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Sagar Weather Update: सागर जिले में दो तीन दिन से झमाझम तेज बारिश के चलते नदी नाले इस समय उफान पर आ गए हैं. सागर जिले में अब तक 560 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जबकि जिले की औसत बारिश 1250 मिलीमीटर यानी 48 इंच है.
सागर जिले में लगातार हो रही बारिश अब मुसीबत का सबब बन गई है. छोटी और कमजोर पुल-पुलिया जल भराव होने की वजह से बहने लगे हैं. खेत भी पानी से लबालब भरे हैं. कई घरों में बाढ़ का पानी भरने से सब कुछ बर्बाद हो गया. अब मौसम विभाग ने 16-17 जुलाई से फिर भारी बारिश का अलर्ट दिया है.

सोमवार को सुबह से लेकर रात तक बीच-बीच में झमाझम बारिश देखने को मिलती रही. आसपास के जिलों में बारिश होने से नदियां अपने पूरे यौवन पर आ गई हैं. जिसकी वजह से पुल के ऊपर से पानी बह रहा है और रास्ते बंद हैं. सागर जिले में अब तक 560 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जबकि जिले की औसत बारिश 1250 मिलीमीटर यानी 48 इंच है. जिसमें जुलाई के 15 दिनों में 430 mm बारिश रिकॉर्ड की गई है और अभी 15 दिन बाकी हैं.

रहली जनपद क्षेत्र के ग्राम बेरखेड़ी कला में कोकर नदी पर बना हुआ पुल पूरी तरह से एक तरफ से बह गया है. हालांकि, बाजू में एक नवीन पुल निर्माणाधीन है, जहां बारिश की वजह से काम रुक गया है. इस तरह की घटनाएं पहले भी कई जगहों पर देखी गई हैं, जहां पुल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

बंगाल की खाड़ी से एक और ट्रफ लाइन मध्य प्रदेश के शहडोल, रीवा, जबलपुर, सागर और नर्मदापुरम संभागों से गुजरेगी. इसका असर इन संभागों में 16 और 17 जुलाई को देखने को मिलेगा, जब भारी और झमाझम बारिश की संभावनाएं जताई गई हैं.

कलेक्टर संदीप जी आर ने कहा है कि अति वर्षा और बाढ़ से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग पहले से समस्त तैयारियां करें. जल भराव वाले क्षेत्र में कोई भी न जाए. उन्होंने जिले में बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय करने और प्रत्येक कार्य के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं.

कलेक्टर ने बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य अमले, खाद्यान्न आदि की व्यवस्था के साथ अस्थायी आश्रय स्थलों का चयन करने के निर्देश दिए. उन्होंने प्रत्येक टीम के आपसी समन्वय और प्रशिक्षण के भी निर्देश दिए हैं.

जलभराव वाले क्षेत्रों में वहां के तैराकों को भी चिन्हित कर उनको सूची बनाएं. उनके मोबाइल नंबर अपने पास रखें. होमगार्ड के गोताखोरों को भी तैयार रखें.

एसडीआरएफ की टीम और अन्य बचाव दल 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखे जाएं. नाव की व्यवस्था रखी जाए. सभी अनुविभागीय अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में कंट्रोल रूम भी स्थापित करें..