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Bhopal News: बिट्टन मार्केट के सब्जी व्यापारियों ने कहा कि बरसात में सब्जियां महंगी हो जाती हैं. अगर थोक बाजार में कद्दू की कीमत 20 रुपये किलो हो जाए, तो हम यह बिल्कुल कह सकते हैं कि सब्जियों की कीमतें हकीकत मे…और पढ़ें
वह बताते हैं कि हर साल वैसे तो खपत कम होने के साथ दाम में इजाफा हो जाता है, मगर इस बार आसपास के किसानों द्वारा आने वाली सब्जियों की आवक कम हो गई है. यही वजह है कि दूसरे जिलों से आ रही सब्जियों में किराया-भाड़ा मिलाकर दाम बढ़ गए हैं. आरिफ का कहना है कि कुछ दिन पहले बिट्टन मार्केट हाट बाजार में सब्जियों के दाम कम थे. पालक 60 रुपये किलो और मेथी 50 रुपये किलो थी. वहीं अब मेथी-पालक के दाम 120 रुपये तक पहुंच गए हैं. पहले टमाटर 20 से 40 रुपये प्रति किलो थे लेकिन अब 60 रुपये से कम में कुछ नहीं मिल रहा है. गोभी, करेला और गिलकी भी 100 से 120 रुपये किलो तक मिल रही है. पहले 60 रुपये किलो बिकने वाली भिंडी अब 100 रुपये किलो बिक रही है. गिलकी 60 रुपये से 120 रुपये किलो, करेला 80 रुपये से 120 रुपये, शिमला मिर्च 50 रुपये से 120 रुपये और टमाटर 40 रुपये से 60 रुपये किलो हो गया है.
महाराष्ट्र से आ रहीं सब्जियां
बारिश के मौसम में भोपाल के आसपास के क्षेत्रों में सब्जियों का उत्पादन नहीं होता है, इसलिए सब्जियों की स्थानीय आवक बहुत कम हो जाती है. सब्जी विक्रेता आरिफ ने बताया कि अभी हमारे पास महाराष्ट्र के अलावा इंदौर, रतलाम और मंदसौर से आपूर्ति हो रही है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी सब्जियों की कीमतें ज्यादा हैं.
जानें क्या बोले व्यापारी?
सब्जियों की सप्लाई कम होने के साथ थोक बाजार में दाम बढ़ने से खुदरा बाजार में भी दाम बढ़ जाते हैं. बिट्टन मार्केट के सब्जी व्यापारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों से सब्जियां भोपाल लाई जाती हैं, वहां बारिश की मात्रा उनकी कीमतों को तय करने में एक प्रमुख कारक है. बारिश में सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं. अगर थोक बाजार में कद्दू 20 रुपये प्रति किलो बिकना शुरू हो जाए, तो हम यह कह सकते हैं कि सब्जियों की कीमतें वास्तव में बढ़ गई हैं.