छोटे अस्पताल अब बिना सूचना के नवजात को बड़े अस्पताल नहीं भेज सकेंगे। अभी स्वास्थ्य केंद्र से लेकर सिविल अस्पताल, ज्यादातर नवजात मरीजों को जेपी अस्पताल या हमीदिया अस्पताल रेफर कर देते थे। अब ऐसा करने पर कार्रवाई होगी।
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यही नहीं, जरूरतमंद मरीज को यदि रेफर करने में देरी की गई तो भी संबंधित पर एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए हर सप्ताह इन अस्पतालों में रेफर केस का ऑडिट किया जाएगा। इसको लेकर CMHO भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने बुधवार को आदेश जारी किए हैं।
सिविल अस्पताल का किया निरीक्षण सिविल अस्पताल बैरागढ़ स्थित न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (NBSU) का बुधवार को CMHO भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यूनिट में भर्ती नवजातों के उपचार की स्थिति और डिस्चार्ज हो चुके बच्चों के फॉलोअप की जानकारी ली। चार बिस्तरों वाले इस एनबीएसयू में हर माह 25 से 30 नवजात शिशुओं को विभिन्न चिकित्सकीय जटिलताओं के आधार पर भर्ती किया जाता है।
भोपाल जिले में फिलहाल तीन स्थानों बैरागढ़ व बैरसिया सिविल अस्पताल और एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट संचालित हैं। इन यूनिट्स में जन्म के तुरंत बाद गंभीर स्थिति वाले नवजातों को प्राथमिक उपचार और एडमिशन की सुविधा दी जाती है।
केवल जरूरत पड़ने पर होंगे बच्चे रेफर निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल जरूरत पड़ने पर ही नवजातों को अन्य उच्च संस्थाओं में रेफर किया जाए। रेफर करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि जिस अस्पताल में रेफर किया जा रहा है, वहां के चिकित्सक या स्टाफ से संपर्क कर लिया गया हो। साथ ही, इस निर्णय की जानकारी बच्चे के परिजनों को भी देना अनिवार्य होगा।
डॉ. शर्मा ने यह भी निर्देश दिए कि रेफर किए गए बच्चों के स्वास्थ्य का नियमित फॉलोअप किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शिशु को समय पर उचित उपचार मिल रहा है। इसके अलावा, जिन बच्चों को रेफर किया गया है, उनके मामलों का ऑडिट अस्पताल स्तर पर प्रत्येक सप्ताह किया जाए। इस प्रक्रिया से रेफरल की गुणवत्ता और आवश्यकता की समीक्षा की जा सकेगी।
निरीक्षण के दौरान यह भी निर्देशित किया गया कि रात के समय प्रसव की स्थिति में शिशु रोग विशेषज्ञ की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, जिससे नवजात शिशु को तुरंत जरूरी चिकित्सा सुविधा मिल सके।