे किया फर्जीवाड़ा

– पहले स्टूडेंट आवश्यक दस्तावेजों के साथ छात्रवृत्ति के लिए स्कूल से आवेदन करता है। इसके बाद स्कूल उस आवेदन को एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आगे भेजता है। इसमें स्टूडेंट की लॉगिन आईडी और अन्य यूनीक दस्तावेज शामिल होते हैं।

– इसके बाद स्कूल इस आवेदन को जिला नोडल अधिकारी को भेजता है।

– जिला नोडल अधिकारी इस आवेदन को राज्य नोडल अधिकारी के पास भेजते हैं।

– इसके बाद यह आवेदन केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग को भेजा जाता है। वहां से 5700 रुपए की छात्रवृत्ति स्वीकार की जाती है और सीधे स्टूडेंट के खाते में आती है।

– स्कूलों और मदरसों ने यहीं पर खेल किया और स्टूडेंट्स के खातों की जगह अपने परिचित और रिश्तेदार स्टूडेंट्स के खाते नंबर दिए।

एक स्कूल के पते पर क्लिनिक और अन्य दुकानें मिलीं।

एक स्कूल के पते पर क्लिनिक और अन्य दुकानें मिलीं।

अब जानिए कैसे सामने आया ये घपला?

पिछड़ा वर्ग अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड द्वारा 17 जून 2025 को भोपाल पुलिस को शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें भारत सरकार अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा संचालित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में फर्जी दस्तावेजों के सहारे छात्रवृत्ति का लाभ लेने वाली संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।

दरअसल, भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से कक्षा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों को प्रति वर्ष 5700 रुपए की छात्रवृत्ति दी जाती है, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

विभाग की शिकायत पर जब क्राइम ब्रांच ने संबंधित संस्थानों की जांच की, तो सामने आया कि शैक्षणिक सत्र 2021-2022 में कई स्कूलों और मदरसों ने सरकारी छात्रवृत्ति योजना के तहत फर्जीवाड़ा किया। भोपाल क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेन्द्र चौहान ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई कि इन संस्थानों ने सरकारी स्कॉलरशिप पोर्टल पर लगभग 972 छात्रों के नाम दर्ज किए, जबकि वास्तविकता यह थी कि ये छात्र इन संस्थानों में पढ़ ही नहीं रहे थे।

निरीक्षण के दौरान पता चला कि जिन संस्थानों ने स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था, उन्हें केवल कक्षा 8वीं या 10वीं तक की ही मान्यता प्राप्त थी। इसके बावजूद उन्होंने कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों का फर्जी रजिस्ट्रेशन किया और उन छात्रों के नाम पर केंद्र सरकार से मिलने वाली छात्रवृत्ति की रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली।

कुछ जगह सिर्फ बोर्ड मिला लेकिन स्कूल का कोई अता-पता नहीं।

कुछ जगह सिर्फ बोर्ड मिला लेकिन स्कूल का कोई अता-पता नहीं।

प्रदेश की राजधानी में ही बड़ा घोटाला

क्राइम ब्रांच ने अब तक भोपाल में 40 स्कूलों, मदरसों की पहचान की है, जिन्होंने 972 फर्जी छात्रों के नाम पर लगभग 57.78 लाख रुपए की हेराफेरी की। इनमें 23 निजी स्कूल और 17 मदरसे शामिल हैं। प्रदेश भर में 100 से ज्यादा ऐसे संस्थानों की जांच चल रही है। सभी छात्रों का वेरिफिकेशन होना अभी शेष है। अब तक की जांच में सामने आया है कि जिनके नाम से छात्रवृत्ति निकाली गई है वो स्टूडेंट तो हैं लेकिन संस्था में नहीं पढ़ते।

क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि मामले में जिला शिक्षा अधिकारी, राज्य शिक्षा केंद्र एवं संचालक अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग से आवश्यक जानकारी ले रहे हैं। संबंधित संस्थाओं के संचालकों और उनके प्रमुख से पूछताछ कर रहे हैं।



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